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World Elephant Day: हाथियों के संरक्षण का संदेश लेकर बांधवगढ़ में मना विश्व हाथी दिवस, रामा-सूर्या बने आकर्षण
Wed, 12 Aug 2026 06:06 PM IST
उमरिया ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
Published by: उमरिया ब्यूरो
Updated Wed, 12 Aug 2026 06:06 PM IST
सार
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में विश्व हाथी दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम हुआ। पालतू हाथी रामा और सूर्या बच्चों व पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहे। वन विभाग ने हाथी संरक्षण, प्राकृतिक आवास सुरक्षा और मानव-हाथी संघर्ष कम करने के लिए जागरूक किया।
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रामा और सूर्या बने आकर्षण का केंद्र।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उमरिया जिले के प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बुधवार को विश्व हाथी दिवस के अवसर पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। ताला परिक्षेत्र में हुए कार्यक्रम में वन विभाग और टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने हाथियों के संरक्षण, उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने का संदेश दिया। कार्यक्रम में स्थानीय लोगों के साथ स्कूली बच्चे और पर्यटक भी शामिल हुए।
रामा और सूर्या ने खींचा बच्चों का ध्यान
कार्यक्रम में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पालतू हाथी रामा और सूर्या आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहे। स्कूली बच्चों और पर्यटकों ने दोनों हाथियों को करीब से देखा। बच्चों ने हाथियों को गन्ना और फल खिलाकर उनके प्रति अपना स्नेह जताया। हाथियों को देखकर बच्चों में खासा उत्साह नजर आया और उन्होंने वन विभाग के कर्मचारियों से हाथियों के जीवन, व्यवहार और जंगल में उनकी भूमिका के बारे में जानकारी ली।
वन विभाग की ओर से कार्यक्रम स्थल पर बैनर और पोस्टर लगाए गए थे। इनके माध्यम से लोगों को हाथियों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के प्रति जागरूक किया गया। वन अमले ने लोगों से अपील की कि हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से उनके करीब न जाएं और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाएं।
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बढ़ती संख्या के बीच ग्रामीणों को किया जा रहा जागरूक
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पिछले कुछ वर्षों में हाथियों की मौजूदगी और संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है। इसके चलते टाइगर रिजर्व से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में भी हाथियों की आवाजाही बढ़ी है। ऐसे में वन विभाग द्वारा ग्रामीणों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने, सुरक्षित दूरी बनाए रखने और वन्यजीवों को परेशान नहीं करने की सलाह दी जा रही है।
वन विभाग का उद्देश्य मानव और हाथियों के बीच होने वाले संभावित संघर्ष को कम करना है। इसके लिए ग्रामीणों को हाथियों के व्यवहार और उनकी मौजूदगी के संकेतों की जानकारी दी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जागरूकता और सतर्कता के जरिए मानव और वन्यजीवों के बीच बेहतर सह-अस्तित्व कायम किया जा सकता है।
वन्यजीव निगरानी में भी अहम भूमिका
टाइगर रिजर्व प्रबंधन के अनुसार, प्रशिक्षित पालतू हाथियों की भूमिका केवल पर्यटकों के आकर्षण तक सीमित नहीं है। जंगल के घने और दुर्गम क्षेत्रों में वन्यजीवों की निगरानी, ट्रैकिंग और रेस्क्यू ऑपरेशन में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। विशेष परिस्थितियों में बाघ और तेंदुए जैसे वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने तथा उनके रेस्क्यू अभियान में हाथियों की मदद ली जाती है। घने जंगलों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में हाथियों के जरिए वन अमले को ऐसे क्षेत्रों तक पहुंचने में मदद मिलती है, जहां सामान्य वाहनों से पहुंचना मुश्किल होता है। यही वजह है कि बांधवगढ़ में प्रशिक्षित हाथियों को वन्यजीव प्रबंधन और संरक्षण व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
संरक्षण के साथ सुरक्षित सह-अस्तित्व पर जोर
विश्व हाथी दिवस के कार्यक्रम के माध्यम से वन विभाग ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि हाथियों का संरक्षण केवल जंगल तक सीमित जिम्मेदारी नहीं है। जंगलों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों, पर्यटकों और आम लोगों की सहभागिता भी इसमें महत्वपूर्ण है। हाथियों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना और उनके विचरण क्षेत्र में मानवीय दखल कम करना संरक्षण की दिशा में जरूरी कदम हैं।
कार्यक्रम में बच्चों और पर्यटकों की सहभागिता ने इसे खास बना दिया। रामा और सूर्या को देखने के लिए लोगों में उत्साह रहा। वन विभाग ने लोगों से अपील की कि वे वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील रहें और जंगल में उनकी स्वतंत्र गतिविधियों का सम्मान करें। विश्व हाथी दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम संरक्षण के साथ मानव और वन्यजीवों के बीच बेहतर तालमेल का संदेश देकर समाप्त हुआ।
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रामा और सूर्या ने खींचा बच्चों का ध्यान
कार्यक्रम में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पालतू हाथी रामा और सूर्या आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहे। स्कूली बच्चों और पर्यटकों ने दोनों हाथियों को करीब से देखा। बच्चों ने हाथियों को गन्ना और फल खिलाकर उनके प्रति अपना स्नेह जताया। हाथियों को देखकर बच्चों में खासा उत्साह नजर आया और उन्होंने वन विभाग के कर्मचारियों से हाथियों के जीवन, व्यवहार और जंगल में उनकी भूमिका के बारे में जानकारी ली।
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वन विभाग की ओर से कार्यक्रम स्थल पर बैनर और पोस्टर लगाए गए थे। इनके माध्यम से लोगों को हाथियों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के प्रति जागरूक किया गया। वन अमले ने लोगों से अपील की कि हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से उनके करीब न जाएं और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाएं।
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बढ़ती संख्या के बीच ग्रामीणों को किया जा रहा जागरूक
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पिछले कुछ वर्षों में हाथियों की मौजूदगी और संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है। इसके चलते टाइगर रिजर्व से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में भी हाथियों की आवाजाही बढ़ी है। ऐसे में वन विभाग द्वारा ग्रामीणों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने, सुरक्षित दूरी बनाए रखने और वन्यजीवों को परेशान नहीं करने की सलाह दी जा रही है।
वन विभाग का उद्देश्य मानव और हाथियों के बीच होने वाले संभावित संघर्ष को कम करना है। इसके लिए ग्रामीणों को हाथियों के व्यवहार और उनकी मौजूदगी के संकेतों की जानकारी दी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जागरूकता और सतर्कता के जरिए मानव और वन्यजीवों के बीच बेहतर सह-अस्तित्व कायम किया जा सकता है।
वन्यजीव निगरानी में भी अहम भूमिका
टाइगर रिजर्व प्रबंधन के अनुसार, प्रशिक्षित पालतू हाथियों की भूमिका केवल पर्यटकों के आकर्षण तक सीमित नहीं है। जंगल के घने और दुर्गम क्षेत्रों में वन्यजीवों की निगरानी, ट्रैकिंग और रेस्क्यू ऑपरेशन में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। विशेष परिस्थितियों में बाघ और तेंदुए जैसे वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने तथा उनके रेस्क्यू अभियान में हाथियों की मदद ली जाती है। घने जंगलों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में हाथियों के जरिए वन अमले को ऐसे क्षेत्रों तक पहुंचने में मदद मिलती है, जहां सामान्य वाहनों से पहुंचना मुश्किल होता है। यही वजह है कि बांधवगढ़ में प्रशिक्षित हाथियों को वन्यजीव प्रबंधन और संरक्षण व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
संरक्षण के साथ सुरक्षित सह-अस्तित्व पर जोर
विश्व हाथी दिवस के कार्यक्रम के माध्यम से वन विभाग ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि हाथियों का संरक्षण केवल जंगल तक सीमित जिम्मेदारी नहीं है। जंगलों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों, पर्यटकों और आम लोगों की सहभागिता भी इसमें महत्वपूर्ण है। हाथियों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना और उनके विचरण क्षेत्र में मानवीय दखल कम करना संरक्षण की दिशा में जरूरी कदम हैं।
कार्यक्रम में बच्चों और पर्यटकों की सहभागिता ने इसे खास बना दिया। रामा और सूर्या को देखने के लिए लोगों में उत्साह रहा। वन विभाग ने लोगों से अपील की कि वे वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील रहें और जंगल में उनकी स्वतंत्र गतिविधियों का सम्मान करें। विश्व हाथी दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम संरक्षण के साथ मानव और वन्यजीवों के बीच बेहतर तालमेल का संदेश देकर समाप्त हुआ।
