अप्रैल में कारों की बिक्री घटने से पूरी ऑटो इंडस्ट्री सदमे में है। पिछले तीन महीनों से कारों और एसयूवी की बिक्री में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। अप्रैल 2019 में 160,279 यात्री वाहनों की बिक्री हुई, जबकि पिछले साल अप्रैल 2018 में 200,183 वाहनों की बिक्री हुई थी। वहीं अब इस स्लोडाउन के बाद इसकी वजह को पहचाना जा रहा है। हम बता रहे हैं वे 5 कारण जिनकी वजह से घटी है बिक्री...
आखिर क्यों नहीं खरीद रहे लोग नई कारें, आप भी जान लीजिए ये हैं 5 बड़ी वजह
बढ़ी कच्चे तेल की कीमतें
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है। इस साल में ही अब तक 34 प्रतिशत कर कीमतें बढ़ चुकी हैं। इन दिनों कच्चे तेल की कीमतें 72 डॉलर के आसपास टिकी हुई हैं, जबकि इस साल जनवरी 2019 में ये कीमतें 59 डॉलर थीं। हालांकि आम चुनावों के चलते पिछले कुछ हफ्तों से तेल की कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन ग्राहकों को डर है कि चुनाव खत्म होतते ही तेल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी होगी और उन्हें अपने फैसले के लिए पछताना पड़ सकता है।
चुनावों की वजह से राजनीतिक अनिश्चितता
वाहनों की बिक्री घटने के पीछे इसे भी मुख्य वजह माना जा रहा है। लेकिन राजनीतिक अनिश्चितता के चलते भी ग्राहक घबरा रहे हैं। उन्हें डर है कि नई सरकार नीतियों में बदलाव कर सकती है। वहीं ब्याज दरों के लेकर अनिश्चितता है, साथ ही उन्हें डर है कि चुनाव पश्चात क्या जीएसटी की दरों में बदलाव हो सकता है। वहीं कृषि नीतियों और मानसून की भविष्यवाणी अनिश्चितता भी ग्राहकों को फैसला लेने से रोक रही है।
नए सेफ्टी ऩॉर्म्स
अप्रैल 2019 से भारतीय वाहनों के लिए नए सेफ्टी नियम लागू हो चुके हैं, जिनमें चरणों में लागू किया जा रहा है। देश में बिकने वाली सभी नई कारें एबीएस और एयरबैग्स के साथ बिकेंगी। जुलाई 2019 से कारों में सीट बेल्ट वार्निंग, स्पीड वार्निंग और रिवर्स पार्किंग सेंसर्स लगाना जरूरी होगा। वहीं अक्टूबर, 2019 से सभी नई कारों को भारत एनसीएपी क्रेश टेस्ट के मानकों के मुताबिक बनाना होगा। जिसके चलते कई कार कंपनियां अपने मॉडल्स को नए स्टैंडर्ड के मुताबिक ढालने की तैयारी कर रही हैं। साथ ही, अप्रैल 2020 से सभी इंजन बीएस-6 स्टैंडर्ड वाले होंगे। जिसके चलते कई खरीदारों ने नई कार लेने का फैसला टाल दिया है। ग्राहकों को नए मॉडल के लांच होने का इंतजार है।
महंगा होता इंश्योरेंस
ऑटोमोबाइल इंश्योंरेस नियमों में पिछले साल ही बदलाव किए गए थे। सितंबर 2018 में अदालत के आदेश के बाद सभी बीमा कंपनियों को नई कारों पर थर्ड पार्टी कवर देना जरूरी हो गया है। वहीं नए दो पहियों वाहनों पर भी पांच साल के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस देना होगा। भले ही कॉम्प्रैहेंसिव इंश्योरेस एक साल, 3 या पांच साल के लिए ले सकते हैं, लेकिन थर्ड पार्टी इंश्योरेंस जरूरी है। जिससे कारों की ऑन-रोड कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिससे ग्राहक भी नई कार लेने में हिचक रहे हैं।