दिवाली के पावन पर्व पर जहां बाजार में विदेशी चाइनीज बल्ब और अन्य सजावटी सामानों की भरमार होती है, वहीं मुजफ्फरपुर के कुम्हार जयप्रकाश पंडित ने अपनी मिट्टी से जुड़े हुए देसी उत्पादों से चीन को टक्कर देने की ठानी है। जयप्रकाश पंडित देशी मिट्टी से बने दीये, मूर्तियां और अन्य सजावटी सामग्री तैयार कर लोगों को अपने देश की मिट्टी से जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। उनका उद्देश्य न सिर्फ लोकल उत्पादों को बढ़ावा देना है, बल्कि लोगों में आत्मनिर्भरता का विश्वास जगाना भी है।
Diwali 2024: मुजफ्फरपुर में मिट्टी से बने दीप-दीयों से दिवाली को मिलेगा देसी रंग, चीनी उत्पादों को टक्कर
Diwali 2024: मुजफ्फरपुर में मिट्टी से बने दीप-दीयों से दिवाली को मिलेगा देसी रंग, चीनी उत्पादों को टक्कर
Muzaffarpur Potter Jaiprakash Pandit will give indigenous colors to Diwali with earthen lamps Chinese products
दीये-मूर्तियां देसी रंग और खुशबू से बन रहे खास
कुम्हार जयप्रकाश ने इस बार अपने दीप-दीयों और अन्य सामग्रियों को एक अनोखा रंग-रूप दिया है। उन्होंने अपने उत्पादों में देसी रंगों का प्रयोग किया है, जिससे इन्हें एक आकर्षक रूप मिला है। जयप्रकाश ने बताया कि हमने बीते छह महीने से इन मिट्टी के सामानों को तैयार करने में कड़ी मेहनत की है। हमारा उद्देश्य सिर्फ उत्पाद बेचने का नहीं है, बल्कि यह विश्वास दिलाना है कि हमारे देश की मिट्टी की खुशबू में ही एक विशेष प्रकार की आस्था और अपनेपन की भावना है। लोग इसे महसूस करें, इसीलिए हर रंग और डिजाइन को खास तरीके से तैयार किया है।
‘वोकल फॉर लोकल’ को दे रहे बढ़ावा
जयप्रकाश पंडित का मानना है कि मिट्टी का सीधा संबंध देश की संस्कृति और परंपरा से है। वे कहते हैं कि हमारी जड़ें इस मिट्टी से जुड़ी हैं, इसे सहेजना और संवारना हमारा कर्तव्य है। इस मिट्टी से बने दीप-दीयों और मूर्तियों के प्रति लोगों को जागरूक करना चाहते हैं ताकि लोग आत्मनिर्भर बनें और 'वोकल फॉर लोकल' की भावना को समझें। उनके इस प्रयास से छोटे कारीगरों को भी मदद मिल रही है, जो विदेशी बाजार के मुकाबले स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
चीनी उत्पादों को टक्कर देने की ठानी
जयप्रकाश पंडित के अनुसार, पिछले कुछ सालों में सस्ते चाइनीज बल्ब और सजावटी उत्पादों के कारण हमारे देश के स्थानीय कारीगरों की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा है। हमने मिट्टी के उत्पादों में ही एक आकर्षण पैदा किया है ताकि लोग चाइनीज उत्पादों की ओर न झुकें और देशी सामग्री को अपनाएं। उनका यह प्रयास लोगों को आस्था और विश्वास से जोड़े रखने का भी है। जयप्रकाश का कहना है कि अगर लोग विदेशी उत्पादों का मोह छोड़कर अपने देश की मिट्टी को अपनाते हैं, तो यह चीन के प्रति एक सशक्त जवाब होगा।
दिन-रात की मेहनत से बना अनोखा बाजार
जयप्रकाश बताते हैं कि उनकी छह महीनों की दिन-रात की मेहनत अब रंग लाई है। उनके बनाए मिट्टी के दीये और सजावटी सामानों की बिक्री ने लाखों का आंकड़ा छू लिया है। उन्होंने बताया कि इस पहल से हमने न सिर्फ एक अच्छी आमदनी की है बल्कि लोगों में देशी उत्पादों के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई है। जब बात आस्था और परंपरा से जुड़ी होती है, तो लोग अपने देशी उत्पादों की ओर जरूर आकर्षित होते हैं।