5 Unique Railway Station in India: भारत में कई हैरान करने वाली जगहें हैं जिनके बारे में जानने के बाद यकीन करना मुश्किल होता है। भारत में कई अजीबोगरीब रेलवे स्टेशन भी हैं जिनके बारे में जानने के बाद आम इंसान हैरत में पड़ जाता है। दिल्ली-मुबई रेल रूट पर एक ऐसा अनोखा रेलवे स्टेशन है जो दो राज्यों में पड़ता है। यह जानकर आपको थोड़ा अजीब लग रहा होगा, लेकिन यह बिल्कुल सच है। यह रेलवे स्टेशन राजस्थान के झालावाड़ जिले में पड़ता है जहां पर आधी ट्रेन एक राज्य में खड़ी होती है, तो आधी दूसरे राज्य में खड़ी होती है।
अजब-गजब: ये हैं भारत के 5 सबसे अनोखे रेलवे स्टेशन, इस एक पर बिना वीजा नहीं जा सकता है कोई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मध्य प्रदेश के लोगों को हर काम के लिए भवानी मंडी स्टेशन ही आना पड़ता है जिसकी वजह से दोनों प्रदेश के लोगों में आपसी प्रेम और सौहार्द देखने को मिलता है। राजस्थान की सीमा पर स्थित लोगों के घर के सामने का दरवाजा भवानी मंडी कस्बे में खुलता है, जबकि पीछे का दरवाजा मध्य प्रदेश के भैंसोदा मंडी में खुलता है। सबसे खास बात यह है कि दोनों राज्यों के लोगों का बाजार भी एक है।
नवापुर रेलवे स्टेशन
यह स्टेशन भी भवानी मंडी की तरह दो राज्यों में पड़ता है। गुजरात और महाराष्ट्र की सीमा में यह अनोखा रेलवे स्टेशन स्थित है। इस रेलवे स्टेशन पर मौजूद बेंच दो राज्यों में पड़ती है। इस स्टेशन की सबसे अनोखी बात यह है कि यहां पर हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती और मराठी भाषाओं में घोषणा होती है।
जब यह स्टेशन बना था उस समय महाराष्ट्र और गुजरात एक ही राज्य थे। संयुक्त मुंबई प्रांत में नवापुर स्टेशन पड़ता था, लेकिन साल 1961 में जब इसका बंटवारा हुआ, तो ये स्टेशन महाराष्ट्र और गुजरात में विभाजित हुआ। दोनों राज्यों में नवापुर स्टेशन के पड़ने से इसकी अलग पहचान है।
बिना नाम का रेलवे स्टेशन
पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले में एक अनोखा रेलवे स्टेशन है जिसके बारे में जानकर आप हैरान हो जाएंगे। सबसे बड़ी बात है कि इस रेलवे स्टेशन का कोई नाम ही नहीं है। यह रेलवे स्टेशन बर्धमान टाउन से 35 किमी दूर स्थित है। साल 2008 में बांकुरा-मैसग्राम रेल लाइन पर इसका निर्माण किया गया था। उस समय इस स्टेशन का नाम रैनागढ़ रखा गया था, लेकिन रैना गांव के लोगों ने इसका विरोध किया और रेलवे बोर्ड से शिकायत की। इसके बाद से अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं हुआ तब से ही इस स्टेशन का कोई नाम नहीं रखा गया है।