Chandra Grahan 2026: खगोलीय घटनाओं में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए तीन मार्च का दिन बेहद खास है। दरअसल, तीन मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा। यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। इस दौरान आसमान में चंद्रमा का रंग लाल नजर आएगा। यह अद्भुत नजारा होगा। यह ग्रहण दुनिया के बड़े हिस्से में देखा जा सकता है।
Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को आसमान में दिखेगा अद्भुत नजारा, चंद्र ग्रहण के दौरान खून जैसा लाल हो जाएगा चांद
Chandra Grahan 2026: तीन मार्च को साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा। यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसे पूरे एशिया और ऑस्ट्रेलिया में देखा जा सकता है। साथ ही पैसिफिक द्वीपों और उत्तरी व दक्षिणी अमेरिका में भी यह दिखेगा।
ग्रहण के दौरान क्यों लाल रंग का दिखता है चांद?
चंद्र ग्रहण के दौरान नजर आने वाले चांद का लाल रंग सूरज की रोशनी के पृथ्वी के एटमॉस्फियर से गुजरने के काराण होता है। नीली रोशनी ज्यादा आसानी से फैलती है, तो वहीं लाल वेवलेंथ चांद की तरफ मुड़ती हैं। इससे उसे कॉपर या क्रिमसन रंग की चमक मिलती है। यह सूर्योदय और सूर्यास्त के समय दिखने वाले रंगों की तरह होती है।
कब दिखेगा चंद्र ग्रहण?
पूर्ण चंद्र ग्रहण को पूरे एशिया और ऑस्ट्रेलिया में देखा जा सकता है। साथ ही पैसिफिक द्वीपों और उत्तरी व दक्षिणी अमेरिका में भी यह दिखेगा। भारतीय समयानुसार, यह चंद्र ग्रहण दोपहर 03.20 बजे से लेकर शाम 06.47 बजे तक रहेगा। लंबी अवधि के कारण ग्रहण अलग-अलग टाइम जोन में दिखेगा।
क्यों लगता है चंद्र ग्रहण?
पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाती है। चंद्रमा एक उपग्रह है, जो धरती की परिक्रमा करता है। इस दौरान जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है, तो सूर्य की रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती है। इससे धरती की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इस खगोलीय घटना को चंद्र ग्रहण कहा जाता है। पूर्णिमा के दिन यह खगोलीय घटना होती है। हिन्दू पंचांग के मुताबिक, प्रत्येक महीने के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि को पूर्णिमा पड़ती है।
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कैसे देख सकते हैं चंद्र ग्रहण?
कहा जाता है कि सूर्य ग्रहण को सीधे नंगी आखों से नहीं देखना चाहिए, जबकि चंद्र ग्रहण नंगी आंखों से देखने के लिए पूरी तरह से सुरक्षित हैं। चंद्र ग्रहण को देखने के लिए किसी विशेष चश्मे की जरूरत नहीं होती है। हालांकि, अध्ययन करने वाले खगोल वैज्ञानिक जरूर दूरबीन या टेलिस्कोप जैसे यंत्रों का इस्तेमाल करते हैं।
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