Dinosaur: धरती पर 6.6 करोड़ साल पहले विशाल डायनासोर राज करते थे। लेकिन पृथ्वी से एक विशाल एस्टेरॉयड टकराया और डायनासोर खत्म हो गए। डायनासोर के खत्म होने की घटना को इतिहास की सबसे अहम घटनाओं में से एक माना जाता है। एक नए शोध में डायनासोर को लेकर हैरान करने वाला खुलासा हुआ है। वर्षों से सवाल रहा है कि आखिर डायनासोर का खात्मा कैसे हुआ? अब वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने इस रहस्य को सुलझा लिया है। अभी तक वैज्ञानिक मानते आ रहे थे कि एस्टेरॉयड के पृथ्वी से टकराने के बाद धूल उड़ी और सूरज की रोशनी को रोक दी, जिससे धरती पर लंबे समय भयानक ठंड का मौसम रहा।
Dinosaur: 6.6 करोड़ साल पहले कैसे हुई थी डायनासोरों की मौत? वैज्ञानिकों ने किया चौंकाने वाला खुलासा
Dinosaur: धरती पर 6.6 करोड़ साल पहले डायनासोरों का खात्मा हो गया था। इनके खात्मे को लेकर वर्षों से कई सवाल खड़े होते हैं। अब इस बीच वैज्ञानिकों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है।
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धरती से कौन सा एस्टेरॉयड टकराया था
वैज्ञानिकों ने वर्षों से दावा करते आ रहे हैं कि चिक्सुलूब एस्टेरॉयड, जो छह से नौ मील चौड़ा था। यह मेक्सिको के युकाटन प्रायद्वीप से टकराया था, लेकिन स्पष्ट नहीं हैं कि घटनाएं कैसी घटीं थीं। पृथ्वी से एस्टेरॉयड टकराने से धूल और चट्टान की भाप का एक विशालकाय बादल हवा में बहुत ऊपर तक उछलकर गया था। इस चट्टानी भाप का कुछ भाग ठंडा हो गया और छोटी-छोटी बूंदों में बदल गया। इन बूदों को स्फेरूल्स कहा जाता है। यह बूंदे टक्कर वाली जगह से दूर उड़ गईं और फिर वापस आकर सतह पर गिर गईं। पहले के अध्ययन से जानकारी मिलती है कि स्फेरूल्स काफी गर्म थे और जानवरों को जला सकते थे। हालांकि, इतने गर्म नहीं थे कि पौधों में अचानक आग लगे।
क्यों बच गए कुछ जानवर?
कई वैज्ञानिक मानते थे कि टक्कर के बाद तुरंत बड़े पैमाने पर तबाही नहीं हुई थी। पर्ड्यू यूनिवर्सिटी की टीम का नए अध्ययन में मानना है कि उन्होंने बाकी रहस्यो को भी सुलझा लिया है। उनका नए सबूतों के आधार पर कहना है कि चट्टानी भाप के भाग स्फेरूल्स बनाने के लिए ठंडा नहीं हुए, बल्कि हवा में ही बना रहे। धूल की चादर से सतह 3.5 से ज्यादा गर्म हो गई। इससे न सिर्फ रास्ते में आने वाले जानवरों की मौत हुई, बल्कि जंगलों में अचानक आ लग गई। प्रोफेसर जॉनसन ने कहा कि अगर बारीक धूल भी नहीं होती तो भी डायनासोर के लिए यह खतरनाक दिन होता। इससे कुछ डायनासोर मर जाते, लेकिन शायद बड़े पैमाने पर जंगल में आग नहीं फैलती।
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यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के पैलियोन्टोलॉजिस्ट अल्फियो एलेसेंड्रो ने कहा कि टक्कर के दौरान कौन से जानवर बचे और उनकी शारीरिक विशेषताएं क्या थीं, जिसका पता लगना अच्छा होगा। इससे यह पता चल सकता है कि डायनासोर क्यों मर गए और कुछ जानवर क्यों बच गए।
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बारीक धूल से हुई मौत
बारीक धूल क्रिटेशियस काल के जानवरों के लिए खतरनाक साबित हुई। थर्मल रेडिएशन इंसानों के लिए 100 फीसदी जानलेवा होती है, जिसकी मात्रा से जानवरों को 17 गुना रेडिएशन का सामना करना पड़ा। बादलों को लेकर शोध करने वाली एलेक्जेंड्रिया जॉनसन का कहना है कि अगर जानवर आग की गर्मी से नहीं मरते, तो भी इन कणों के कारण उनकी सेहत पर लंबे समय तक बुरा प्रभाव पड़ता।