मेडिकल क्षेत्र में इंसान ने अकल्पनीय तरक्की कर ली है। आज के समय में लगभग हर तरह की बीमारी का इलाज खोजा जा चुका है, लेकिन अभी भी एक नासूर ऐसा है जो हर साल लाखों लोगों की जान ले लेता है। इस नासूर का नाम है कैंसर, एक ऐसी बीमारी जिसका कोई ठोस इलाज अभी तक नहीं मिल पाया है। जो एक बार इसकी चपेट में आ जाता है उसे यह बीमारी मौत के बाद ही छोड़ती है। लेकिन इससे बचने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं। इन उपायों में सबसे महत्वपूर्ण है समय-समय पर अपने शरीर की चिकित्सा जांच कराना। लेकिन यहां परेशानी यह है कि कुछ लोग महंगी चिकित्सा जांच कराने में सक्षम नहीं होते तो कुछ को लगता है कि उन्हें कोई बीमारी हो ही नहीं सकती है। लेकिन अंत में जब यह भ्रम टूटता है तो पचतावे के अलावा कुछ नहीं बचता। कैंसर से जंग जीतने के लिए कई तरह की कोशिशें की जा रही हैं। कुछ महान लोग कैंसर के प्रति जागरुकता फैलाने का काम बखूबी कर रहे हैं।
ब्रेस्ट कैंसर की वजह से इस हस्ती ने खो दिए अपने 6 लोग, अब कर रहा है ये नेक काम
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आज की खबर भी एक ऐसे ही महान इंसान के बारे में है। खेल जगत का एक ऐसा सितारा जिसने ब्रेस्ट कैंसर से अपने परिवार के 6 लोगों को खो दिया। इसके बाद अपने गम से सीख लोते हुए उन्होंने दूसरों को खुशी देने और सुरक्षित रखने का फैसला किया। यह महान व्यक्ति हैं अमेरिका में नेशनल फुटबॉल लीग (एनएफएल) के मशहूर फुटबॉलर डी एंजिलो विलियम्स। विलियम्स बैक पोजिशन पर खेला करते थे। इन्होंने 500 महिलाओं का फ्री में मेमोग्राफी टोस्ट करा कर एक मिसाल कायम की है। ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाने के लिए मेमोग्रफी की जाती है।
2006 में ब्रेस्ट कैंसर के चलते विलियम्स ने अपनी मां को खो दिया था, इसके बाद उनकी चारों बहनों की भी इसी बीमारी के चलते मौत हो गई थी। दुख की बात यह है कि इन सभी की उम्र 50 वर्ष से कम थी। अपने पूरे परिवार को ब्रेस्ट कैंसर के कारण खो देना विलियम्स के लिए बड़ा आघात था। विलियम्स ने अपने दुख से जंग लड़ी और इसके खिलाफ कुछ करने का फैसला किया जिसके बाद उन्होंने अपनी मां की याद में डी एंजिलो विलियम्स फाउंडेशन बनाया और लोगों को इस बीमारी के बारे में जागरूक करने में अहम योगदान दिया।
ब्रेस्ट कैंसर के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए गुलाबी रंग का प्रयोग किया जाता है। विलियम्स भी अपने बालों पर गुलाबी रंग लगाते थे। जब वे कैरोलिना पैंथर्स और पिट्सबर्ग स्टीलर्स के लिए खेलने लगे तो भी गुलाबी रंग उनके हेलमेट से बाहर दिखता था। जब उनसे गुलाबी रंग लगाने की वजह के बारे में पूछा गया तो उनका जवाब था,'गुलाबी मेरे लिए कोई रंग नहीं, बल्कि एक संस्कृति है।'
डी एंजिलो ने पहले 53 महिलाओं की मैमोग्रफी का खर्च उठाने का फैसला किया इस फैसले कि वजह यह थी कि मृत्यु के समय उनकी मां की उम्र भी 53 वर्ष थी। उनके लिए यह अपनी मां को श्रद्धांजलि देने का एक तरीका था और उन्होंने इस प्रोजेक्ट का नाम 53 स्ट्रांग फॉर सैंड्रा रखा था। सैंड्रा विलियम्स की मां का नाम था। इस प्रोजेक्ट को शुरू करने के बाद विलियम्स को एहसास हुआ कि सिर्फ 53 महिलाओं की मेमोग्राफी कराने से कुछ हासिल नहीं होगा। इसके बाद वह प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाते चले गए और विलियम्स इस प्रोजेक्ट के तहत अब तक उत्तरी कैरोलिना, पेनसिल्वेनिया, टेनेसी और आराकांस में पांच सौ से अधिक ऐसी महिलाओं की मैमोग्राफी करा चुके हैं, जिनके बीमे में यह जांच कवर नहीं थी। ये सभी वे राज्य हैं, जिनके साथ डी एंजिलो विलियम्स फुटबॉल की वजह से जुड़े हुए हैं।