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भूकंप आने पर बिहार पहुंचे थे महात्मा गांधी, 5-5 रुपये में बेचा था अपना ऑटोग्राफ

फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Wed, 02 Oct 2019 01:02 PM IST
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महात्मा गांधी - फोटो : फाइल फोटो

दक्षिण अफ्रिका से लौटने के बाद महात्मा गांधी ने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपने प्रयास शुरू कर दिए। इसकी शरूआत उन्होंने बिहार के चंपारण में आंदोलन से किया। बिहार का चंपारण ही महात्मा गांधी को 'महात्मा' बनाया था। लेकिन केवल चंपारण ही बापू का कर्मक्षेत्र नहीं था। चंपारण आंदोलन के कुछ दिनों के बाद गांधी जी फिर बिहार के भागलपुर आए थे। यहां पर उन्होंने लोगों को स्वतंत्रता संग्राम के लिए तैयार किया था।

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महात्मा गांधी - फोटो : फाइल फोटो

सन 1934 में बिहार में आए भूकंप से भागलपुर ज्यादा प्रभावित था। कांग्रेस द्वारा पीड़ितों के लिए राहत कार्य जारी था। इस राहत कार्य को देखने के लिए बापू भी सहरसा से बिहपुर होते हुए भागलपुर पहुंचे थे। गांधी जी ने भागलपुर के लाजपत पार्क में लोगों को संबोधित करते हुए राहत कार्य में सहयोग करने और भूकंप पीड़ितों की मदद करने की अपील की थी।

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Mahatma Gandhi - फोटो : social media

लाजपत पार्क में सभा के दौरान स्वयंसेवकों ने झोली फैला लोगों से चंदा एकत्र किया था। इस सभा में बहुत से ऐसे लोग थे जो गांधी जी का ऑटोग्राफ लेना चाहते थे। गांधी जी ने 5-5 रुपये लेकर लोगों को अपना ऑटोग्राफ दिया। ऑटोग्राफ देने से मिलें पैसे को बापू ने भूकंप पीड़ितों की मदद के लिए दे दी थी।

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भागलपुर में गांधी जी दीप नारायण सिंह के घर पर ठहरे थे। जिस भवन में गांधी जी ठहरे हुए थे उसे बाद में दीप नारायण सिंह के इच्छानुसार जिला न्यायाधीश का आवास बना दिया गया। यह भवन अपने विशिष्ट वास्तुकला व बनावट के कारण बिहार में अनूठा है। फिलहाल इस भवन को 'हेरिटेज बिल्डिंग' की सूची में शामिल करने के लिए सरकार से बात चल रही है।

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Mahatma Gandhi - फोटो : file photo

पहले भी आए थे भागलपुर
महात्मा गांधी इससे पहले भी सन 1917 में एक छात्र सम्मेलन को संबोधित करने भागलपुर आए थे। इस सम्मेलन के लिए देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद के निर्देश पर कृष्ण मिश्र ने छात्रों को संगठित करने का काम किया था। महात्मा गांधी ने इस छात्र सम्मेलन की अध्यक्षता की थी।

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