Heatwave: दुनिया में बढ़ते तापमान के बीच जलवायु परिवर्तन ने वैज्ञानिकों को चौंकाया, क्या खत्म हो जाएगी पृथ्वी?
Heatwave: दुनिया में बढ़ते तापमान के बीच वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर ऐसा ही रहा तो आने वाले समय में और हालात खराब होंगे। भीषण गर्मी का एशिया, यूरोप से लेकर अमेरिका तक को सामना करना पड़ रहा है।
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इतना बढ़ चुका है दुनिया का औसत तापमान
यूरोपीय संघ की संस्था कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस और विश्व मौसम विज्ञान संगठन के मुताबिक, औद्योगिक क्रांति (1850-1900) के बाद से अभी तक दुनिया का औसत तापमान करीब 1.4 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। कछ दिनों पहले विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा था कि 2026 से 2030 के बीच 75 प्रतिशत संभावना है कि 5 साल का औसत तापमान 1.5 डिग्री से ऊपर पहुंच जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, 91 फीसदी संभावना जताई गई है कि इन पांच वर्षों में कम से कम एक साल 1.5 डिग्री की सीमा को पार कर देगा। 86 फीसदी संभावना है कि इनमें से कोई एक साल 2024 की गर्मी का रिकॉर्ड तोड़ेगा। इसका मतलब है आने वाले वर्ष और भी ज्यादा गर्म होंगे। इसके लिए पूरी दुनिया को तैयार रहना होगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनिया में बढ़ते तापमान के पीछे जलवायु परिवर्तन वजह है।
क्या यूरोप में गर्मी के पीछे है अल नीनो?
आमतौर पर अल-नीनो की वजह से दुनिया के कई इलाकों में तापमान में वृद्धि होती है और मानसून प्रभावित होता है। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि यूरोप में रिकॉर्ड तोड़ पड़ रही भीषण गर्मी के पीछे अल-नीनो की भूमिका अधिक नहीं है। उनका कहना कि क्लाइमेट चेंज सबसे बड़ी वजह है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर ग्रीनहाउस गैसें कम नहीं होती हैं, तो भविष्य में ऐसी हीटवेव और अधिक देखने को मिलेगी। उन्होंने कहा कि 2022 में यूरोप में गर्मी ने 60 हजार से ज्यादा लोगों की जान ली थी। इसलिए ऐसी गर्मी को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
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चिंता बढ़ाने वाला है वैज्ञानिकों का निष्कर्ष
जलवायु परिवर्तन पर शोध करने वाली संस्था क्लाइमेट सेंट्रल ने एक नया विश्लेषण किया है, जो बेहद चौंकाने वाला है। इसके मुताबिक, पूरी दुनिया में खतरनाक उमस भरी गर्मी में तेजी से वृद्धि हो रही है। यह रिपोर्ट भारत जैसे घनी आबादी वाले देश के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
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दोगुने से अधिक हो गए हैं गर्मी वाले खतरनाक दिन
रिपोर्ट के मुताबिक, 50 वर्षों में दोगुने अधिक भीषण गर्मी के दिन हो चुके हैं। एक रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, 1970 के दशक में पूरी दुनिया में एक वर्ष के दौरान औसतन सिर्फ 10 दिन ऐसे होते थे। इस दौरान गर्मी और नमी का मेल इंसानों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता था, लेकिन वर्तमान समय में दोगुनी से भी ज्यादा बढ़कर 23 दिन प्रति वर्ष हो चुकी है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, 1970 के बाद से दुनिया में दर्ज करीब 64 फीसदी खतरनाक उमस भरे दिनों के पीछे सीधे तौर पर मानवजनित जलवायु परिवर्तन वजह है। वर्ष 2025 में और भयावह स्थिति देखने को मिली। इस दौरान 23 खतरनाक उमस भरे दिनों में से 19 दिन सीधे तौर पर जलवायु परविर्तन की वजह से थे।
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