हमारे सौर मंडल के बाहर करीब 5000 ग्रह हैं। वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि हाल के दिनों में किए गए शोध में पता चला है कि अनुमान से ज्यादा ग्रह अतंरिक्ष में घूम रहे हैं। उनका कहना है कि अंतरिक्ष में भटक रहे ग्रह बर्फीले 'फ्री-फ्लोटिंग प्लैनेट' या एफएफपी हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि वह यह बता सकते हैं ये ग्रह कैसे बनते हैं और कैसे समाप्त होते हैं।
Space News: सौर मंडल के बाहर ग्रहों का कैसे होता है जन्म और कैसे होती है मौत? ये है ब्रह्मांड का सबसे बड़ा रहस्य
कैसे पैदा होते हैं ग्रह
सौर मंडल से बाहर करीब आधे तारे और ब्राउन ड्वार्फ्स मौजूद हैं। दूरबीन तकनीक में सुधार होने की वजह से अंतरिक्ष में छोटी और अलग रह रहीं वस्तुओं को देखा जा सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि वास्तव में अभी यह नहीं पता चला है कि आखिर ये कैसे बनते हैं। उन्होंने बताया है कि अंतरिक्ष में धूल और गैस के एक क्षेत्र के अपने आप गिरने से तारे और 'ब्राउन ड्वार्फ का निर्माण होता है। इस क्षेत्र के सघन होने की वजह गुरुत्वाकर्षण की प्रक्रिया में ज्यादा से ज्यादा सामग्री उस पर गिरती है।
परमाणु संलयन की शुरुआत करने के लिए गैस का यह गोला गर्म होता रहता है। लेकिन इनका आकार फ्यूजन शुरू करने लायक नहीं होता। शोधकर्ताओं ने संभावना जताई है कि ऐसे ग्रह किसी तारे के चारों ओर कक्षा में जीवन की शुरुआत कर सकते हैं। हालांकि किसी बिंदु पर अंतरताराकीय जगह से अलग हो जाता है।
अपेक्षाकृत छोटे और ठंडे होने की वजह से ऐसे ग्रहों का पता लगाना कठिन होता है। आंतरिक ऊष्मा का स्त्रोत नष्ट होने की प्रक्रिया में बची ऊर्जा से उनका निर्माण हुआ है। ग्रह जितने छोटे होते हैं वह उतनी ही तेजी से ऊष्मा विकिरित करते हैं। अंतरिक्ष में ठंडी वस्तुओं से कम प्रकाश उत्सर्जित होता है और जिनसे प्रकाश उत्सर्जित होता है वह लाल रंग के होते हैं।