Key Tag: कार या बाइक की चाबी के साथ मिलने वाला छोटा टैग बचा सकता है हजारों रुपये, भूल से भी न फेंकें
Key Tag Use: चाबी के साथ लगा छोटा-सा मेटल टैग अक्सर लोगों को बेकार लगता है और कई बार तो उसे तुरंत हटा कर फेंक दिया जाता है। लेकिन यही छोटी-सी चीज आगे चलकर बड़ी राहत या बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।
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'की कोड” खो जाए तो क्या होगा?
लेकिन अगर यह टैग आपके पास नहीं है, तो परेशानी बढ़ जाती है। ऐसे में डीलर को पूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, चाबी का माप लेना, सिस्टम से कोड निकालना और कई बार इमोबिलाइजर चिप को रीप्रोग्राम करना। इस पूरी प्रक्रिया में हजारों रुपये खर्च हो सकते हैं, जबकि की कोड होने पर काम काफी सस्ता और आसान हो जाता है।
कुछ जानी मानी कंपनियों की बाइक्स में यह टैग और भी जरूरी हो जाता है, खासकर उन मॉडलों में जहां ट्रांसपॉन्डर चिप लगी होती है। ऐसे मामलों में बिना कोड के नई चाबी बनवाना काफी जटिल हो सकता है और कभी-कभी पूरा लॉक सिस्टम तक बदलना पड़ता है।
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टैग को सुरक्षित जगह पर रखें
इसलिए एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि जैसे ही आपको चाबी मिले, इस टैग को अलग करके सुरक्षित जगह पर रख लें। आप इसका फोटो खींचकर फोन या ईमेल में सेव कर सकते हैं या फिर इसे जरूरी दस्तावेजों के साथ रख सकते हैं। कुछ लोग इसे छोटे बॉक्स में सील करके भी रखते हैं।
अब मिलते हैं डिजिटल कोड भी
आजकल स्मार्ट की और कीलेस एंट्री सिस्टम का चलन बढ़ रहा है, जहां डिजिटल कोड भी मिलते हैं। फिर भी ज्यादातर मामलों में यह मेटल टैग सबसे भरोसेमंद साबित होता है। अक्सर लोग इसकी अहमियत तब समझते हैं, जब चाबी खो जाती है और परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। इसलिए अगली बार जब भी आप नई गाड़ी लें, इस छोटे-से टैग को हल्के में लेने की गलती बिल्कुल न करें।
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