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अजब-गजब: भारत ने अंतरिक्ष में जमाई धाक, चंद्रयान-1 का दुनिया में बजा डंका, चांद पर खोज ली बड़ी चीज

फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: धर्मेंद्र सिंह Updated Tue, 16 Nov 2021 04:11 PM IST
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india power increased in space with chandrayaan 1 in world water signs on the moon
भारत ने अंतरिक्ष में जमाया धाक - फोटो : iStock


अंतरिक्ष में भारत ने अपना धाक जमा लिया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने अतंरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत 60 के दशक में बेहद सीमित संसाधनों के साथ की थी। भारत ने अपना पहला रॉकेट 21 नवंबर 1963 को लॉन्च किया था जिसके 45 साल बाद मिशन मून पर बड़ी कामयाबी हासिल की थी। अतंरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत के करीब 50 साल बाद भारत ने मंगल यान भेजा। भारत ने जब अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत की थी, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि देश का अंतरिक्ष यान एक दिन चांद और मंगल पर भी जा पाएगा। 

भारत ने 22 अक्टूबर 2008 को अपना पहला चंद्रयान भेजा था। यह करीब 10 महीने यानी  22 अक्टूबर 2008 से 30 अगस्त 2009 तक चंद्रमा के चारों तरफ घूमता रहा। वैज्ञानिकों ने चंद्रयान में मून इम्पैक्ट प्रोब ( MIP) नाम की डिवाइस लगाई थी। यह 14 नवंबर 2008 को चांद की सतह पर उतरा और भारत का अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत ने धाक जमा लिया। इस मामले में भारत चौथा देश बन गया। इससे पहले अमेरिका, रूस और जापान ने यह कामयाबी हासिल की थी। इस डिवाइस ने ही चांद की सतह पर पानी को खोजा था। इस बड़ी खोज के लिए नासा ने भी भारत की तारीफ की थी, क्योंकि इसरो को पहली बार में यह सफलता मिली थी। 

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भारत ने अंतरिक्ष में जमाया धाक - फोटो : iStock

इसरो का चंद्रयान-1 पहला मिशन यान था। भारत का पहला चंद्रयान-1 पांच दिन में चंद्रमा तक पहुंचा था और 15 दिन में चक्कर लगाया था। पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक एपीजे अब्दुल कलाम ने एमआइपी को बनाने के बारे में विचार किया था। कलाम की चाहत थी कि भारतीय वैज्ञानिक चांद के एक हिस्से पर अपनी छाप छोड़ें। इसरो के वैज्ञानिकों ने उनकी इस चाहत को पूरा किया। 

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भारत ने अंतरिक्ष में जमाया धाक - फोटो : iStock

2008 को चांद से टकराया इंपैक्टर

इसरो ने चांद पर जिस इंपैक्टर शोध यान को भेजा था वह 18 नवंबर, 2008 को आर्बिटर से अलग हुआ था और चांद की सतह पर उतरा था।  यह चांद के जिस हिस्से पर उतरा था उसको वैज्ञानिकों ने जवाहर प्वाइंट नाम दिया है। इम्पैक्टर ने चांद की मिट्टी को काफी बाहर तक खोद डाला जिससे पानी के अवशेष को खोजा जाना था। 

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भारत ने अंतरिक्ष में जमाया धाक - फोटो : iStock

इसरो को चंद्रयान-1 मिशन से पूरी तरह कामयाबी ना मिली हो, लेकिन शोधकर्ता उससे प्राप्त डेटा से आज भी नए तथ्यों को खोज कर रहे हैं। वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-1 के मिनरोलाजी मैपर इंस्ट्रुमेंट के डेटा का इस्तेमाल किया जिससे उन्होंने पता लगाया कि चांद में जंग लग रहा है। इस शोध के बाद ध्रुवों पर पानी होने के संकेत मिले हैं। 

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