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Saline Water Lantern: भारतीय वैज्ञानिकों ने किया कमाल, बनाई खारे पानी से जलने वाली लालटेन, जानिए इसकी खासियत

फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: धर्मेंद्र सिंह Updated Sat, 13 Aug 2022 08:09 PM IST
सार

खारे पानी के लालटेन के अनावरण के मौके पर डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि गरीबों और जरूरतमंदों के लिए खारे पानी का लालटेन कारगर साबित होगा।

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India's first saline water lantern launched, Minister lauds NIOT for initiative
भारत की पहली खारे पाने से जलने वाली लालटेन - फोटो : Twitter @DrJitendraSingh
Saline Water Lantern: विज्ञान के क्षेत्र में नए-नए आविष्कार करने वाले भारतीय वैज्ञानिकों ने एक बार फिर कमाल किया है। वैज्ञानिकों ने खारे पानी के लालटेन को विकसित किया है जिसको जलाने के लिए समुद्र के पानी का इस्तेमाल किया जाता है। केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने खारे पानी के लालटेन (Saline Water Lantern) को शनिवार को लाॅन्च किया। 

 
भारत के पहले खारे पानी के लालटेन का नाम रोशनी रखा गया है। इस लालटेन की सबसे खास बात यह है कि एलईडी लैंप को जलाने के लिए इस लालटेन में समुद्र के पानी का इस्तेमाल होता है। इसमें खासतौर पर इलेक्ट्रोड डिजाइन किया गया है जिसके बीच इलेक्ट्रोलाइट के तौर एलईडी लैंप काम करता है। आइए जानते हैं भारत के पहले खारे पानी के लालटेन (Saline Water Lantern) की खास बातें...

डॉ जितेंद्र सिंह ने कोस्टल रिसर्च वेसल सागर अन्वेषिका का दौरा किया। यहां वह भारत के गहरे महासागर मिशन के काम काज को देखने के लिए गए थे। राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (National Institute of Ocean Technology- NIOT), चेन्नई इसका संचालन करता है। 

खारे पानी के लालटेन के अनावरण के मौके पर डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि गरीबों और जरूरतमंदों के लिए खारे पानी का लालटेन कारगर साबित होगा। उनका कहना है कि इस खास लालटेन से भारत की 7500 किलोमीटर लंबी तटीय रेखा पर रहने वाले मछुआरों का जीवन आसान हो जाएगा। 



खारे पानी से चलने वाले 'रोशनी एलईडी लैंप' से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उजाला योजना को बढ़ावा मिलेगा। उजाला योजना को साल 2015 में शुरू किया गया था। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि रोशनी लैंप के साथ ही ऊर्जा मंत्रालय की तरफ सोलर स्टडी लैंप जैसी योजनाओं को चलाया जा रहा है। उनका कहना है कि इन योजनाओं को ऊर्जा सुरक्षा और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए चलाया जा रहा है। 

इस तकनीक का जहां पर समुद्र का पानी नहीं है उन इलाकों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस लालटेन का सामान्य पानी में भी नमक मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसको बहुत आसानी से चलाया जा सकता है और इसमें खर्च भी कम आता है। 

केंद्रीय मंत्री ने खारे पानी के लालटेन का आविष्कार करने वाले वैज्ञानिकों की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि इस लालटेन का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाए जिससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोग इसका इस्तेमाल कर सकें। 
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