ISS: भारतीय मूल की नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर नौ महीने बाद धरती पर वापस लौट आए हैं। दोनों अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर पर नौ महीने से फंसे थे। सुनीता और विल्मोर के वापस आने के बाद अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की खूब चर्चा हो रही है। लोगों के मन में सवाल है कि आखिर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन क्या है और वैज्ञानिक वहां पर जाकर क्या करते हैं? आज हम आपको अपनी इस खबर में विस्तार से बताएंगे कि अंतरिक्ष स्टेशन क्या है और वैज्ञानिक वहां जाकर क्या करते हैं।
ISS: क्या है अंतरिक्ष स्टेशन? जहां फंसी थीं सुनीता विलियम्स, 90 मिनट में लगाता है पृथ्वी का एक चक्कर
International Space Station: पृथ्वी की कक्षा में स्थित अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन एक बड़ा अंतरिक्ष यान है, जो एक घर के तौर काम करता है। यहां पर अंतरिक्ष यात्रियों की टीम रहती है। यह एक अनोखा प्रयोगशाल है।
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सिर्फ 90 मिनट में करता है पृथ्वी की परिक्रमा
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन करीब 402 किमी की औसत ऊंचाई पर पृथ्वी का चक्कर लगाता है। सबसे हैरानी वाली बात यह है कि 28 हजार किमी प्रति घंटे की रफ्तार से यह अंतरिक्ष में घूमता है। हर 90 मिनट में पृथ्वी की परिक्रमा करता है। नासा की तरफ से अंतरिक्ष स्टेशन का अंतरिक्ष में रहने और काम करने के बारे में अधिकारी जानकारी के लिए इस्तेमाल करता है।
आईएसएस पर कब पहुंची थी अंतरिक्ष यात्रियों की पहली टीम
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर 2 नवंबर 2000 को पहली बार अंतरिक्ष यात्रियों की टीम पहुंची थी। तब से ही अंतरिक्ष यात्री आईएसएस पर जा रहे हैं। समय के साथ ही इसमें कई हिस्से जोड़े गए हैं। नासा और दुनियाभर के उसके भागीदारों ने साल 2011 में अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण पूरा किया था। अंतरिक्ष स्टेशन का आकार पांच बेडरूम वाले घर जितना बड़ा है। इसमें छह चालक दल और यहां पर आने वाले अंतरिक्ष यात्री रह सकते हैं। पृथ्वी पर अंतरिक्ष स्टेशन का वजन करीब दस लाख पाउंड होगा। इसमें अमेरिका, रूस, जापान और यूरोप के प्रयोगशाला मॉड्यूल शामिल हैं।
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आईएसएस पर क्या काम करते हैं अंतरिक्ष यात्री
अंतरिक्ष स्टेशन पर प्रयोगशालाएं हैं, जहां अंतरिक्ष यात्री शोध करते हैं। साथ ही इसके कई भाग हैं। अंतरिक्ष यात्री बाहर की तरफ खुलने वाले एयरलॉक के माध्यम से अंतरिक्ष में पहुंच सकते हैं। डॉकिंग पोर्ट दूसरे अंतरिक्ष यान को अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ने की इजाजत देते हैं। नए चालक दल और अंतरिक्ष यात्री पोर्ट्स के माध्यम से आते हैं।
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अंतरिक्ष स्टेशन की प्रयोगशालाओं में अंतरिक्ष यात्री शोध करते हैं, जो कहीं और नहीं किया जा सकता है। इसे वैज्ञानिक शोध से पृथ्वी पर लोगों को फायदा मिलता है। रोजमर्रा की जिंदगी में भी अंतरिक्ष अनुसंधान का इस्तेमाल किया जाता है। वैज्ञानिक यह भी शोध करते हैं जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक माइक्रोग्रैविटी में रहता है, तो शरीर में क्या होता है।