Rosetta stone languages: मिस्र के प्राचीन मंदिर में एक रहस्यमयी पत्थर की खोज हुई है। इस पत्थर को रोसेटा स्टोन कहा जाता है। एक फ्रांसीसी ने इस पर लिखे एक ट्रांसक्रिप्शन की वजह से ‘देवताओं की भाषा’ की खोज की है। ट्रांसक्रिप्शन में चित्रलिपि में प्राचीन धर्मग्रंथ की 14 लाइनें लिखी गई हैं। इनका मतलब बेहद हैरान करने वाला है। इन लाइनों से सम्राट और देवताओं के बीच संबंध के बारे में जानकारी प्राप्त होती है।
Rosetta stone: मिस्र के मंदिर में मिले रहस्यमयी पत्थर पर लिखी है देवताओं की भाषा, मतलब जानकर हो जाएंगे हैरान
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किसने पढ़ी देवताओं की भाषा
दुर्भाग्य की बात यह है कि रोसेटा स्टोन टूटा है और इसका बाकी भाग नहीं मिला है। इस पत्थर पर हियरोगिल्फिक स्क्रिप्ट (देवताओं की भाषा) की 14 लिखित पंक्तियां लिखी हैं। इसका मतलब है कि देवताओं की भाषा’का बाकी हिस्सा अभी तक नहीं मिल पाया है। साल 1882 में थॉमस यंग और जीन-फ्रांस्वा चैंपोलियन ने देवताओं की भाषा के कोड को समझा था। उन्होंने इसका अनुवाद किया। यंग और चैंपोलियन देवताओं की भाषा को समझने वाले पहले इंसान थे।
शिलालेख पर लिखा क्या है?
मिस्र के प्राचीन खंडहरों में तीन शिलालेखों के टुकड़े मिले हैं। इनमें से एक शिलालेख पर देवताओं की भाषा लिखी गई है। बाकी दो शिलालेखों पर ‘लैंग्वेज ऑफ तेह डॉक्यूमेंट्स’ और रोजमर्रा के उद्देश्य वाली कहानियां लिखी गई हैं। उस समय पढ़ने लिखने वाले लोगों द्वारा इसका इस्तेमाल किया जाता था। आरएफआई ने बताया कि एक शिलालेख पर प्राचीन ग्रीक भाषा में लिखा है। यह मिस्र पर शासन करने वाले अंतिम राजवंश की भाषा थी।
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चैंपोलियन की मदद से चित्रलिपि (हियरोगिल्फि्स) का सफलतापूर्वक अनुवाद किया गया है। इससे राजा टॉलेमी वी को ‘ईश्वर से जोड़ने वाले दावों’ की एक सीरीज के रहस्य से पर्दा उठा है।
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शिलालेश पर लिखा गया है, ‘सूर्य पुत्र टॉलेमी, सदैव जीवित, पट्टा (Ptah) के प्रिय, देवता जो स्वयं को प्रकट करता है। ब्रिटानिका वेबसाइट के मुताबिक, पट्टा को मिस्र के धर्म ग्रंथ में फथा भी कहा जाता है। इनमें उनको निर्माता देवता बताया है।