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Monsoon 2026 El Nino: क्या भारत में मचेगी तबाही? आ रहा विनाशकारी सुपर अल नीनो, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी

फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: Dharmendra Kumar Singh Updated Wed, 10 Jun 2026 05:02 PM IST
सार

Monsoon 2026 El Nino: यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स (ECMWF) ने जून 2026 में जारी किए गए ताजा वेदर मॉडल अपडेट्स के मुताबिक, प्रशांत महासागर में महा-विनाशकारी सुपर अल-नीनो का संकेत मिल रहा है। इसका का प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ेगा। 

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monsoon 2026 extreme el nino brings climate bomb impact on monsoon in india
क्या भारत में मचेगी तबाही? आ रहा विनाशकारी सुपर अल नीनो - फोटो : AI

Monsoon 2026 El Nino: यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स (ECMWF) ने जून 2026 में एक ताजा वेदर मॉडल अपडेट्स जारी किया है। इस वेदर मॉडल ने दुनियाभर को चौंका दिया है। इस अंतरराष्ट्रीय मॉडल के मुताबिक, प्रशांत महासागर में महा-विनाशकारी सुपर अल-नीनो का संकेत मिल रहा है। यह आधुनिक सैटेलाइट युग के इतिहास में अभी तक सबसे तीव्र और शक्तिशाली अल-नीनो साबित हो सकता है। 



मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, नए अनुमानित अल-नीनो का ग्राफ ऐसे ऊपर जा रहा है कि यह पहले के सभी को रिकॉर्ड्स को तोड़ सकता है। वर्ष 2026 के बाद के महीनों तक प्रशांत महासागर सामान्य से 3 डिग्री सेल्सियस से लेकर 4 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा गर्म हो सकता है। इस डरावनी स्थिति की कल्पना अभी से पहले कभी नहीं की गई थी। अगर यह आने वाले महीने में सब साबित होते हैं, तो यह धरती के पर्यावरण, वैश्विक कृषि, खाद्य सुरक्षा और विशेष रूप से भारतीय मॉनसून के लिए एक विनाशकारी क्लाइमेट बम साबित होगा। 

कब-कब अल नीनो ने मचाई तबाही? 
 
अल नीनो के संभावित खतरे की गंभीरता का अंदाजा इतिहास में इसके कारण आई तबाही से लगाया जा सकता है। 1982-83 में अल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य करीब 2.1 डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुंच गया था। इसके कारण पूरी दुनिया में सूखा और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई थी। इसके बाद 1997-98 में आए सुपर अल-नीनो को माना जाता है कि यह बीती सदी का सबसे खतरनाक बदलाव था। उस समय सामान्य से तापमान 2.4 डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुंच गया था। 2015-16 में आया अल नीनो आधुनिक दौर का सबसे तीव्र था। इसके कारण दुनियाभर में तापमान रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ गया था और सामान्य से 2.6 डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुंच गया था। 

वर्तमान अनुमान के मुताबिक, तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है या उससे भी ऊपर जा सकता है। सबसे डरावनी बात यह है कि पेरू और इक्वाडोर के तटीय इलाकों में पारा 5 डिग्री सेल्सियस के ऊपर जाने के संकत मिल रहे हैं। इसके साफ है कि दुनिया एक ऐसे अनदेखे और अभूतपूर्व मौसम चक्र की तरफ बढ़ रही है, जिसका आधुनिक मानव इतिहास को अनुभव नहीं है।
 

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क्या भारत में मचेगी विनाशकारी तबाही? आ रहा खतरनाक अल नीनो - फोटो : ANI

क्या है अल-नीनो और क्यों गर्म हो जाता है महासागर पानी?

अल नीनो एक प्राकृतिक मौसमी घटना है। यह प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह के असामान्य रूप से गर्म होने की वजह से बनता है। सामान्य दिनों में प्रशांत महासागर में पूर्व से पश्चिम की तरफ तेज हवाएं चलती हैं, जो गर्म पानी को एशिया और ऑस्ट्रेलिया की तरफ धकेलती हैं। इसके हमारे इलाके में अच्छी बारिश होती है। अल-नीनो के समय यह हवाएं बेहद कमजोर हो जाती हैं और कभी-कभी यह उलटी दिशा में बहने लगती हैं। इसके कारण पेरू और दक्षिण अमेरिका के तटों के पास का गर्म पानी का एक विशाल समंदर इकट्ठा हो जाता है।

अगर समुद्र का यह इलाका 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो जाएगा, तो पूरी दुनिया के वायुमंडल सर्कुलेशन को प्रभावित कर देगा। इसलिए वैज्ञानिक इसे सबसे बड़ी मौसमी घटना मान रहे हैं। अल नीनो हर दो से सात साल में एक बार होता है, जिसका पूरी दुनिया मौसम के पैटर्न पर बड़ा प्रभाव पड़ता है।
 

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क्या भारत में मचेगी विनाशकारी तबाही? आ रहा खतरनाक अल नीनो - फोटो : Adobe Stock

क्या होगा भारतीय मॉनसून पर प्रभाव?

भारत की कृषि और अर्थव्यवस्था सीधे तौर पर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पर निर्भर है। ऐतिहासिक रूप से देख जाए, तो अल-नीनो और भारतीय मॉनसून के बीच एक बेहद कड़वा और सीधा संबंध रहा है। प्रशांत महासागर के गर्म होने पर भारत में मॉनसून की हवाएं कमजोर हुई हैं। लेकिन साल 2026 के बाद महीनों में यह सुपर अल-नीनो पूरी तरह सक्रिय हो जाता है, तो इसका भारतीय मॉनसून पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

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क्या भारत में मचेगी विनाशकारी तबाही? आ रहा खतरनाक अल नीनो - फोटो : Adobe Stock Photos

आमतौर पर मॉनसून के अगस्त और सितंबर के महीनों में अल नीनो का प्रभाव दिखता है। अगर जून के ये अनुमान सच होते हैं, तो मॉनसून कमजोर हो जाएगा। इससे देश के ज्यादातर इलाकों विशेषकर मध्य, पश्चिमी और उत्तर-पश्चिम भारत (जैसे महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश) में सूखे जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। देश को भीषण सूखे का सामना करना पड़ सकता है। सूखे की वजह से देश में अनाज के उत्पादन में कमी होने से महंगाई बढ़ सकती है। 

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क्या भारत में मचेगी विनाशकारी तबाही? आ रहा खतरनाक अल नीनो - फोटो : ANI

सीधे तौर पर अल-नीनो से दुनिया में तापमान को बढ़ता है। इसके कारण भारत में आने वाली सर्दियों में भी असामान्य गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलाना 2027 के शुरुआती महीनों में भारत में अभी तक के सबसे जानलेवा और रिकॉर्ड-तोड़ लू देखने को मिल सकती है। इससे पानी के जलाशयों का स्तर न्यूनतम पर पहुंच जाएगा। 

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