Maha Kumbh 2025: प्रयागराज में 13 जनवरी से महाकुंभ की शुरुआत हो जाएगी। गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम तट पर लगने वाले कुंभ मेले का काफी महत्व है। 12 साल में एक बार कुंभ मेले का आयोजन होता है। प्रयागराज में 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक महाकुंभ चलेगा। इसकी वजह से संगम की नगरी प्रयागराज दुनियाभर में छाया है। महाकुंभ मेले में साधु संत का जमावड़ा लगा हुआ है।
Maha Kumbh 2025: हाड़ कंपाने वाली ठंड में भी कैसे बिना कपड़ों के रहते हैं नागा साधु? जानिए आखिर क्या है रहस्य
Maha Kumbh 2025: महाकुंभ में आने वाले नागा साधु लोगों के लिए सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र हैं। नागा साधुओं की वेशभूषा और खान-पान आम लोगों से बिल्कुल अलग होती है। कितनी भी कड़ाके की ठंड़ पड़ रही हो, लेकिन नागा साधु वस्त्र धारण नहीं करते हैं।
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कठोर तपस्या
नागा साधु का शरीर कठोर तपस्या से कारण कठोर परिस्थितियों में ढल जाता है। नियमित ध्यान और योग से उनका अपने शरीर और मन पर नियंत्रण हो जाता है। इससे उन्हें गर्मी-सर्दी का अनुभव कम होता है। हिमालय में रहने वाले योगी कुंडलिनी जागरण की प्रक्रिया से अपने शरीर में ऊर्जा को जागृत करते हैं। कुंडलिनी एक शक्तिशाली ऊर्जा है जो जागृत होती है तो शरीर में गर्मी पैदा करती है। इससे ठंड में उनका बदन गर्म रहता है।
इसके साथ ही नागा साधु प्राणायाम से अपनी श्वास को नियंत्रित करते हैं। शरीर में प्राण (जीवन शक्ति) को संतुलित करते हैं। इस प्रक्रिया से शरीर को गर्म रखने में मदद मिलती है। ध्यान के माध्यम से वह अपनी मानसिक स्थिति को शांत करते हैं। वह शरीर में गर्मी को महसूस करने में सक्षम होते हैं। हालांकि, हिमालय में रहने वाले योगियों और कुछ नागा साधुओं द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली तकनीकें बेहद जटिल होती है।
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क्या भस्म से नहीं लगती हैं ठंड?
सवाल है कि क्या है भस्म यानी राख को शरीर पर लगाने से ठंड नहीं लगती है? नागा साधुओं का कहना है कि शरीर पर भस्म यानी राख मलने से ठंड दूर होती है। शरीर पर राख इंसुलेटर का काम करती है। भस्म शरीर को गर्मी और सर्दी दोनों से बचाने में मदद करती है। भस्म को पवित्र माना जाता है। यह साधुओं को नकारात्मक ऊर्जा से बचाने का काम करती है।
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सात्विक आहार और मोह-माया से दूर
शरीर को कठिन परिस्थितयों के लिए तैयार करने में सात्विक आहार की भी खास भूमिका होती है। इससे उनका शरीर स्वस्थ रहता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। नागा साधु बेहद सरल जीवन जीते हैं। सांसारिक मोहमाया से वह दूर रहकर मानसिक रूप से मजबूत रहते हैं। उनका लक्ष्य मोक्ष प्राप्त करना होता है। इसके कारण वह शारीरिक सुख-दुख से परे रहते हैं। वह शरीर में न तो ठंड का अनुभव करते हैं और न ही गर्मी का।
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