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मेहनत का फल: लाखों की नौकरी छोड़ शुरू की अंगूर की खेती, बना दी देश की सबसे बड़ी वाइन कंपनी

Wed, 19 May 2021 08:13 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Wed, 19 May 2021 08:13 PM IST
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success story of sula wine company owner rajeev samant quit job started grapes farming
सुला वाइनयार्ड - फोटो : सोशल मीडिया

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से देश का पर्यटन भी काफी प्रभावित है। इसका सबसे ज्यादा असर महाराष्ट्र के नासिक में स्थित सुला वाइनयार्ड पर भी देखने को मिल रहा है। आपको बता दें कि सुला भारत की सबसे बड़ी वाइन ब्रांड है। इस वाइन की भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अच्छी डिमांड है। वहीं हजारों एकड़ में फैला सुला वाइनयार्ड लोगों को काफी आकर्षित करता है। मुंबई से करीब 180 किलोमीटर दूर नासिक में साल 1950 में सुला वाइनयार्ड की शुरुआत हुई। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले राजीव सामंत ने इस वाइनयार्ड की शुरुआत की थी। अमेरिका की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन करने वाले राजीव ने इंजीनयिरिंग में मास्टर्स की डिग्री हासिल की।

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सुला वाइन - फोटो : सोशल मीडिया

पढ़ाई पूरी करने के बाद राजीव सामंत कैलिफोर्निया में ऑरेकल में नौकरी करने लगें। हालांकि, अमेरिका की भागमभाग वाली जिंदगी राजीव को नहीं पसंद आई और वो गांव की जिंदगी जीने के लिए भारत वापस आ गए। राजीव के परिवार के पास नासिक में 20 एकड़ जमीन थी। इसी जमीन पर राजीव आम की खेती से लेकर गुलाब, टीक वुड और अंगूर की खेती तक की।

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राजीव सामंत - फोटो : सोशल मीडिया

साल 1966 में राजीव को ये महसूस हुआ कि नासिक का मौसम और जलवायु वाइन बनाने वाले अंगूरों की खेती के लिए एकदम परफेक्ट है। इसके बाद जब वह कैलिफोर्निया वापस गए, तो उनकी मुलाकात मशहूर वाइनमेकर कैरी डैमस्की से हुई।

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सुला वाइनयार्ड - फोटो : सोशल मीडिया

कैरी डैमस्की ने राजीव की बात सुनकर वाइनयार्ड शुरू करने में मदद करने के लिए तैयार हो गए। राजीव ने अपने वाइन के ब्रांड का नाम सुला को अपनी मां ‘सुलभा’ के नाम पर रखा। कंपनी शुरू करने के कुछ सालों बाद ही व्यापार बढ़ता गया और राजीव ने अंगूरों की नई किस्मों की खेती शुरू कर दी। देखते ही देखते 20 एकड़ के क्षेत्र में शुरू हुआ यह वाइनयार्ड 1800 एकड़ तक फैल गया।

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सुला वाइनयार्ड - फोटो : सोशल मीडिया

आपको बता दें कि सुला वाइनयार्ड में रोजाना 8 से 9 हजार टन अंगूरों को क्रश करके वाइन तैयार की जाती है। वाइनयार्ड्स के चीफ वाइन मेकर करण वसानी के मुताबिक, सुला व्हाइट और रेड वाइन बनाती है। सुला वाइन ने नासिक को एक अलग पहचान दिला दी।

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