Surya Grahan: आसमान में होने वाली खगोलीय घटनाएं लोगों को सोचने पर मजबूर कर देती हैं। कई बार ऐसी दुर्लभ घटनाएं होती हैं, जो बहुत कम दिखाई देती हैं। भविष्य में एक ऐसी ही खगोलीय घटना देखने को मिलेगी। इस दौरान में दिन में ही अंधेरा हो जाएगा और रात की तरह नजारा हो जाएगा। यह एक दुर्लभ घटना होगी। दरअसल, इस सदी का सबसे लंबा और दुर्लभ सूर्य ग्रहण लगने वाला है। इसको लेकर वैज्ञानिकों से लेकर आम लोगों को उत्सकुता है।
Surya Grahan: कब है सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण? धरती पर दिन में छा जाएगा अंधेरा
Surya Grahan: 2 अगस्त 2027 को सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण लगेगा। यह ग्रहण कई मायनों में बेहद खास होगा। आइए जानते हैं इस ग्रहण से जुड़ी कुछ रोचक बातें।
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कहां-कहां दिखेगा सूर्य ग्रहण?
यह पूर्ण सूर्य ग्रहण दुनिया के कई इलाकों में साफ देखा जा सकेगा। खासतौर पर दक्षिणी यूरोप, उत्तरी अफ्रीका, मध्य पूर्व में यह नजारा दिखाई देगा। इस इलाकों में कुछ मिनट के लिए दिन में रात की तरह नजारा हो जाएगा। आसमान में तारे भी दिख सकते हैं और तापमान में हल्की गिरावट आ सकती है। हालांकि, भारत में यह ग्रहण पूर्ण रूप में नहीं नजर आएगा। हालांकि, भारत के कुछ इलाकों में आंशिक सूर्य ग्रहण देखा जा सकता है।
सदी की महत्वपूर्ण खगोलीय घटना
वैज्ञानिकों ने बताया है कि 1991 से लेकर 2114 के बीच में नजर वाले पूर्ण सूर्य ग्रहणों में यह सबसे लंबा ग्रहण होगा। इसलिए यह 21वीं सदी की एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना होगी। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कहा है कि 2 अगस्त 2027 को लगने वाला सूर्य ग्रहण की मोरक्को और दक्षिणी स्पेन से शुरुआत होगी। इसके बाद यह अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, लीबिया, मिस्र और सऊदी अरब से होते हुए आगे जाएगा।आखिर में यह यमन और सोमालिया के तट पर खत्म होगा। मिस्र के लक्सर और असवान में सबसे लंबी अवधि होगी। इस जगह को प्राचीन मंदिरों के लिए जाना जाता है।
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क्या होता है सूर्य ग्रहण?
सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है। जब पृथ्वी और सूर्य के बीच चंद्रमा आ जाता है, तो सूर्य की रोशनी को ढक लेता है। इस दौरान सूर्य की रोशनी पृथ्वी पर नहीं पड़ती है। इसे सूर्य ग्रहण कहा जाता है। सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं। पूर्ण, वलयाकार और आंशिक सूर्य ग्रहण होते हैं।
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क्यों होगा यह सदी का सबसे लंबा ग्रहण?
2 अगस्त 2027 को पृथ्वी से सूर्य अपने सबसे दूर बिंदु पर रहेगा, जिसके कारण सूर्य आकाश में छोटा दिखाई देगा। लेकिन उस दौरान चंद्रमा अपने परिक्रमा पथ पर पृथ्वी के सबसे निकटतम बिंदु पर होगा, जिससे यह आकार में बड़ा नजर आएगा। इससे सूर्य की रोशनी को ज्यादा देर तक रोकेगा, जिसके कारण यह ग्रहण लंबा होगा।