फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

इस्राइल-फलस्तीन विवाद: आखिर कब और कैसे शुरू हुई इन दोनों देशों के बीच लड़ाई?

Mon, 09 Oct 2023 11:38 AM IST
संकल्प सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संकल्प सिंह Updated Mon, 09 Oct 2023 11:38 AM IST
विज्ञापन
The Entire History of Israel and Palestine conflict
यरुशलम - फोटो : सोशल मीडिया

इस्राइल और फलस्तीन के बीच विवाद फिर से गहरा चुका है। कहा जा रहा है कि हमास ने इस्राइल के ऊपर कुल 5 हजार रोकेटों से हमला किया है। इस घटना के बाद इस्राइल ने ऑन रिकॉर्ड स्टेट ऑफ वॉर अलर्ट की घोषणा कर दी है। इस हमले में इस्राइल के कई नागरिकों की मौत हो चुकी है और कई घायल हैं। गौर करने वाली बात यह है कि हमास के इस आतंकी हमले के पीछे जियो-पॉलिटिकल एंगल भी छिपा है। हाल ही में अमेरिका और सऊदी अरब के बीच होने वाली डीफेंस पैक्ट को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें सऊदी अरब अमेरिका के साथ एक डील को लेकर योजना बना रहा है। इस डीफेंस पैक्ट में इस बात का जिक्र है कि अमेरिका, सऊदी अरब की सुरक्षा की गारंटी लेगा। वहीं बदले में सऊदी अरब फलस्तीन को लेकर जो मांग है उससे पीछे हट जाएगा। कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका इस डील को लेकर काफी उत्सुक है और जल्द ही वह इसे स्वीकार करने वाला है। इस डील के होने से कुछ दिनों पहले ही हमास ने इस्राइल पर पांच हजार रोकेटोंं से हमला किया। इस हमले ने इस्राइल को गाजा पट्टी में युद्ध की ओर ढकेल दिया है। यही नहीं यह युद्ध अमेरिका और सऊदी अरब के बीच होने वाले डिफेंस पैक्ट पर भी दवाब बनाएगा। वैश्विक राजनीति में इस हमले के कई मायने सामने निकलकर आ रहे हैं। खैर जो भी हो...



इस्राइल और फलस्तीन दो ऐसे देश हैं, जिनका विवाद काफी लंबे समय से चला आ रहा है। दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने और मतभेद को खत्म करने के लिए कई बार समझौते हुए पर निष्कर्ष कुछ खास नहीं निकला। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से उन सभी वजहों के बारे में बताएंगे, जिनके कारण इन दोनोंं देशों के बीच का विवाद दिन-प्रतिदिन बढ़ता चला गया।

The Entire History of Israel and Palestine conflict
ओटोमन आर्मी - फोटो : सोशल मीडिया

इस्राइल और फलस्तीन के बीच के मतभेद की शुरुआत ओटोमन साम्राज्य के खत्म होने के साथ होती है। इस दौरान पूरे यूरोप में राष्ट्रवाद का व्यापक प्रभाव देखा जा रहा था। कई देश टुकड़ों-टुकड़ों में बंटे थे। राष्ट्रवाद की लहर इन्हें एक कर रही थी। इटली और जर्मनी जैसे देश राष्ट्रवाद के नाम पर एक हो रहे थे। इसका प्रभाव यहूदियों के बीच भी देखने को मिला। राष्ट्रवाद की भावना यहूदी लोगों के बीच भी जगी। उन्हें अपने पवित्र स्थान पर दोबारा जाकर बसने की लालसा उठी।

The Entire History of Israel and Palestine conflict
यरुशलम - फोटो : सोशल मीडिया
यहीं से जियोनिष्ट आंदोलन की शुरूआत होती है। 19वीं शताब्दी में यहूदियों की यह पवित्र भूमि फलस्तीन के नाम से जानी जाती थी। इस दौरान पूरे यूरोप में यहूदी बिखरे हुए थे। उनके साथ यूरोप में काफी शोषण होता आया था। जियोनिष्ट आंदोलन के दौरान शुरूआत में छोटे स्तर पर यहूदियों का पलायन फलस्तीन की ओर हुआ। इसके बाद आता है प्रथम विश्व युद्ध का दौरा। 1917 में बेलफोर डिक्लेरेशन आया। कई लोगों का मानना है कि बेलफोर डिक्लेरेशन ही वह प्रमुख वजह थी, जिसने इस्राइल-फलस्तीन मतभेद को जन्म दिया।
 
विज्ञापन
विज्ञापन
The Entire History of Israel and Palestine conflict
ऑर्थर जेम्स बेलफोर - फोटो : सोशल मीडिया

बेलफोर डिक्लेरेशन

1917 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जब ओटोमन साम्राज्य हारने की कगार पर था। उस समय ब्रिटेन के विदेश मंत्री सर आर्थर बेलफोर ने एक डिक्लेरेशन जारी किया। इस डिक्लेरेशन में यह इंगित किया गया कि ब्रिटेन, यहूदियों को उनकी पवित्र भूमि फलस्तीन देगा और वहां उनका पुनर्वास करवाएगा। वहीं दूसरी ओर ब्रिटन ने चुपके से फ्रांस और रूस के साथ साइक्स-पिकॉट एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किया। इसके अंतर्गत उसने पूरे मध्य पूर्व को अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया और तय किया कि प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद कौन-सा देश किस के हिस्से में जाएगा। इसमें उसने फलस्तीन को अपने हिस्से में रखा। सीरिया और जॉर्डन फ्रांस को दिया गया। वहीं तुर्की का कुछ हिस्सा रूस के पास गया। एक तरफ ब्रिटेन ने सामूहिक तौर पर यह कहा कि फलस्तीन हम यहूदियों को देंगे। वहीं दूसरी ओर उसने गुपचुप तरीके से साइक्स-पीको एग्रीमेंट के तहत यह हिस्सा अपने पास रख लिया।

विज्ञापन
The Entire History of Israel and Palestine conflict
इस्राइल का झंडा - फोटो : सोशल मीडिया

प्रथम विश्व युद्ध खत्म होने के बाद

प्रथम विश्व युद्ध खत्म होने के बाद ओटोमन साम्राज्य की हार हो चुकी थी। फलस्तीन में ब्रिटिश शासनादेश की शुरुआत होती है। बेलफोर डिक्लेरेशन के कारण भारी मात्रा में यहूदियों का पलायन फिलिस्तीन में हो रहा था। इस दौरान यहां पर यहूदियों की तादाद तेजी से बढ़ने लगी थी। फलस्तीन में जो यहूदी पलायन करके आ रहे थे, उन्होंने यहां आकर जमीनें खरीदनी शुरू कर दी। धीरे-धीरे यहूदियों का फलस्तीन में विस्तार होने लगा। अब यहूदियों ने अरब फलिस्तीनीयों से जमीने खरीदने की दर पहले के मुकाबले और भी ज्यादा बढ़ा दी। यहूदियों का फलस्तीन में व्यापक विस्तार होने लगा था।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Bizarre News in Hindi related to Weird News - Bizarre, Strange Stories, Odd and funny stories in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Bizarre and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed