बिजली बचाने के लिए आज रात एक घंटे के लिए पूरी दुनिया में अंधेरा छा जाएगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा क्योंकि आज अर्थ आवर डे (world earth hour day 2019 ) मनाया जा रहा है। अर्थ आवर डे की शुरुआत बिजली और पर्यावरण बचाने के मकसद से की गयी है।
अर्थ आवर डे आज, दुनियाभर में इसलिए बंद किए जाते हैं बिजली के उपकरण
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'अर्थ आवर डे' बिजली बचाने के मकसद से शुरू किए गए अभियान का हिस्सा है। इस अभियान का नाम 'अर्थ ऑवर वर्ल्ड वाइड फंड' है, जिसे World Wide Fund for Nature (वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर) संस्था ने शुरू किया था। इस संस्था का मकसद लोगों को बिजली बचाने, पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है।
अर्थ आवर डे वाले दिन तय समय पर गैर जरूरी बिजली उपकरण बंद रखने की अपील की जाती है। इस साल 30 मार्च यानी आज रात को 8:30 से 9:30 तक बिजली बचाने की अपील की जा रही है। सोशल साइट्स पर भी लोग इसके लिए अपील कर रहे हैं। भारत के केंद्रीय पर्यावरण मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने भी ट्वीट करके इस मुहिम का हिस्सा बनने की अपील की है। इस साल का स्लोगन है, Change the Way We Live.
Energy saving is not only good for the environment but also a good way to cut down costs and our electricity bills. #GiveUp wasting electricity and #SwitchOff devices when they are not in use #Connect2Earth #Bee4ThePlanet at https://t.co/FAXwkTsOYQ. #GreenGoodDeed @UNEnvironment pic.twitter.com/demqgWqwrZ
— Chowkidar Dr Harsh Vardhan (@drharshvardhan) March 30, 2019
'अर्थ आवर डे' के दिन तय किए गए एक घंटे में रिक्वेस्ट की जाती है कि वे घरों, दफ्तरों की गैर जरूरी लाइट्स और बिजली से चलने वाली बाकी चीजें बंद रखें। अर्थ ऑवर वर्ल्ड वाइड फंड अभियान से जुड़ा दफ्तर सिंगापुर में है। पहली बार इसे साल 2007 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में मनाया गया, इसमें लोगों से सारी लाइटें 60 मिनट के लिए बंद करने की अपील की गई। धीरे-धीरे इसे विश्वभर में अपनाया मनाया जाने लगा। आज यह सिर्फ एक अभियान नहीं बल्कि एक आंदोलन के रूप में खड़ा हो चुका है। पिछले साल भारत में मुंबई के गेट वे ऑफ इंडिया पर भी अर्थ आवर मनाया गया था।
सिडनी में दिए संदेश के दौरान लाइटें बंद कराने के बाद करीब 162 देशों में लाइट्स बंद करने अभियान फैला। 2017 में अनुमान लगाया गया था कि 172 देशों से इस अभियान को समर्थन मिला। जिस संस्था के जरिए ये अभियान चलाया जा रहा है वह दुनिया का सबसे बड़ी इंडिपेंडेंट कंन्जरवेशन ऑर्गेनाइजेशन है।