रेगिस्तान हमारी धरती के एक तिहाई हिस्से में फैले हुए हैं। सहारा या रुब-अल खाली जैसे बड़े रेगिस्तानों के बारे में आपने कहीं ना कहीं पढ़ा जरूर होगा। हो सकता है कि सऊदी अरब, मिस्र, मंगोलिया, नामीबिया, मोरक्को, ओमान के रेगिस्तान कभी देखे भी हों। अगर नहीं तो भारत-पाकिस्तान के बीच फैले थार के रेगिस्तान के दीदार ही किए हों। लेकिन आज हम आपको दुनिया के सबसे छोटे रेगिस्तान की कहानी बताएंगे।
दुनिया का वो रहस्यमय रेगिस्तान, जिसकी गुत्थी अब तक नहीं सुलझा सके वैज्ञानिक
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कनाडा के युकोन सूबे में कारक्रॉस डेजर्ट नाम का एक छोटा-सा रेगिस्तान है। इसका रकबा महज एक वर्ग मील का है जिसे कदमों से भी मापा जा सकता है। इस रेगिस्तान के पास ही बसा कारक्रॉस गांव करीब 4500 साल पहले आबाद हुआ था। यहां इस वक्त कुल जमा 301 लोग रहते हैं। स्थानीय निवासी कीथ वॉल्फ स्मार्च का कहना है कि ये जगह यहां के लोगों के लिए भी एक पहेली है। कीथ लकड़ी पर नक्काशी का काम करते हैं और यहां की प्राकृतिक छटा उन्हें अपने काम में नए-नए तजुर्बे करने की प्रेरणा देती है। क्रॉस रिवर के किनारे बहुत तरह की दुर्लभ वनस्पतियां हैं, लेकिन इनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
कारक्रॉस डेजर्ट काफी ऊंचाई वाले इलाके पर है। सदियों तक ये इलाका लोगों की जानकारी के बाहर था। अब से करीब 4500 साल पहले यहां बैनेट और नारेस झीलें आपस में मिलती थीं और कुदरती तौर पर एक पुल बन गया था। इस पुल के सहारे ही लोगों ने पलायन करना शुरू किया और यहां कारक्रॉस गांव बसा। इस डेजर्ट का नाम कारक्रॉस ही क्यों पड़ा, इसके पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है।
दरअसल, पुल बनने के बाद कारिबू नाम की जंगली जनजाति के झुंड यहां आकर बसने लगे। इन्हीं के साथ नताशाहीन नदी के नजदीक शिकार के मकसद से तिलिंगित और तागिश नाम के घुमंतू कबीले आकर बसने लगे। लिहाजा कारिबू और क्रॉसिंग शब्दों के आवाजों को मिलाकर इस जगह का नाम कारक्रॉस रख दिया गया।
कारक्रॉस तक जो भी पहुंचा है उसने यहां सफेद रंग से सजे पुराने चर्च, एक जरनल स्टोर, पुरानी जंग लगी कुल्हाड़ियां और बारहसिंघों के सींगों से सजे कुछ केबिन जरूर देखे होंगे। ये सब चीजें क्लॉनडिक दौर की हैं। ये वौ दौर था जब डॉसन सिटी और अटलिन के पास लोग सोने की खुदाई के लिए आते थे। लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। कारक्रॉस डेजर्ट को अब एडवेंचर प्लेग्राउंड के तौर पर विकसित किया जा चुका है। हर हफ्ते यहां बड़ी संख्या में एडवेंचर प्रेमी आते हैं। गर्मी के मौसम में एक तरफ यहां बाइक प्रेमी अपना शौक पूरा करने आते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ ये जगह पहाड़ी बकरियों, हिरणों, और डैल भेड़ के लिए पनाहगाह भी बनती है। सर्दी के मौसम में यहां बर्फ खूब पड़ती है और रेत पर जमा बर्फ का मजा लेने वालों की संख्या बढ़ जाती है।
कारक्रॉस डेजर्ट सिर्फ सैलानियों का ही गढ़ नहीं बल्कि कनाडा के वैज्ञानिकों और भूवैज्ञानिकों के लिए रिसर्च सेंटर भी है जो ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि पूरे बर्फीले इलाके में ये छोटा-सा रेगिस्तान कैसे बन गया। युकोन जियोलॉजिकल सर्वे की भूवैज्ञानिक पनाया लिपॉस्की का कहना है कि कारक्रॉस का जन्म कुदरत की करीब दस हजार साल की मेहनत का नतीजा है। करीब 11 से 24 हजार साल पहले विस्कॉन्सिन मैक्कॉनेल ग्लेशियर बनने के दौरान ही उत्तरी युकोन में ग्लेशियर जम गया था। उस वक्त कारक्रॉस में करीब एक किलोमीटर बर्फ जम गई थी, लेकिन बाद में जब बर्फ पिघलने लगी तो दक्षिणी युकोन में पानी बढ़ने लगा और इसी पानी से यहां बड़ी नहरें बनीं। चूंकि ग्लेशियर पिघल चुका था लिहाजा जब उत्तर-पश्चिम से रेतीली हवाएं चली तो उसने इस ऊंचाई पर दुनिया का असंभव सा रेगिस्तान बना दिया।