Mahmud Sadis Baba: राजनीति में अक्सर बड़े-बड़े वादे, तीखे भाषण और विवाद सुर्खियां बटोरते हैं, लेकिन कभी-कभी ऐसे चौंकाने वाले मामले सामने आ जाते हैं जो पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर देते हैं। सोचिए, अगर कोई शख्स अपनी उम्र छुपाकर चुनावी मैदान में उतर जाए और खुद को बड़ा नेता साबित करने की कोशिश करे, तो क्या होगा? ऐसा ही एक हैरान कर देने वाला मामला नाइजीरिया से सामने आया, जिसने लोगों को दंग कर दिया।
Youngest Politician: पढ़ने-खेलने की उम्र में बना दमदार पॉलिटिशियन, नाइजीरिया में मचा हंगामा
Youngest Politician: यह कहानी है महमूद सादिस बाबा की, जिन्हें लोग ‘अबीन अल-जाजौ’ के नाम से भी जानते हैं। वह नाइजीरिया की सत्ताधारी पार्टी ऑल प्रोग्रेसिव्स कांग्रेस (APC) से जुड़े थे और अपनी लोकप्रियता के कारण ‘द वंडर ऑफ जारिया’ कहे जाते थे।
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जब उनसे उनकी उम्र को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने दावा किया कि वह 30 साल के हैं। उन्होंने अपनी छोटी कद-काठी और मासूम दिखने वाली शक्ल की वजह ‘ड्वार्फिज्म’ यानी बौनेपन को बताया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके हैं और राजनीति में आने से पहले ड्राइवर के रूप में काम कर चुके हैं। उनके आत्मविश्वास ने कई लोगों को प्रभावित भी किया।
लेकिन यह कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। कुछ ही समय बाद सोशल मीडिया पर उनके दस्तावेज सामने आने लगे, जिन्होंने पूरे मामले की सच्चाई उजागर कर दी। पासपोर्ट, नेशनल आइडेंटिफिकेशन नंबर (NIN), जन्म प्रमाण पत्र और स्कूल रिकॉर्ड के अनुसार, महमूद का जन्म 1995 नहीं बल्कि 2010 में हुआ था। यानी उनकी असली उम्र महज 15 या 16 साल थी, जो चुनाव लड़ने की न्यूनतम कानूनी उम्र से काफी कम है।
शुरुआत में उनकी पार्टी APC ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और इसे साजिश बताया। लेकिन जैसे-जैसे पुख्ता सबूत सामने आते गए, पार्टी की स्थिति कमजोर पड़ती गई। आखिरकार सच सामने आने के बाद पार्टी ने उन्हें चुनाव के लिए अयोग्य घोषित कर दिया।
विवाद बढ़ने पर महमूद ने भी अंततः पीछे हटने का फैसला किया। उन्होंने पार्टी अध्यक्ष को एक भावुक पत्र लिखकर चुनावी दौड़ से हटने की घोषणा कर दी। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद उन्होंने यह कदम उठाया है।
इस तरह एक ऐसे युवक का सपना अधूरा रह गया, जो खुद को देश की राजनीति में स्थापित करना चाहता था। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने यह जरूर दिखा दिया कि राजनीति में सच कितनी जल्दी सामने आ सकता है, और झूठ ज्यादा देर तक छुप नहीं सकता।
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