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मिल्खा सिंह का सपना साकार: किसान के बेटे नीरज ने ओलंपिक में दिखाया वो करिश्मा, एक सुर में बोला देश-जय हो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 07 Aug 2021 05:39 PM IST
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नीरज चोपड़ा
- फोटो : twitter
हरियाणा के पानीपत जिले के खंडरा गांव के रहने वाले भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने ओलंपिक में वो करिश्मा कर दिखाया, जो आज तक किसी ने नहीं किया। ओलंपिक के इतिहास में अब तक इस स्पर्धा में कोई भी भारतीय पदक नहीं जीत सका था। उड़न सिख मिल्खा सिंह जब तक जीवित रहे, उनकी इच्छा रही थी कि कोई भारतीय एथलीट ओलंपिक में मेडल जीते। वे खुद एथलेटिक्स में जरूर मेडल जीतने के करीब पहुंच चुके थे, लेकिन 0.01 सेंकड से 400 मीटर रेस में चूक गए थे। अब मिल्खा सिंह इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन नीरज ओलंपिक में मेडल जीतकर उनकी इच्छा पूरी कर दी। 24 दिसंबर 1997 को एक किसान परिवार में जन्मे नीरज ने चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज में पढ़ाई की। 2016 में पोलैंड में हुए आईएएएफ चैंपियनशिप में 86.48 मीटर दूर भाला फेंककर उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था। उनके इस प्रदर्शन के बाद उन्हें सेना में अधिकारी नियुक्त किया गया था। इसके बाद उन्होंने अपने एक साक्षात्कार में कहा था कि मेरा ताल्लुक किसान परिवार से है।
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नीरज चोपड़ा
- फोटो : फाइल फोटो
उड़न सिख मिल्खा सिंह एथलीट में जरूर मेडल जीतने के करीब पहुंच चुके थे, लेकिन वे भी 0.01 सेंकड से 400 मीटर रेस में चूक गए थे। डीएवी कॉलेज के पूर्व छात्र नीरज चोपड़ा ने पंचकूला के ताऊ देवी लाल स्टेडियम में जेवेलिन थ्रोअर बनने के लिए कई वर्षों तक कोच नसीम अहमद से ट्रेनिंग ली। नीरज के शानदार प्रदर्शन से नसीम अहमद गदगद हैं।
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नीरज चोपड़ा
- फोटो : फाइल फोटो
नीरज के पहले कोच जितेंद्र ने बताया कि शिवाजी स्टेडियम में जब पहली बार नीरज चोपड़ा को उसके चाचा सुरेंद्र चोपड़ा लेकर आए तो लगभग छह महीने तक वजन कम करने से लेकर फिट होने तक उससे सभी खेल खिलवाए गए। नीरज दौड़ने में काफी धीमा निकला, बाकी खेल करवाने के बाद जब उसके हाथ में पहली बार बांस का भाला दिया तो पहली ही बार में उसने 25 मीटर से दूर भाला फेंक दिया। तभी लगा था कि नीरज इसी खेल के लिए बना है।
नीरज चोपड़ा
- फोटो : Instagram @neeraj____chopra
पानीपत के शिवाजी स्टेडियम का मैदान समतल न होने और घास में सही से अभ्यास न होने पर नीरज के साथ ट्रेनिंग करने वाले जयबीर ढौंचक उर्फ मोनू उनको अपने साथ यमुनानगर स्टेडियम में ले जाने लगे थे। जहां उनको अच्छे मैदान की सुविधा मिली। साथी जयबीर के साथ नीरज ने भाला फेंकने की तकनीक पर काम किया।
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नीरज चोपड़ा
- फोटो : Instagram @neeraj____chopra
नीरज ने पानीपत के बाद यमुनानगर, फिर पटियाला और ओलंपिक के लिए जर्मनी में ट्रेनिंग ली थी। ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने के लिए भारत में अभ्यास करने के बाद उन्होंने जर्मन कोच डॉ. क्लाउस बार्टोनिट्ज से भाला फेंकने की ट्रेनिंग ली।