रूस और यूक्रेन की जंग में जहां आपदा में अवसर की तलाश में लोग रहते हैं। वहीं करनाल का रहने वाला भवन शर्मा भारत का सीना यूक्रेन में ऊंचा कर रहा है। कीव से 1500 के करीब विद्यार्थियों को निकालकर लवीव शहर तक पहुंचा चुका है और अब भी पूरा उत्साह से लबरेज है। एक ही वाक्या निकल रहा है कि भाजी......जब तक जेब में एक पैसा है और शरीर में खून है और एक भारतीय विद्यार्थी है, मैं कीव नहीं छोड़ने वाला।
भावन की बहादुरी: कीव में फंसे 1500 छात्रों को निकाला, कहा- जब तक शरीर में खून का कतरा... हर हिंदुस्तानी को बचाऊंगा
शुक्रवार को जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था तो कीव में सायरन बजने लगे थे, कीव को खाली करने की एडवाइजरी जारी होने लगी थी। कीव में रहने वाले बच्चों के चेहरों पर हवाइयां उड़ने लगी थी। मुझे वह दृश्य कभी नहीं भूलता, हर कोई दौड़ रहा था। किसी की जेब में पैसे नहीं थे, किसी के पास खाना पीना नहीं। स्टोर से ब्रेड से लेकर दूध तक साफ कुछ खाली हो चुका था। सबसे निकट लवीव था, जहां से विद्यार्थी यूक्रेन से बाहर निकल सकते थे, उसकी दूरी कीव से 550 किलोमीटर थी। यूक्रेन में पुलों पर खतरा मंडरा रहा था।
ट्रेन लवीव की तरफ निकल रही थी। भारतीय स्टूडेंट्स को उठा उठाकर स्टेशन तक पहुंचाया, जिसकी जेब में पैसा नहीं, उसको पैसा दिया। जिसके पास खाने का सामान नहीं, उसको मुहैया करवाया। पहली रात में मैं 170 बच्चों को कीव से सुरक्षित निकालने में कामयाब हो गया। पांच साल से यूक्रेन में रहता हूं, यहां के हर इलाके से वाकिफ था। लंबे समय से कार की ट्रेडिंग के अतिरिक्त टैक्सी कंपनी चलाता रहा, कुछ देर कॉफी शॉप चलाई। आप यकीन मानिए, जितनी जमा पूंजी थी, सब विद्यार्थियों को निकालने पर लगा दी।
छह माह पहले मेरे पास मामा का 21 साल का बेटा यश गोस्वामी करनाल से आया था, उसको बोला कि वह भी लवीव निकल जाए पर उसने कीव छोड़ने के स्थान पर मेरे हाथ से हाथ मिलाकर साथ देना शुरू कर दिया। करनाल के सदर बाजार गांधी चौक के रहने वाले भवन शर्मा कहते हैं कि स्टेशन से स्पेशल ट्रेन लवीव के लिए बुक करवाई, प्लेटफार्म पर देखा कि 30-35 छात्रों का केरल का रहने वाला ग्रुप हाताश और निराश बैठा हुआ था, पता चला कि उनके पास लवीव तक जाने का साधन नहीं है, उनको भी ट्रेन में बैठाया और खाने के लिए मुट्ठी बंद कर पैसा भी दिया, आखिरकार वह भी मेरे देश हिंदुस्तान के हैं।
आज भी व्हाट्सएप पर एक संदेश व गूगल मैप की लोकेशन आई है। कीव से 100 किलोमीटर दूर गांव पिसोचिन में 100 भारतीय विद्यार्थियों का ग्रुप रूका हुआ है। उनको आगे कैसे ले जाना है, इसको लेकर चिंतित हूं। दिक्कत है कि पेट्रोल मिल नहीं रहा है, पुल पर टैक्सी या गाड़ी को ले जाना ठीक नहीं है। एक कार में कितने लोग आगे चले जाएंगे ? अभी स्टूडेंट्स को इतना ही कहा है कि जहां हो, वहीं पर रुके रहो। बाहर गोले बरस रहे हैं। खाने पीने के स्टोर कीव में बंद है पर कीव में अभी भी भारी संख्या में भारतीय विद्यार्थी हैं, उनको निकालने की कोशिश जारी है। मैं रहूं या न रहूं पर आखिरी सांस तक हर भारतीय विद्यार्थी को वापस भेजने का पूरा यत्न करूंगा, यही मेरा मिशन है।