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कौन थे पंडित गोलकनाथ, जिनके नाम पर बना पंजाब का सबसे पुराना चर्च, रोचक है इतिहास

Fri, 25 Dec 2020 07:52 PM IST
ajay kumar सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Fri, 25 Dec 2020 07:52 PM IST
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Christmas 2020: Read The History Of Golak Nath Memorial Church of Jalandhar
गोलकनाथ मेमोरियल चर्च।

पंजाब के सबसे पुराने चर्च का इतिहास बहुत कम लोग ही जानते हैं। जालंधर में पुरानी जेल रोड पर स्थित ‘गोलकनाथ मेमोरियल चर्च’ का निर्माण 1885 में हुआ था। इस चर्च का निर्माण पंडित गोलकनाथ चटर्जी के नाम पर हुआ। 

Christmas 2020: Read The History Of Golak Nath Memorial Church of Jalandhar
गोलकनाथ मेमोरियल चर्च

वे पश्चिम बंगाल के रहने वाले थे। इसका निर्माण चार्ल्स बैटी न्यूटन ने करवाया था। जिस समय इस चर्च का निर्माण किया गया था। उस समय आसपास का पूरा इलाका जंगल था। चर्च बनने के बाद इलाका आबाद हो गया। आज भी यहां 125 वर्ष पुरानी डेस्कों पर प्रार्थना की जाती है। चूने से बनी दीवारें और क्रॉस शेप में बना यह चर्च अपने इतिहास को खुद बयां करता है। 

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Christmas 2020: Read The History Of Golak Nath Memorial Church of Jalandhar

ऐसा बताया जाता है कि पंडित गोलकनाथ अंतिम समय तक जनेऊ धारण किए रहे। हालांकि समाज में फैली जातिवाद की बुराइयों से द्रवित होकर उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया। एक घटना के मुताबिक गोलकनाथ को एक छोटी जाति के व्यक्ति ने छू लिया था। इसका समाज ने पुरजोर विरोध किया था।

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Christmas 2020: Read The History Of Golak Nath Memorial Church of Jalandhar

उन्हें खुद को शुद्ध करने के लिए कई तरह की औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ी थी। इससे दुखी होकर वे कोलकाता से पंजाब चले आए और बाइबिल का ज्ञान प्राप्त किया। बाइबिल से प्रभावित होकर ही उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया। कपूरथला के राजा हरनाम सिंह ने जब पंडित गोलकनाथ के बारे में सुना तो उनका मन भी अंग्रेजी सीखने और ईसाई धर्म के बारे में जानने को हुआ। 

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Christmas 2020: Read The History Of Golak Nath Memorial Church of Jalandhar

वे गोलकनाथ से मिलने पहुंचे। उनका साथ उन्हें इतना अच्छा लगा की वे रोजाना मिलने जाने लगे। इसी समय उनका संपर्क गोलकनाथ की पुत्री पोली से हुआ। राजा ने पोली से शादी कर ली। ईसाई धर्म को आगे बढ़ाने का काम महाराजा हरनाम सिंह ने ही किया था। मौजूदा समय में गोलकनाथ परिवार की बेटी नेहा व उनके पति अश्विनी कौशल इस मिशनरी को चला रहे हैं। 

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