अग्निपथ की आड़ में लुधियाना रेलवे स्टेशन पर भी हुड़दंग मचाने की साजिश का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि प्रदर्शनकारियों की लुधियाना रेलवे स्टेशन को बिहार की तर्ज पर दहलाने की साजिश थी। मौके पर उस वक्त स्टेशन पर मालगाड़ी के अलावा कोई ट्रेन नहीं थी। इस कारण बचाव हो गया, अगर कोई यात्री गाड़ी खड़ी होती तो उसे आग के हवाले करने की पूरी योजना थी। हैरानी की बात यह है कि आरपीएफ और जीआरपी को युवकों के प्रदर्शन के इनपुट्स थे लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने गंभीरता नहीं दिखाई। देशभर में हुए उत्पाद के बावजूद आरपीएफ और जीआरपी ने चंद मुलाजिमों की सुरक्षा रेलवे स्टेशन पर लगा दी। बाद में खुद पुलिस प्रदर्शनकारियों के आगे हाथ पैर जोड़ती रही लेकिन उपद्रवियों ने किसी की नहीं सुनी और रेलवे स्टेशन को पूरी तरह से तोड़फोड़ दिया। प्रदर्शनकारी युवा भारत नगर चौक पर इकट्ठे हुए और तोड़फोड़ करते हुए रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए। पुलिस की लेट लतीफी के कारण युवा सामान तोड़ने रहे और फरार हो गए। अब पुलिस सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो के आधार पर युवकों की पहचान कर उन्हें काबू करने में जुटी है।
बड़ा खुलासा: लुधियाना में अग्निपथ के विरोध की आड़ में रची गई थी बड़ी साजिश, व्हाट्सएप ग्रुप में बनी योजना, ऐसे हुआ बचाव
छह माह पहले भी इन्हीं युवकों ने किया था प्रदर्शन
कोरोना की वजह से सरकार सेना भर्ती आयोजित नहीं की है। जनवरी में शहर और आसपास के युवकों ने प्रदर्शन किया था। उस समय भी काफी समय तक जगरांव पुल पर जाम लगाया गया और आगे की रणनीति तैयार करने की योजना थी। अब केंद्र की मोदी सरकार की तरफ से अग्निपथ स्कीम लाई गई तो देश के युवा सड़कों पर उतर आए। इस दौरान बिहार और उत्तर प्रदेश के साथ-साथ कई राज्यों में प्रदर्शन और तोड़फोड़ व आगजनी की घटनाएं हो रही हैं। महानगर के युवा भी व्हाट्सएप ग्रुप के जरिये इकट्ठे हुए और प्रदर्शन किया। अब पुलिस सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो छान रही है और उन युवकों की पहचान करने में जुटी है, ताकि उक्त युवकों को काबू किया जा सके। हेडक्वार्टर से पुलिस कमिश्नर से इस संबंधी रिपोर्ट मांग ली गई है और देर शाम पुलिस अधिकारियों ने तीन घंटे की मैराथन बैठक की है। अब पुलिस पूरा घटनाक्रम होने और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होने के बाद लकीर पीट रही है।
लाठी, डंडे और पेट्रोल की बोतलें लेकर आए थे प्रदर्शनकारी
प्रदर्शनकारी भारत नगर चौक में इकट्ठे हुए और पुलिस के वाहनों, बैरिकेड्स को तोड़ते हुए रेलवे स्टेशन तक पहुंच गए थे। जांच में सामने आया है कि इनकी तरफ से कई ग्रुप बनाए गए थे और वह इसके लिए पिछले चार दिन से चर्चा कर रहे थे। कुछ युवकों की योजना थी कि पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो उन्हें भी नहीं छोड़ा जाएगा। ये युवक लाठी, डंडे और पेट्रोल की बोतलें लेकर आए थे। इन ग्रुपों ने पुलिस को सबसे ज्यादा टारगेट किया गया और सरकार के खिलाफ काफी जहर उगला गया। अब पुलिस व्हाट्सएप ग्रुपों में शामिल 40 नंबरों की जांच कर रही है। जांच में सामने आया है कि पंजाब में भी बिहार और दूसरे राज्यों की तरह दंगे भड़काने की कोई योजना थी।
अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज
पुलिस कमिश्नर ने घटना के बाद तीन घंटे तक अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरे मामले को जांचा। इसके बाद अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। जांच में पाया गया है कि करीब 12 युवकों ने दुर्गा मंदिर चौक पर पीसीआर के वाहन की तोड़फोड़ की है, इसके अलावा जगरांव पुल पर बैरिकेड्स तोड़े गए हैं। रेलवे स्टेशन पर भी उत्पात मचाया गया है। इस पर रेलवे पुलिस और थाना डिवीजन नंबर 8 में दो अलग-अलग आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने अज्ञात युवकों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है और पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस कमिश्नर डॉ. कौस्तुभ शर्मा का कहना है कि मामले को काफी गंभीरता से लिया गया है और पूरे तथ्य जांचने के बाद आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
दहशत का दूसरा दिन, लुधियाना स्टेशन पर पसरा सन्नाटा
लुधियाना स्टेशन पर उपद्रव के दूसरे दिन रविवार को पूरे स्टेशन परिसर में सन्नाटा पसरा रहा। प्रतिदिन 60 से 70 हजार यात्रियों के आगमन वाले स्टेशन पर इक्का दुक्का यात्री और पुलिस बल को छोड़कर हर तरफ दहशत नजर आई। प्लेटफार्म और टिकट काउंटर खाली थे। भय के कारण यात्री स्टेशन परिसर में दाखिल तक नहीं हुए और आरक्षण केंद्र से टिकट रिफंड लेकर बाहर से ही लौटते गए। वहीं यूपी-बिहार की करीब दो दर्जन ट्रेनें रद्द होने का असर भी देखने को मिला। अधिकतर ट्रेनों के मार्ग बदल दिए गए, जिसके चलते बड़ी संख्या में टिकट रिफंड हुए और भारतीय रेलवे को लाखों का नुकसान झेलना पड़ा।