हरियाणा में बुढ़ापा सम्मान पेंशन काटने का विवाद शांत नहीं हुआ है। अब महिलाओं के मुर्दा पतियों को जिंदा बताकर उनकी विधवा पेंशन काटने का मामला सामने आ गया है। 30 से अधिक विधवा महिलाओं और खुद को जिंदा साबित करने पहुंचे बुजुर्गों ने चंडीगढ़ में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के आवास के बाहर जमकर हंगामा किया। विधवा महिलाओं ने एक सुर में कहा कि उन्हें विधवा पेंशन नहीं बल्कि पति चाहिए। करीब एक घंटे तक चले घटनाक्रम के दौरान पुलिस ने बुजुर्गों को हिरासत में लिया और बाद में छोड़ दिया। मुख्यमंत्री आवास पर पहुंची रोहतक निवासी 67 साल मूर्ति देवी ने कहा कि उनके पति का 22 साल पहले निधन हो चुका है। दिसंबर से विभाग ने यह कहकर पेंशन बंद कर दी गई कि उनके पति तो जिंदा हैं।
यहां मुर्दा पति हो चुके जिंदा: 30 से अधिक विधवा CM आवास पहुंचीं, कहा- हमें पति चाहिए, पेंशन नहीं
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राजरानी ने कहा कि 2007 में उनके पति की मौत हो चुकी है। छह माह से पति जिंदा बताया दिया है और नाम तक बदल कर पेंशन रोक दी। इसी प्रकार, रोहतक के गढ़ी मोहल्ला निवासी गुड्डी की दास्तां है। गुड्डी ने कहा कि पति की मौत के बाद अब विभाग ने यह भी कहा है कि उसने किसी और से शादी कर ली है। वह दफ्तरों के चक्कर काटकर थक चुकी है लेकिन विभाग मानने को तैयार नहीं है। रानी के पति की 2005 में मौत हुई लेकिन विभाग इसे जिंदा मान रहा है।
डोभ गांव की रहने वाली कैलाशो देवी को 10 माह से पेंशन नहीं मिल रही, उसके पति का नाम ही गलत कर दिया है। 35 साल की विधायक पूनम सुनारिया ने कहा कि पीपीपी में अपने पति का मृत्यु प्रमाण पत्र भी लगाया है फिर भी विभाग पति को मृत नहीं जिंदा मान रहा है। गीता देवी का कहना है कि विभाग कह रहा है कि वह पति की रिटायरमेंट की पेंशन ले रही है, जबकि उसे कोई भी पेंशन नहीं मिल रही है। बुजुर्गों ने कहा कि जब से परिवार पहचान पत्र बने हैं, इसके बाद से पेंशन काटी जा रही है, इसकी जांच होनी चाहिए। बता दें कि छह माह पहले सरकार ने सर्वे के आधार पर करीब 15 हजार विधवा महिलाओं की पेंशन रोक दी थी। सरकार का दावा था कि इन विधवा महिलाओं ने दोबारा से शादी कर ली है।
पांच साल से नहीं बनी दिव्यांग पेंशन
शकिला दिव्यांग है और उसके पिता की मौत हो चुकी है, भाई अलग रहते हैं और माता बुजुर्ग है। पांच साल तक वह समाज कल्याण विभाग के चक्कर लगाकर अब थक चुकी हैं। कोई सुनने को तैयार नहीं है। इसी प्रकार, दिव्यांग सूरजभान की कहानी है। 60 साल से ऊपर के हो चुके कैथल के राजेंद्र, धर्मबीर, राजबीर और रामेदेही की आज तक बुढ़ापा पेंशन नहीं मिली है। इसके अलावा, काफी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिनकी सालाना आय न के बराबर है लेकिन आय पांच लाख से अधिक दिखाकर पेंशन काट दी गई।
पुलिस ने सीएम आवास पर जाने से रोका
सामाजिक कार्यकर्ता नवीन जयहिंद के साथ दोपहर दो बजे चंडीगढ़ स्थित प्रेस क्लब पहुंचे। यहां से 3.30 बजे सभी विधवा महिलाएं, बुजुर्ग और दिव्यांग मुख्यमंत्री आवास के बाहर पहुंचे। यहां पर पुलिस ने बेरिकेडस लगाकर उनको रोक लिया। करीब एक घंटे तक चले हंगामे के बीच बुजुर्गों को सेक्टर 3 पुलिस थाने ले जाया गया। इस दौरान बुजुर्गों और पुलिस में तीखी नोंक झोंक भी हुई। बाद में मुख्यमंत्री कार्यालय में दो बुजुर्गों को बुलाया गया। इस दौरान सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारियों ने उनसे बैठक कर दस्तावेज लिए और आश्वासन दिया कि जल्द ही इन मामलों का समाधान किया जाएगा। 5:30 बजे बुजुर्गों को छोड़ दिया गया।