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तीन डिग्री तापमान में हौसला छू रहा आसमान, किसान बोले-लड़ाई फसलें ही नहीं, नस्लें बचाने की भी 

Wed, 23 Dec 2020 02:11 PM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 23 Dec 2020 02:11 PM IST
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Farmer Protest : Even in cold, farmers stay on dharna at singhu border
कड़ाके की ठंड के बावजूद किसान धरने पर डटे हैं। - फोटो : अमर उजाला
तापमान तीन डिग्री तक आ गया है, लेकिन दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बॉर्डर पर किसानों का जोश बरकरार है। पंजाब से निकलकर किसानों ने अपना संसार फिलहाल ट्रैक्टरों में समेट लिया है। कई किलोमीटर तक ट्रैक्टरों की कतार को किसानों ने अस्थायी घर का रूप दे रखा है। ज्यादा वक्त अरदास और आने वाले किसानों की सेवा में व्यतीत करने वाले किसानों का एक सुर में कहना है, 'सरकार से बार बार गुहार है, वर्ना हममें जोश बरकरार है। मामला सिर्फ फसलें बचाने का नहीं, नस्लें बचाने का है।' 
Farmer Protest : Even in cold, farmers stay on dharna at singhu border
धरने में ट्रैक्टर पर पहुंची महिला किसान। - फोटो : अमर उजाला
25 नवंबर से सिंघु बार्डर पर डटे किसान करणजीत सिंह गांव घराला गुरदासपुर बताते हैं कि सुबह उठकर कुछ किलोमीटर तक टहलने के बाद दिन भर सेवा और लंगर वितरण के अलावा किताब पढ़ते हैं। करणजीत सिंह ने ट्राली में अस्थायी बेड, गद्दे, प्लास्टिक शीट आदि लगाकर पूरा बेडरूम तैयार कर रखा है। ट्राली के ऊपर तिरपाल इस तरह से लगाया गया है कि अंदर हवा न आए। तापमान तीन डिग्री तक आ जाता है, इस पर कमलजीत सिंह कहते हैं कि ‘ जब हम खेतों में काम करते थे तब हमारा अभ्यास हो जाया करता था। अब यहां हर सुबह दौड़ता हूं और कसरत करता हूं। सेवा भी करता हूं।  
मिट्टी में पले बढ़े हैं..यह धुंध क्या बिगाड़ लेगी
पटियाला के गांव मझाल खुर्द की महिला किसान राणा शेरगिल का कहना है कि उनका परिवार 50 एकड़ जमीन में खेती करता है। हमारा परिवार क्रांतिकारी किसान यूनियन से जुड़ा है। मैं यहां मोर्चे पर डटी हूं, मेरा भाई अमृत शेरगिल भी जत्थे के साथ आया हुआ है। हमारा जन्म ही मिट्टी में हुआ है, ठंड और धुंध में तो हम पले बढ़े हुए हैं। सरकार सोचती है कि हम कुछ दिनों में चले जाएंगे तो यह वहम है। पंजाब का धंधा ही खेतीबाड़ी है और खेतीबाड़ी पर सारा पंजाब टिका हुआ है।
Farmer Protest : Even in cold, farmers stay on dharna at singhu border
धरने पर डटे किसान। - फोटो : अमर उजाला
हरियाणा में आंदोलन लेकिन वहां के किसान कम...
प्रदर्शन में हरियाणा के किसानों की मौजूदगी कम है। आंदोलन बेशक हरियाणा में हो रहा है लेकिन वहां के किसान अधिक नहीं हैं। लेकिन एक जगह पर हुक्के के बीच हरियाणा के किसानों की चौपाल जरूर नजर आई।
ट्रैक्टर से ट्विटर और किसान लाइब्रेरी तक
युवा किसानों ने सोशल मीडिया पर धमाल मचा रखा है। इसके लिए बाकायदा एक आईटी टीम काम कर रही है। खास तौर पर यहां एक लाइब्रेरी भी बना रखी है, जहां पर क्रांतिकारी किताबों को जमा किया गया है। किताबों को ट्रालियों तक पहुंचाया भी जा रहा है।
 
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Farmer Protest : Even in cold, farmers stay on dharna at singhu border
खाना तैयार करते युवक। - फोटो : अमर उजाला
वाहेगुरु जी लंगर छक लो जी...
सिंघु बॉर्डर बंद होने की वजह से हरियाणा से दिल्ली आने-जाने वाले लोगों को 6-7 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। पूरे रास्ते में ट्रालियों का काफिला कतार में खड़ा है। जूस से लेकर पिज्जा और बर्गर तक के स्टाल लगे हैं। बिस्कुट से लेकर टूथ ब्रश और नारियल तेल से लेकर सरसों का तेल छोटी शीशियों में बांटा जा रहा है। ट्रालियों के बीच घुसते ही एक स्थान पर चाय के बड़े-बड़े भगोने चढ़े हुए थे, महिलाओं समेत एक पूरा सिख परिवार सामने से गुजरने वाले लोगों को आवाज लगा रहा है. वाहे गुरु...चाह पी लो...लंगर छक लो।  
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Farmer Protest : Even in cold, farmers stay on dharna at singhu border
किसान हूं आतंकी नहीं... की टीशर्ट पहने युवक। - फोटो : अमर उजाला
पीड़ा खालिस्तान और पाकिस्तान से जोड़ने की...
सिख किसानों और इस आंदोलन को खालिस्तान-पाकिस्तान से जोड़ने की पीड़ा और क्रोध इन युवाओं में साफ दिखता है। किसानों की बेटियां और बेटे बैनर लेकर कतार में खड़े दिखते हैं, कई लोगों ने टी शर्ट पहन रखी है, जिस पर लिखा है, ‘हम किसान हैं आतंकवादी नहीं’। सड़क किनारे-तिरपाल में ढके सैकड़ों चावल-गेहूं की बोरियां साफ बताती हैं कि ये आंदोलन निर्णायक होगा। जिस तरह से किसानों ने अनाज स्टॉक कर रखा है, उससे लगता है किसान लंबी लड़ाई की तैयारी करके आए हैं। कई स्थानों पर सैकड़ों बोरे चावल व गेहूं के रखे हैं। रिफाइन तेल के बड़े पैकेट हैं, घी के कनस्तर हैं। हरियाणा से दूध की सप्लाई रोजाना हो रही है, वहां से किसान जत्थेबंदियों की गाड़ियां सुबह दूध लेकर आ जाती हैं। अलग अलग जत्थों को दूध सप्लाई किया जाता है।
 
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