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अवैध निर्माण ने बिगाड़ दी सिटी ब्यूटीफुल की सूरत, सैटेलाइट की तस्वीरों से हैरतंगेज खुलासे
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 18 Feb 2021 03:27 PM IST
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चंडीगढ़ में अवैध निर्माण से बिगड़ी शहर की सूरत।
- फोटो : अमर उजाला
अतिक्रमण और खेती की जमीन पर निर्माण करने के मामले में चंडीगढ़ यूटी प्रशासन ने धनास और सारंगपुर स्थित मार्बल मार्केट के 183 शोरूम संचालकों को नोटिस भेज दिया है। एसडीएम हरजीत सिंह संधू ने इसकी पुष्टि की। हालांकि प्रशासन की सख्ती के बावजूद शहर में अवैध निर्माण जारी है। सैटेलाइट की तस्वीरें बता रही हैं कि खुड्डा अलीशेर में बीते कुछ सालों में सबसे ज्यादा अवैध निर्माण हुए हैं।
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2006 में खुड्डा अलीशेर।
- फोटो : अमर उजाला
खुड्डा अलीशेर में वर्ष 2006 तक लगभग सभी निर्माण फिरनी के अंदर ही थे लेकिन वर्ष 2009 के बाद फिरनी के बाहर अवैध निर्माण तेजी से बढ़ गए। खुड्डा अलीशेर के बस स्टैंड से नयागांव की तरफ जाने वाली सड़क के पास अब कई नई दुकानें खुल गई हैं, यह सभी खेती की जमीन पर बनी हुई हैं। इनमें से ज्यादातर दुकानें लॉकडाउन के बाद ही बनी हैं। यहां पर गुलमेल मार्केट के पीछे की ओर भी काफी तेजी से निर्माण कार्य हो रहा है। लॉकडाउन से पहले इस इलाके में गिने-चुने मकान ही थे, लेकिन अब इनकी संख्या दर्जनों में है।
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2021 में खुड्डा अलीशेर
- फोटो : अमर उजाला
खुड्डा अलीशेर में जंगल की जमीन पर भी कब्जा हो रहा है। रिहायशी इलाके और जंगल के बीच की खाली जमीन पर भी लोगों ने घर बना लिया है। ऐसा नहीं है कि प्रशासन को इसकी भनक नहीं लगी। अधिकारियों के पास इन निर्माणों की जानकारी थी, लेकिन अधिकारियों ने कब्जा होने दिया और कोई कार्रवाई नहीं की। प्रशासन को समय-समय पर सैटेलाइट तस्वीरें मिलती रहीं, जिसमें अवैध निर्माण के सबूत थे लेकिन अधिकारियों ने आंखें मूंद ली जिससे शहर का नक्शा बदल गया है।
अवैध निर्माण
- फोटो : अमर उजाला
अतिक्रमण का आलम, फिरनी की सड़क की चौड़ाई भी हुई कम
सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों में देखा जा सकता है कि खुड्डा अलीशेर में अधिकतर अवैध निर्माण वर्ष 2009 के बाद हुआ है। फिरनी के बाहर वर्ष 2006 से पहले माधो कालोनी में कुछ ही घर थे, लेकिन आज सैकड़ों घर है। यही नहीं लॉकडाउन से पहले जो घर एक मंजिला थे, लोगों ने मौका देखते ही दूसरी मंजिल भी बना ली। यहां अब भी निर्माण कार्य हो रहा है। बीते 15 सालों में इस कदर अतिक्रमण हुआ है कि फिरनी की सड़क की चौड़ाई जो 22 फीट हुआ करती थी, आज वह 15 फीट से भी कम की रह गई है। खेतों में दुकानें बन रही हैं। पेरीफेरी में गैर कानूनी तरीके से बोरिंग भी हो रही है। लोगों द्वारा प्रशासन को इसकी शिकायत भी मिलती रही है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों में देखा जा सकता है कि खुड्डा अलीशेर में अधिकतर अवैध निर्माण वर्ष 2009 के बाद हुआ है। फिरनी के बाहर वर्ष 2006 से पहले माधो कालोनी में कुछ ही घर थे, लेकिन आज सैकड़ों घर है। यही नहीं लॉकडाउन से पहले जो घर एक मंजिला थे, लोगों ने मौका देखते ही दूसरी मंजिल भी बना ली। यहां अब भी निर्माण कार्य हो रहा है। बीते 15 सालों में इस कदर अतिक्रमण हुआ है कि फिरनी की सड़क की चौड़ाई जो 22 फीट हुआ करती थी, आज वह 15 फीट से भी कम की रह गई है। खेतों में दुकानें बन रही हैं। पेरीफेरी में गैर कानूनी तरीके से बोरिंग भी हो रही है। लोगों द्वारा प्रशासन को इसकी शिकायत भी मिलती रही है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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चंडीगढ़ में अवैध निर्माण।
- फोटो : अमर उजाला
जब से लाल डोरा बढ़ाने की चर्चा, तेजी से हो रहा निर्माण कार्य
शहर में लाल डोरे को बढ़ाने को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इसका भूमाफिया व स्थानीय लोग लाभ उठाने की फिराक में हैं इसलिए पेरीफेरी में निर्माण कार्य तेज हो गया है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद जब बुधवार को प्रशासन की विभिन्न टीमों ने दौरा किया तो खुड्डा अलीशेर में मौके पर चार निर्माण होते दिखे। इन निर्माणों को तो प्रशासन ने तुरंत तोड़ दिया लेकिन गांव के फिरनी के बाहर भी कई निर्माण कार्य चल रहे हैं, जिन्हें अमर उजाला ने अपने कैमरे में कैद किया। इन लोगों पर पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर की अपील का कोई असर नहीं पड़ा है।
शहर में लाल डोरे को बढ़ाने को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इसका भूमाफिया व स्थानीय लोग लाभ उठाने की फिराक में हैं इसलिए पेरीफेरी में निर्माण कार्य तेज हो गया है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद जब बुधवार को प्रशासन की विभिन्न टीमों ने दौरा किया तो खुड्डा अलीशेर में मौके पर चार निर्माण होते दिखे। इन निर्माणों को तो प्रशासन ने तुरंत तोड़ दिया लेकिन गांव के फिरनी के बाहर भी कई निर्माण कार्य चल रहे हैं, जिन्हें अमर उजाला ने अपने कैमरे में कैद किया। इन लोगों पर पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर की अपील का कोई असर नहीं पड़ा है।