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खूंखार शिकारी है 'अपाचे', दुश्मन को तबाह करके ही छोड़ता है, दो खूबियां ऐसी शायद ही कोई जानता हो
मोहित धुपड़/नवदीप शर्मा, अमर उजाला, पठानकोट(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 04 Sep 2019 09:12 AM IST
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वायुसेना में शामिल हुआ अपाचे हेलीकॉप्टर
- फोटो : अमर उजाला
दुनिया का सबसे घातक लड़ाकू विमान 'अपाचे' एक खूंखार शिकारी है, जो दुश्मन को तबाह करके ही सांस लेता है। जानिए इसकी दो ऐसी खूबियां, शायद ही किसी को पता हों।
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वायुसेना में शामिल हुआ अपाचे हेलीकॉप्टर
- फोटो : अमर उजाला
‘फ्लाइंग टैंक’ नाम से मशहूर दुनिया के सबसे घातक हेलीकॉप्टर ‘अपाचे एएच-64 ई’ ने इंडियन एयरफोर्स की ताकत को और बढ़ा दिया है। यूएस की बोइंग कंपनी द्वारा निर्मित इस हेलीकॉप्टर की स्कॉवड्रन ‘ग्लेडिएटर’ को पंजाब स्थित अति संवेदनशील एयरफोर्स स्टेशन पठानकोट में तैनात किया गया है। मंगलवार को एक कार्यक्रम के तहत वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने इस लड़ाकू हेलीकॉप्टर को औपचारिक रूप से लॉन्च करते हुए एयरफोर्स के बेड़े में शामिल कराया।
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वायुसेना में शामिल हुआ अपाचे हेलीकॉप्टर
- फोटो : अमर उजाला
एयरफोर्स और आर्मी दोनों को कवर करेगा
युद्ध के मैदान में अपाचे हेलीकॉप्टर न केवल एयरफोर्स की ताकत होगा, बल्कि युद्ध में ही आर्मी स्ट्राइक कोर के हमले को एविएशन कवर देते हुए उसे और खतरनाक बनाएगा। एक के पीछे एक यानी दो पायलट के साथ अपाचे दुश्मन के दांत खट्टे करने में सक्षम है। एक पायलट हेलीकाप्टर ऑपरेट करेगा, जबकि उसके पीछे बैठा को-पॉयलट टारगेट को लोकेट करता हुआ सिस्टम यानी वैपन एंड इंक्यूपमेंट्स को कंट्रोल करते उसे ऑपरेट करेगा।
युद्ध के मैदान में अपाचे हेलीकॉप्टर न केवल एयरफोर्स की ताकत होगा, बल्कि युद्ध में ही आर्मी स्ट्राइक कोर के हमले को एविएशन कवर देते हुए उसे और खतरनाक बनाएगा। एक के पीछे एक यानी दो पायलट के साथ अपाचे दुश्मन के दांत खट्टे करने में सक्षम है। एक पायलट हेलीकाप्टर ऑपरेट करेगा, जबकि उसके पीछे बैठा को-पॉयलट टारगेट को लोकेट करता हुआ सिस्टम यानी वैपन एंड इंक्यूपमेंट्स को कंट्रोल करते उसे ऑपरेट करेगा।
वायुसेना में शामिल हुआ अपाचे हेलीकॉप्टर
- फोटो : अमर उजाला
दिन हो या रात, बारिश हो या जंगल, दुश्मन को नहीं छोड़ेगा
अपाचे उष्ण-कटीबंधीय क्षेत्रों और मरूस्थलीय इलाकों में भी अपनी ऑपरेशन को अंजाम देने की क्षमता रखता है। इसका टारगेट एक्वीजिशन और डेजिग्नेशन सिस्टम आधुनिक है। इसमें पॉयलट नाइट विजन सेंसर, थर्मल इमेजिंग, डाटा लिकिंग व फायर कंट्रोल राडार (360 डिग्री) सिस्टम भी मौजूद है, जिससे यह अंधेरे में भी दुश्मन पर वार कर सकता है। यह बेहद कम ऊंचाई से हवाई और जमीनी हमले में सक्षम है।
अपाचे उष्ण-कटीबंधीय क्षेत्रों और मरूस्थलीय इलाकों में भी अपनी ऑपरेशन को अंजाम देने की क्षमता रखता है। इसका टारगेट एक्वीजिशन और डेजिग्नेशन सिस्टम आधुनिक है। इसमें पॉयलट नाइट विजन सेंसर, थर्मल इमेजिंग, डाटा लिकिंग व फायर कंट्रोल राडार (360 डिग्री) सिस्टम भी मौजूद है, जिससे यह अंधेरे में भी दुश्मन पर वार कर सकता है। यह बेहद कम ऊंचाई से हवाई और जमीनी हमले में सक्षम है।
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वायुसेना में शामिल हुआ अपाचे हेलीकॉप्टर
- फोटो : अमर उजाला
280 की रफ्तार से 21 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है
अपाचे 21 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है। 280 किमी प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से उड़ान भर सकता है। अपाचे में 16 एंटी टैंक एजीएम-114 हेलफायर मिसाइल छोड़ने की क्षमता है। अपाचे 30 मिलीमीटर की दो गन से लैस है। इनमें एक बार में 1,200 गोलियां भरी जाती हैं। अपाचे में 16 एंटी टैंक एजीएम-114 हेलफायर और स्ट्रिंगर मिसाइल लगी होती है। हेलफायर मिसाइल किसी भी आर्मर्ड व्हीकल जैसे टैंक, तोप, बीएमपी वाहनों को पल भर में उड़ा सकती है।
अपाचे 21 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है। 280 किमी प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से उड़ान भर सकता है। अपाचे में 16 एंटी टैंक एजीएम-114 हेलफायर मिसाइल छोड़ने की क्षमता है। अपाचे 30 मिलीमीटर की दो गन से लैस है। इनमें एक बार में 1,200 गोलियां भरी जाती हैं। अपाचे में 16 एंटी टैंक एजीएम-114 हेलफायर और स्ट्रिंगर मिसाइल लगी होती है। हेलफायर मिसाइल किसी भी आर्मर्ड व्हीकल जैसे टैंक, तोप, बीएमपी वाहनों को पल भर में उड़ा सकती है।
