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5 दिन बाद बर्थडे था, पर उससे पहले ही अस्त हो गया 'चांद', बॉर्डर के शेर की बहादुरी के 5 किस्से

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 18 Nov 2018 03:03 PM IST
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Indian Army Retired Brigadier Kuldeep Singh Chandpuri Bravery Stories, 1971 Indo-Pak War
कुलदीप सिंह चांदपुरी
5 दिन बाद 79वां बर्थडे था, पर उससे पहले ही 'चांद' अस्त हो गया। पढ़े बॉर्डर के 'शेर' कुलदीप सिंह चांदपुरी की बहादुरी के 5 किस्से, पढ़कर सेल्यूट करेंगे आप।


1971 में लोंगेवाला के युद्ध में पाकिस्तान को धूल चटाने वाले ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी का शनिवार सुबह मोहाली के एक निजी हास्पिटल में निधन हो गया। वे ब्लड कैंसर से पीड़ित थे। लोंगेवाला युद्ध में उनकी सैन्य टुकड़ी ने बेमिसाल बहादुरी का प्रदर्शन किया था। युद्ध में उनके अदम्य साहस पर भारत सरकार ने महावीर चक्र से उन्हें सम्मानित किया था।

इसी युद्ध पर आधारित फिल्म बार्डर बनी थी। फिल्म में सनी देयोल ने चांदपुरी का किरदार निभाया था। 78 वर्षीय ब्रिगेडियर चांदपुरी यहां सेक्टर 33 में रहते थे। शुक्रवार की सुबह अचानक सीने में दर्द होने के चलते उनको मोहाली के अस्पताल में भरती कराया गया था। उनका छोटा बेटा जर्मनी में है। उसके आने पर उनका अंतिम संस्कार सोमवार को दोपहर एक बजे सेक्टर 25 के श्मशान घाट में किया जाएगा।

कनाडा में बिगड़ी थी तबियत
चांदपुरी करीब छह महीने पहले कनाडा में रहने वाले अपने मंझले बेटे अमरदीप के घर गए थे। वहां उनकी तबियत बिगड़ी। 22 अगस्त को जांच के दौरान पता चला कि वे ब्लड कैंसर से पीड़ित हैं। कनाडा में उनका इलाज शुरू भी हो गया था, मगर वहां उनका मन नहीं लगा और वे चंडीगढ़ लौट आए। उसके बाद उन्हें मोहाली के अस्पताल में एडमिट कराया गया। 22 नवंबर को वे अपना 79 वां जन्मदिन सेलिब्रेट करने वाले थे।

ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह का जन्म 22 नवंबर, 1940 को एक गुर्जर सिख परिवार में हुआ था। उनके परिवार का संबंध अविभाजित भारत के पंजाब में मोंट गोमरी से था। उनके जन्म के बाद उनका परिवार बलाचौर के चांदपुर रुड़की शिफ्ट हो गया था। साल 1962 में चांदपुरी भारतीय थल सेना में शामिल हुए थे। 1963 में उनको ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी से पंजाब रेजिमेंट की 23वीं बटालियन में कमीशन किया गया था। उन्होंने 1965 के युद्ध में हिस्सा लिया था। युद्ध के बाद वह एक साल तक गाजा (मिस्र) में संयुक्त राष्ट्र के मिशन पर रहे।
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पांच दिन बाद मनाने वाले थे 79वां बर्थ डे

Indian Army Retired Brigadier Kuldeep Singh Chandpuri Bravery Stories, 1971 Indo-Pak War
कुलदीप सिंह चांदपुरी
चांदपुरी 22 नवंबर को अपना 79वां जन्मदिन मनाने वाले थे। वे बीमार जरूर थे, लेकिन परिवार वाले जोर-शोर से उनका जन्मदिन मनाने वाले थे। साल 1940 को जन्मे चांदपुरी अपने जीवन के 78 साल पूरे कर चुके थे। चांदपुरी के मझले बेटे अमरदीप ने बताया कि वे अपने पिता को कनाडा से लेकर आए थे। पापा यहां अपना जन्मदिन मनाना चाहते थे।

रोकर हुआ बुरा हाल, नहीं बोल पाईं एक भी शब्द
ब्रिगेडियर की पत्नी का रोरोकर बुरा हाल था। हर कोई उन्हें संभलने में लगा हुआ था। उनके बड़े बेटे ने उन्हें पिता के निधन के बारे में फोन करके बताया। इसके बाद से ही वे चुप सी हो र्गइं। सेक्टर 33 में उनके निवास पर निधन की सूचना के बाद से ही लोगों का आना जाना लगा रहा।

बार्डर फिल्म आने के बाद और ज्यादा चर्चित हो गए थे
सेना से रिटायर होने के बाद चांदपुरी चंडीगढ़ के सेक्टर 33 के हाउस नंबर 1119 में रहने लगे। 1997 में जब बार्डर फिल्म रिलीज हुई तो लोगों को पता चला कि फिल्म में सनी देयोल ने जिस शख्स का किरदार निभाया है, वह हीरो चंडीगढ़ में रहता है। इससे पहले चंडीगढ़ के बहुत कम लोग जानते थे कि लोंगेवाला का हीरो सेक्टर 33 में रहता है। जैसे-जैसे फिल्म चली, वैसे वे चरचा में आते रहे। उसके बाद मीडिया में उनके कई सारे इंटरव्यू आए।
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ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह न होते तो शायद भारत का नक्शा बदल जाता

Indian Army Retired Brigadier Kuldeep Singh Chandpuri Bravery Stories, 1971 Indo-Pak War
कुलदीप सिंह चांदपुरी
यदि लौंगेवाला पर मेजर कुलदीप सिंह नहीं होते शायद आज भारत का नक्शा कुछ और होता। पाकिस्तानी फौज आसानी से रामगढ़ होते हुए जैसलमेर तक पहुंच जाती। कुलदीप सिंह ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब युद्ध की समाप्ति पर पाकिस्तान के घायल सैनिकों से पूछताछ की तो पाकिस्तानी सेना के कमांडर 51 ब्रिगेड तारिक मीर का उसने एक नोट पढ़ा, जिसमें लिखा था कि ईंशा अल्लाह हम लौंगेवाला पर नाश्ता करेंगे, रामगढ़ में लंच और जैसलमेर में रात्रिभोज।

इसका मतलब था कि पाक का पूरा प्लान था कि वह लौंगेवाला पोस्ट जीतकर कर भारत में फौज को दाखिल कर लेगा और जैसलमेर तक पहुंच जाएगा। चांदपुरी की मौत की खबर सुन उनके घर पहुंचे रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल एसपीएस बथेजा ने बताया कि लौंगेवाला पर कुलदीप ने साहस नहीं दिखाया होता तो हालात कुछ और होते। लौंगेवाला से कुछ दूरी पर तैनात लेफ्टिनेंट कर्नल गुरजीत सिंह बाजवा ने बताया कि उस रात कुलदीप के पास मात्र 90 सैनिक थे। वे हर बंकर में जाते और सैनिकों का हौसला बढ़ाते।


 

लोंगेवाला जंग के असली हीरो थे चांदपुरी

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कुलदीप सिंह चांदपुरी
हिंदी फिल्म बार्डर के आखिर में फिल्माया गया भारत पाक की जंग ही लोंगेवाला युद्ध था। उस समय कुलदीप सिंह मेजर के पद पर तैनात थे। चार दिसंबर को मेजर कुलदीप सिंह को सूचना मिली कि पाकिस्तान की फौज लोंगेवाला चौकी के रास्ते बढ़ रही है। उस चौकी की जिम्मेदारी कुलदीप सिंह के पास थी। उनके पास सिर्फ 120 सैनिक थे, जबकि पाकिस्तान के पास सैनिकों की लंबी फौज। गोले बरसाने वाले भारी-भरकम टैंकर भी थे। 120 सैनिकों की बदौलत बड़ी फौज का सामना करना मुश्किल था। रात होने वाली थी और उन्हें कोई अंधेरे में फौजी सहायता मिलना भी संभव नहीं था।

विपरीत परिस्थितियों के बावजूद चांदपुरी ने अपने सैनिकों में हौसला भरा। पाक सैनिकों ने गोले बरसाना शुरू किए तो जवाबी हमले में भारतीय सैनिकों ने रिकॉइललेस राइफल और मोर्टार से फायरिंग कर उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। रात होते-होते पाकिस्तान के 12 टैंक तबाह कर दिए और 8 किलोमीटर दूर तक पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ दिया। पूरी रात मुट्टी भर सैनिकों ने पाकिस्तानियों को रोके रखा और उनका डटकर मुकाबला किया। सुबह होते ही भारतीय वायु सैनिक पहुंचे और पाकिस्तानी फौज को खदेड़ दिया।

जंग में पाक के 34 टैंक तबाह हुए थे
लोंगेवाला की जंग में पाकिस्तान के 34 टैंक तबाह हुए थे। कई सैनिक मारे गए थे। जंग में पाक को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी और यह सब मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी की वजह से संभव हो पाया था। उनकी बहादुरी पर भारत सरकार ने उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया। बार्डर फिल्म में भी इस युद्ध हुबहू दिखाया गया है।

पार्षद के साथ खेल एसोसिएशन से भी जुड़े रहे
फौज के साथ असल जिंदगी के भी वे हीरो रहे हैं। सेना से रिटायर होने के बाद चंडीगढ़ नगर निगम ने उन्हें मनोनीत पार्षद बनाया। पार्षद के रोल में वे सबके लोकप्रिय रहे। गुटबाजी से ऊपर उठकर उन्होंने शहर के विकास में अहम रोल निभाया। वे खेल एसोसिएशन से भी जुड़े रहे। चंडीगढ़ एथलेटिक्स एसोसिएशन के प्रधान व पैटर्न रहे। उन्होंने शहर में एथलेटिक्स से जुड़े कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का आयोजन चंडीगढ़ में कराया।
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पार्षद के रोल में सबके लोकप्रिय थे चांदपुरी

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कुलदीप सिंह चांदपुरी
ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी पार्षद के रोल में भी काफी हिट रहे हैं।  उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान शहर के विकास में अहम योगदान दिया। सेक्टर-33 टैरेस्ड गार्डन में शहीदी स्मारक का निर्माण, 23 मार्च को शहीदी दिवस मनाए जाने की नींव चांदपुरी ने ही रखी थी। प्रापर्टी टैक्स का माडल बनाने और कम्युनिटी सेंटर के बायलॉज ड्राफ्ट तैयार करने में वे महत्वपूर्ण भूमिका में थे। वे ही एक ऐसे मनोनीत पार्षद थे, जिन पर किसी पार्टी का ठप्पा नहीं लगा था। सदन में उनकी पहचान अनुशासित, मृदभाषी और सैनिकों से संबंधित मुद्दों को जोरदार ढंग से उठाने वाले की रही है।

पूर्व मेयर सुभाष चावला कहते हैं कि वे गुटबाजी से ऊपर उठकर काम करते थे। सबको साथ लेकर चलने की बात पर वे विश्वास रखते थे। वे इतने मृदभाषी थे, हर कोई उनसे बात करने के लिए उत्सुक रहता था। गंभीर से गंभीर बात को हंसी में टालना और तर्क संगत बात रखने में उनका कोई सानी नहीं था। अच्छी तरह याद है कि जब शहर में प्रापर्टी टैक्स की बात चल रही थी तो वे बंगलूरू गए थे और वहां से टैक्स का माडल लेकर आए थे। शहीदी स्तंभ तैयार करवाया। उसके बाद नगर निगम हर साल 23 मार्च को शहीदी स्तंभ पर सैनिकों की याद पर कार्यक्रम का आयोजन करता है।

पूर्व मेयर अरुण सूद बताते हैं कि जिस तरह वे फौज के प्रति समर्पित थे, वैसे ही वे निगम में अपने कार्यों के प्रति ईमानदार थे। मुद्दों पर उनकी राय काफी गहरी होती थी। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान शहर के लिए काफी कुछ किया है। कम्युनिटी सेंटर के बायलॉज बनाने में उनकी अहम भूमिका थी। राजनीति से वे दूर रहते थे। चंडीगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष व पूर्व मेयर प्रदीप छाबड़ा के मुताबिक ब्रिगेडियर चांदपुरी एक ऐसे व्यक्ति थे, जिनकी हर बात पर वजन होता था। जब वे सदन में अपनी बात रखते थे तो हर पार्षद और मेयर उनकी बात को ध्यानपूर्वक सुनता था, क्योंकि उन्हें जो भी कार्य सौंपा जाता था, वे उसकी पहले पूरी स्टडी करते।

फील्ड में जाते और उस कार्य से जुड़े हर लोगों से बातचीत करते। हर पक्ष को शामिल कर वे अपनी रिपोर्ट तैयार करते थे। डॉग बायलॉज में उन्होंने डॉग लवर्स, स्ट्रे डॉग सभी का ध्यान रखा। मेयर इलेक्शन करवाने की जिम्मेदारी ब्रिगेडियर चांदपुरी को ही सौंपी जाती थी।

 
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