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जज्बे को सलामः जन्म से ही चल नही सकते दोनों, फिर भी पत्नी नेशनल चैम्पियन और पति दर्जी
Thu, 10 Jan 2019 01:51 PM IST
खुशबू गोयल
प्रदीप कौशिक, अमर उजाला, सोनीपत(हरियाणा)
प्रदीप कौशिक, अमर उजाला, सोनीपत(हरियाणा)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 10 Jan 2019 01:51 PM IST
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पैरा एथलीट गीता गुलिया
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जन्म से दिव्यांग हैं दोनों, चल नहीं सकते। उसके बावजूद जज्बा ऐसा कि पत्नी नेशनल चैम्पियन बन गई और पति दर्ज बनकर घर चला रहा है। पढ़ें दंपति की दिलचस्प कहानी।
पैरा एथलीट गीता गुलिया
शारीरिक अक्षमता के कारण हार मानकर पीछे हटने वालों के लिए हरियाणा के सोनीपत जिले के पुरखास गांववासी रमेश और गीता एक मिसाल पेश की है। दोनों ही जन्म से पोलियोग्रस्त हैं और व्हीलचेयर के सहारे हैं। लेकिन कुछ कर दिखाने के जुनून ने गीता गुलिया को नेशनल चैम्पियन बना दिया। वहीं पति रमेश दर्जी का काम कर रहे हैं। गीता पावर लिफ्टिंग के खेल में नित नई उपलब्धियां हासिल कर रहीं हैं।
पैरा एथलीट गीता गुलिया
70 किलो वजन उठाकर गीता ने 6 जनवरी 2019 को सोनीपत में ही संपन्न हुई पावर लिफ्टिंग बेंच प्रेस नेशनल चैंपियनशिप जीती, अब वह वर्ल्ड चैंपियनशिप खेलने की तैयारी में है। वह केवल एक ही लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है और वह पैरालंपिक में खेलने का सपना है। पैरालंपिक 2020 में होना है, जिसमें पावर लिफ्टिंग बैंच प्रेस में गीता गुलिया को जगह बनाकर देश के लिए मेडल जीतना है।
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पावर लिफ्टिंग
रमेश गुलिया की शादी 2003 में गीता गुलिया से हुई थी। जन्म से पोलियो हो जाने के कारण दोनों ही व्हीलचेयर पर ही चलते हैं। इनके दो बच्चे हैं, एक की उम्र 9 तो दूसरे की 11 साल है और दोनों स्वस्थ हैं। रमेश परिवार का गुजारा चलाने के लिए गांव में ही दर्जी का काम करता है। जब दोनों बच्चे स्कूल जाने लगे तो गीता घर में अकेली रह जाती थी। समय न कटने से वह परेशान रहने लगी।
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पावर लिफ्टिंग
गांव का ही एक दिव्यांग युवक सुरजीत पावर लिफ्टिंग करता है, गीता ने उससे इस बारे में जानकारी ली। पति से विचार विमर्श के बाद 2016 में गीता ने पावर लिफ्टिंग शुरू की और सोनीपत में द्रोणाचार्य जिम में पावर लिफ्टिंग के गुर सीखने शुरू कर दिए। गीता ने कुछ ही दिन में अच्छी प्रैक्टिस कर ली और 2016 में ही दिल्ली में हुई नेशनल पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में 42.5 किलो वजन उठाकर गोल्ड मेडल जीत लिया।