इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में मौजूद लड़ाकू हेलीकॉप्टर एमआई-35 बूढ़े हो रहे हैं। तीन दशक से इंडियन एयरफोर्स में सेवाएं देने के बाद इन्हें अब धीरे-धीरे बेड़े से बाहर कर दिया जाएगा। इनकी जगह नए लड़ाकू हेलीकॉप्टर शामिल किए जाएंगे। फिलहाल यूएस निर्मित दुनिया के सबसे घातक अपाचे एएच-64 ई हेलीकॉप्टरों को रूस निर्मित एमआई-35 लड़ाकू हेलीकाप्टर की रिप्लेसमेंट के रूप में देखा जा रहा है।
नए तेवर और कलेवर में वायुसेना, जानें-क्यों लड़ाकू एमआई-35 हेलीकॉप्टर बेड़े से होंगे बाहर
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जैसे-जैसे अपाचे हेलीकॉप्टर इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में आते जाएंगे, पुराने हो चुके इन एमआई-35 हेलीकॉप्टरों को रिटायर किया जाता रहेगा। पिछले करीब 30 सालों से लड़ाकू हेलीकॉप्टर एमआई-35 इंडियन एयरफोर्स के पास हैं। इनमें से 6 हेलीकॉप्टरों को रिटायर किया जा चुका है। जून 1990 में इस अपग्रेडेड हेलीकॉप्टर की स्क्वाड्रन एयरफोर्स को मिली थी। हालांकि यह हेलीकॉप्टर भी रात में लड़ने के लिए सक्षम है। मगर विपरीत मौसम व कई दुर्गम क्षेत्रों में ये हेलीकॉप्टर हमलावर नहीं हो सकते।
उधर, इंडियन एयरफोर्स के सीनियर मोस्ट अटैक हेलीकॉप्टर पॉयलट एयर मार्शल एएस भुटेला के अनुसार एमआई-35 हेलीकॉप्टर को धीरे-धीरे बेड़े से बाहर किया जा रहा है। अभी तक यह बेहतरहीन लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में से एक रहा है। जबकि वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ के अनुसार एमआई-35 ने फील्ड में कई बार कठिन और निर्णायक परिस्थितियों में अपने मिशन को फतह किया है। पिछले तीन दशकों से यह अटैक हेलीकॉप्टर वायुसेना के पास है। मगर अब अपाचे से इस लड़ाकू एमआई-35 को रिप्लेस किया जाएगा। अपाचे हर मौसम और हर क्षेत्र में हमला करने की ताकत रखता है।
दुनिया के बड़े ऑपरेशन का भी हिस्सा रहा एमआई-35
देश ही नहीं विदेश में भी इस लड़ाकू एमआई-35 हेलीकॉप्टर ने कई बड़े मिशन पूरे किए हैं। यूएस के दो पीस कीपिंग मिशन में भी इन हेलीकॉप्टरों की अहम भूमिका रही है। राजस्थान में हुए ‘ऑपरेशन ब्रासटेक्स’ (सेना की बड़े स्तर की एक्सरसाइज) हो या फिर श्रीलंका में ‘ऑपरेशन पवन’ इनमें इस लड़ाकू हेलीकॉप्टर ने सक्रिय व सफल भूमिका अदा की थी।
कारगिल युद्ध हो या फिर वेस्ट अफ्रीका के देश सियरा लियोन में चलाया गया ‘ऑपरेशन खुखरी’ समेत ‘ऑपरेशन व्रज’ इस दौरान एमआई-35 ने महत्वपूर्ण रोल अदा किया था। विभिन्न अभियानों में अहम योगदान और भूमिका निभाने वाली एमआई-35 की स्क्वाड्रन को 2012 में चीफ ऑफ एयर स्टाफ और वर्ष 2017 में प्रेसिडेंट स्टैंडर्ड से सम्मानित भी किया गया था। इसके अलावा इस स्क्वाड्रन को वीर चक्र समेत अन्य युद्ध सेवा मेडल और वायुसेना मेडल भी जीत चुके हैं।

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