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8 क्लिक करके पढ़ें, डोप टेस्ट और इससे जुड़ी 8 जानकारियां, जो हर खिलाड़ी को पता होनी चाहिएं

Fri, 04 Jan 2019 01:45 PM IST
खुशबू गोयल संजीव पंगोत्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
संजीव पंगोत्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 04 Jan 2019 01:45 PM IST
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National Anti Doping Agency Seminar on Dope Test
DOPE TEST
डोप टेस्ट और इससे जुड़ी हर तरह की जानकारी हर खिलाड़ी को पता होनी चाहिए। बल्कि देश के हर शख्स को इसके बारे में जानना चाहिए, 8 क्लिक करके यहां पढ़ें।
National Anti Doping Agency Seminar on Dope Test
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नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) ने चंडीगढ़ में सेक्टर-42 स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में यूटी खेल विभाग के सहयोग से एक सेमिनार करवाया। इसमें डोप से जुड़ी तमाम जानकारियां दी गई। नाडा की टीम ने खिलाड़ियों को डोप टेस्ट का तरीका बताया और कुछ खिलाड़ियों के टेस्ट भी किए गए। सेमिनार में 190 खिलाड़ी, 35 कोच और अधिकारी शामिल हुए। इसमें दिल्ली से नाडा के दो अधिकारी और चंडीगढ़ पीजीआई के दो डॉक्टर भी मौजूद रहे। वहीं, यूटी खेल विभाग के ज्वाइंटडॉयरेक्टर स्पोर्ट्स डॉ. महेंद्र सिंह और डिस्ट्रिक्ट स्पोर्ट्स अधिकारी रविंदर सिंह लाड़ी के अलावा स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) की नार्थ रीजन की डॉयरेक्टर ललिता भी मौजूद रहीं।
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भर्ती प्रक्रिया - फोटो : अमर उजाला
क्या है डोप
ताकत बढ़ाने वाला वह पदार्थ जिसे खाने से किसी भी खिलाड़ी का स्टेमिना एकदम से बढ़ जाए। इस शॉर्टकट के जरिए वह खेल के मैदान में अपने विरोधी खिलाड़ियों को पीछे छोड़ सकता है।

कैसे होती है डोपिंग
कोई भी खिलाड़ी लिक्विड फॉर्म में इंजेक्शन के जरिए या प्रतिबंधित पाउडर खाकर या उसे पानी में घोलकर ले सकता है। इसे खाने-पीने की चीज में मिला कर भी लिया जा सकता है।
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पुलिस भर्ती
क्या होता है डोप टेस्ट
ताकत बढ़ाने वाली दवाओं के इस्तेमाल को पकड़ने के लिए डोप टेस्ट किया जाता है। किसी भी खिलाड़ी का किसी भी वक्त डोप टेस्ट लिया जा सकता है। किसी इवेंट से पहले या ट्रेनिंग कैंप के दौरान डोप टेस्ट में खिलाड़ियों का यूरिन लिया जाता है। यह टेस्ट नाडा (नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी) या फिर वाडा (वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी) की तरफ से कराए जाते हैं। इसमें खिलाड़ियों के यूरिन को वाडा या नाडा की खास लैब में टेस्ट किया जाता है। नाडा की लैब दिल्ली और वाडा की लैब दुनिया में कई जगहों पर हैं। इंटरनेशनल गेम्स में ड्रग्स के बढ़ते चलन को रोकने के लिए वाडा की स्थापना 10 नवंबर, 1999 को स्विट्जरलैंड में की गई थी। इसी के बाद हर देश में नाडा की स्थापना की जाने लगी।
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कब बने नियम
इंटरनेशनल एथलेटिक्स फेडरेशन ऐसी पहली संस्था थी, जिसने 1928 में डोपिंग पर नियम बनाए। 1966 में इंटरनेशनल ओलंपिक काउंसिल ने डोपिंग को लेकर मेडिकल काउंसिल बनाई। इसका काम डोप टेस्ट करना था। 1968 के ओलंपिक खेलों में डोप टेस्ट पहली बार हुए। इंटरनेशनल ओलंपिक एसोसिएशन के नियमों के अनुसार डोपिंग के लिए सिर्फ खिलाड़ी ही जिम्मेदार होता है।
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