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बेमिसालः 16 साल की इस लड़की ने किया ऐसा कारनामा, रच दिया इतिहास...क्या आप कर सकते हैं
Wed, 20 Feb 2019 09:06 AM IST
खुशबू गोयल
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 20 Feb 2019 09:06 AM IST
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मां-बाप के साथ नंदिनी
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16 साल की इस लड़की को देखिए, इसने एक कारनामा करके ऐसा इतिहास रच दिया कि हर कोई इसके जज्बे को सलाम कर रहा। क्या आप ऐसा कर सकते हैं...
नंदिनी की शील्ड और प्रमाण पत्र
अक्सर बच्चे स्कूल नहीं जाने के बहाने बनाते हैं। कभी पेट में दर्द, कभी सिर दर्द तो कभी बुखार। बच्चे कोशिश करते हैं कि किसी तरह से स्कूल जाने से बच जाएं। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि चंडीगढ़ की 16 साल वर्षीय नंदिनी ने बीते छह साल में एक भी दिन स्कूल से बंक नहीं मारा है। कक्षा पांव से लेकर 10वीं तक उन्होंने एक भी छुट्टी नहीं की है। इन छह सालों में स्कूल में उनकी अटेंडेंस 100 फीसदी रही है। इस दौरान नंदिनी ने न कोई फैमिली फंक्शन अटेंड किया और न ही कोई बीमारी उन्हें स्कूल जाने से रोक पाई। यहां तक कि मामा की शादी में भी नंदिनी सिर्फ इसलिए नहीं गईं, क्योंकि वह स्कूल से छुट्टी करना नहीं चाहती थीं।
फाइल फोटो
केजी में भी थी 100 फीसदी अटेंडेंस, चौथी में हुआ टाइफाइड
नंदिनी ने केजी से लेकर 10वीं तक की पढ़ाई सेक्टर-28 स्थित सेंट सोल्जर स्कूल में की है। केजी से ही वह रोज स्कूल जाती थीं। केजी, पहली, दूसरी कक्षा में भी नंदिनी की स्कूल में 100 फीसदी अटेंडेंस रही लेकिन चौथी कक्षा में टाइफाइड होने की वजह से उन्हें बेड रेस्ट लेना पड़ा और करीब 14 दिन स्कूल नहीं जा पाईं, लेकिन उसके बाद 5वीं से लेकर 10वीं तक उन्होंने एक दिन भी छुट्टी नहीं ली। स्कूल द्वारा नंदिनी को लगातार 6 सालों तक 100 फीसदी अटेंडेंस के लिए सम्मानित किया गया। 7वीं कक्षा में 221 दिन कक्षाएं लगीं और नंदिनी पूरे 221 दिन उपस्थित रहीं। इसी तरह 8वीं और नौवीं में 214 दिन कक्षाएं लगी और नंदिनी 214 दिन उपस्थित भी रहीं। रोज स्कूल आने के लिए स्कूल की तरफ से 10वीं कक्षा में नंदिनी को एक सर्टिफिकेट भी दिया गया।
नंदिनी ने केजी से लेकर 10वीं तक की पढ़ाई सेक्टर-28 स्थित सेंट सोल्जर स्कूल में की है। केजी से ही वह रोज स्कूल जाती थीं। केजी, पहली, दूसरी कक्षा में भी नंदिनी की स्कूल में 100 फीसदी अटेंडेंस रही लेकिन चौथी कक्षा में टाइफाइड होने की वजह से उन्हें बेड रेस्ट लेना पड़ा और करीब 14 दिन स्कूल नहीं जा पाईं, लेकिन उसके बाद 5वीं से लेकर 10वीं तक उन्होंने एक दिन भी छुट्टी नहीं ली। स्कूल द्वारा नंदिनी को लगातार 6 सालों तक 100 फीसदी अटेंडेंस के लिए सम्मानित किया गया। 7वीं कक्षा में 221 दिन कक्षाएं लगीं और नंदिनी पूरे 221 दिन उपस्थित रहीं। इसी तरह 8वीं और नौवीं में 214 दिन कक्षाएं लगी और नंदिनी 214 दिन उपस्थित भी रहीं। रोज स्कूल आने के लिए स्कूल की तरफ से 10वीं कक्षा में नंदिनी को एक सर्टिफिकेट भी दिया गया।
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चंडीगढ़ पुलिस में पिता, बड़े भाई का भी अटेंडेंस 100 फीसदी
नंदिनी के पिता चंडीगढ़ पुलिस में हेड कांस्टेबल हैं। नंदिनी के बड़े भाई लक्ष्य को भी रोज स्कूल जाने के लिए पहली, आठवीं व नौंवी में अवार्ड मिल चुका है। वह फिलहाल बीकॉम-1 का छात्र है। नंदिनी के माता-पिता का कहना है कि उन्होंने शुरू से ही घर में अनुशासन रखा। कभी बेवजह बच्चों को छुट्टी नहीं करने दी। बल्कि रोजाना स्कूल जाने के लिए प्रेरित किया, जिसका नतीजा है कि दोनों बच्चों को स्कूल में 100 फीसदी अटेंडेंस को लेकर सम्मानित किया गया। नंदिनी की मां ने बताया कि स्कूल जाने की वजह से वह अपने मामा की शादी में भी नहीं गईं।
नंदिनी के पिता चंडीगढ़ पुलिस में हेड कांस्टेबल हैं। नंदिनी के बड़े भाई लक्ष्य को भी रोज स्कूल जाने के लिए पहली, आठवीं व नौंवी में अवार्ड मिल चुका है। वह फिलहाल बीकॉम-1 का छात्र है। नंदिनी के माता-पिता का कहना है कि उन्होंने शुरू से ही घर में अनुशासन रखा। कभी बेवजह बच्चों को छुट्टी नहीं करने दी। बल्कि रोजाना स्कूल जाने के लिए प्रेरित किया, जिसका नतीजा है कि दोनों बच्चों को स्कूल में 100 फीसदी अटेंडेंस को लेकर सम्मानित किया गया। नंदिनी की मां ने बताया कि स्कूल जाने की वजह से वह अपने मामा की शादी में भी नहीं गईं।
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डेमो
- फोटो : डेमो
रोजाना स्कूल जाने का फायदा, रिजल्ट भी 90 फीसदी
नंदिनी का कहना है कि रोज स्कूल जाने का काफी फायदा हुआ। उनके नोट्स पूरे रहते हैं। कभी नोट्स के लिए किसी को फोन नहीं करना पड़ा, बल्कि दोस्त उन्हें कॉल कर नोट्स की मांग करते हैं। नंदिनी का रिजल्ट भी काफी अच्छा है। 7वीं में ए2, 8वीं में ए1, नौवीं में ए1 व दसवीं में नंदिनी के 8.2 सीजीपीए आए। नंदिनी उन सभी बच्चों के लिए मिसाल है जो स्कूल जाने से बचते हैं और स्कूल नहीं जाते। सभी बच्चों को नंदिनी से प्रेरणा लेनी चाहिए और कभी स्कूल मिस नहीं करना चाहिए।
नंदिनी का कहना है कि रोज स्कूल जाने का काफी फायदा हुआ। उनके नोट्स पूरे रहते हैं। कभी नोट्स के लिए किसी को फोन नहीं करना पड़ा, बल्कि दोस्त उन्हें कॉल कर नोट्स की मांग करते हैं। नंदिनी का रिजल्ट भी काफी अच्छा है। 7वीं में ए2, 8वीं में ए1, नौवीं में ए1 व दसवीं में नंदिनी के 8.2 सीजीपीए आए। नंदिनी उन सभी बच्चों के लिए मिसाल है जो स्कूल जाने से बचते हैं और स्कूल नहीं जाते। सभी बच्चों को नंदिनी से प्रेरणा लेनी चाहिए और कभी स्कूल मिस नहीं करना चाहिए।