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नेशनल हीरोः भारतीय सेना में भर्ती होकर देश सेवा नहीं कर पाए, तो ‘रक्त सेवा’ को बना लिया जुनून

Mon, 02 Sep 2019 02:52 PM IST
खुशबू गोयल सीमा एस आनंद, अमर उजाला, चंडीगढ़
सीमा एस आनंद, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 02 Sep 2019 02:52 PM IST
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Success Story of National Heroes Award Winner Rajender Garg, Blood Donation
राजेंद्र गर्ग - फोटो : अमर उजाला
नेशनल हीरोज अवार्ड से सम्मानित उस शख्स से मिलिए, जो भारतीय सेना में भर्ती होकर देश सेवा नहीं कर पाए तो उन्होंने रक्त सेवा को अपना जुनून बना लिया।
Success Story of National Heroes Award Winner Rajender Garg, Blood Donation
रक्तदान
राजेंद्र गर्ग, जिनका बचपन से सपना था कि एयरफोर्स में पायलट बनकर देश की सेवा कर सकूं, मगर परिवार ने उन्हें सेना में भर्ती होने की इजाजत नहीं दी। यही मलाल लेकर पढ़ाई पूरी की। इंडो-पाक युद्ध में 4 दिसंबर 1971 में देशभर में आह्वान किया गया कि युद्ध छिड़ चुका है और घायल फौजी भाइयों को रक्त की जरूरत है, इसलिए अधिक से अधिक लोग रक्तदान करें, ताकि घायल फौजियों के लिए खून की कमी न होने पाए।

 
Success Story of National Heroes Award Winner Rajender Garg, Blood Donation
रक्तदान
बस, तभी देश सेवा और जनसेवा करने का एक तरीका राजेंद्र गर्ग को सूझा और इसी दिन पहली बार घर वालों को बिना बताए घायल फौजी भाईयों के लिए उन्होंने रक्तदान किया। उसके बाद गर्ग ने इसी ‘रक्त सेवा’ को अपने जीवन का मकसद बना लिया। 66 वर्षीय राजेंद्र गर्ग आज तक 192 बार रक्तदान कर चुके हैं। उनकी इसी उत्कृष्ट सेवा के लिए उन्हें नेशनल हीरोज अवार्ड से नवाजा जा चुका है। हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने भी उन्हें गोल्ड मेडल से नवाजा है।
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Success Story of National Heroes Award Winner Rajender Garg, Blood Donation
रक्तदान
हरियाणा के अंबाला जिले से ताल्लुक रखने वाले राजेंद्र गर्ग ने चंडीगढ़ में ‘अमर उजाला’ से खास बातचीत में बताया कि उनका ‘रक्त सेवा’ करने का यह सिलसिला आज भी जारी है और वे निरंतर चंडीगढ़ पीजीआई, सेक्टर 32 अस्पताल व हरियाणा रेडक्रास सोसायटी से जुड़कर अपनी इस सेवा को आगे रखे हुए हैं। आज हरियाणा में राजेंद्र गर्ग रक्तदान क्षेत्र में एक मेंटर व ब्रांड एंबेसडर के रूप में भी काम कर रहे हैं।
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Success Story of National Heroes Award Winner Rajender Garg, Blood Donation
रक्तदान
इस क्षेत्र में राजेंद्र गर्ग के जुनून का आलम यह है कि वे अपने पूरी फैमिली को ही रक्तदाता परिवार बना चुके हैं। उनकी पत्नी सुचेता गर्ग 55 बार, बेटा राजन गर्ग 44 बार, पुत्रवधु राशि गर्ग 29 बार, बेटी नैना बंसल 22 बार और दामाद 7 बार कुल मिलाकर पूरा परिवार 349 बार रक्तदान कर चुका है। उन्होंने बताया कि पीजीआई के ब्लड बैंक के डायरेक्टर डॉ. जेजी जौली उनके प्रेरणा स्रोत हैं।
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