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देखिए, कैसे फर्श से अर्श तक पहुंचे साईकिलों के 'हीरो' मुंजाल

ब्यूरो/अमरउजाला, लुधियाना(पंजाब) Updated Fri, 14 Aug 2015 09:27 AM IST
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देखिए, कैसे फर्श से अर्श तक पहुंचे साईकिलों के 'हीरो' मुंजाल

tribute to business tycoon and hero founder OP munjal

साईकिलों के 'हीरो' और साइकिल उद्यमियों में बाबू जी के नाम से प्रसिद्ध ओम प्रकाश मुंजाल ने फर्श से अर्श तक का सफर तय किया। तस्वीरों में देखिए उनका अब तक का सफर।

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देखिए, कैसे फर्श से अर्श तक पहुंचे साईकिलों के 'हीरो' मुंजाल

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साइकिल उद्यमियों के बीच बाबू जी के नाम से प्रसिद्ध हीरो साइकिल्स लिमिटेड के संस्थापक ओम प्रकाश मुंजाल का वीरवार सुबह डीएमसी अस्पताल में निधन हो गया। वे 87 साल के थे। उनके का दुनिया देखने का नजरिया ही अलग था। वे अपने अंदाज में काम करते थे, इसी धुन में उन्होंने फर्श से अर्श तक का सफर तय किया। 26 अगस्त 1928 में कमालिया (पाकिस्तान) में जन्मे ओपी मुंजाल का परिवार दंगों के कारण 1944 में अमृतसर आ गया।

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अमृतसर में दफ्तर लेकर साइकिल पार्ट्स की सप्लाई का काम शुरू कर दिया। इस काम में सुकून नहीं मिला और दंगों के चलते परिवार लुधियाना आकर बस गया। मुंजाल चार भाइयों में सबसे छोटे थे। लुधियाना में साइकिल पार्ट्स के काम से साइकिल बनाने की फैक्टरी और फिर करोड़ों का औद्योगिक ग्रुप खड़ा करने वाले मुंजाल ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। जुलाई 2015 में 5.35 लाख साइकिल बेच कर हीरो ने नया रिकार्ड कायम किया।

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12 अगस्त को ही हीरो साइकिल्स ग्रुप ने इंग्लैंड की एवोसेट स्पोर्ट्स को खरीदा। इसी के साथ हीरो ने यूरोप में भी अपनी पकड़ मजबूत कर ली। हीरो साइकिल को विश्व में साइकिल के सबसे अधिक उत्पादन के लिए 1986 में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स से नवाजा गया। साईकिल उद्योग के बादशाह मुंजाल को दही भल्ले खाने का बेहद शौक था और काम में व्यस्त रहने के बावजूद मुंजाल क्रिकेट और फुटबाल के मैच देखने के लिए वक्त निकाल ही लेते थे। मुंजाल औद्योगिक के अलावा सामाजिक, धार्मिक के क्षेत्र में भी काफी सक्रिय रहे।

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बचपन से ही शायरी मुंजाल के जीवन का हिस्सा बन गई थी। घर से लेकर बाहर तक मुंजाल ने अपने आसपास जो भी देखा उसे शायराना अंदाज में लफ्जों में पिरो दिया। खुद अपनी और पूरे परिवार की जिंदगी के ताने बाने पर मुंजाल ने करीब 21 साल की उम्र में कविता वाले अंदाज में एक कहानी ‘कौन है मुंजाल’ लिखी थी। मुंजाल का बात करने का शायराना अंदाज सामने वाले को उनका कायल बना देता था।

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