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शादी हुई पढ़ाई छूटी, एक पैर से दिव्यांग, पर हिम्मत नहीं हारी और बन गई पहली महिला बस कंडक्टर

Mon, 29 Oct 2018 03:20 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रेवाड़ी(हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रेवाड़ी(हरियाणा) Updated Mon, 29 Oct 2018 03:20 PM IST
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Two daughters Mother Sharmila Becomes Haryana Roadways Bus First Lady Conductor
पहली महिला बस कंडक्टर शर्मिला
शादी के चलते पढ़ाई छूट गई, 12वीं भी नहीं हुई। एक पैर से दिव्यांग हैं, पर हिम्मत नहीं हारी और दो बेटियों की परवरिश के लिए बन गई पहली महिला रोडवेज बस कंडक्टर।
Two daughters Mother Sharmila Becomes Haryana Roadways Bus First Lady Conductor
पहली महिला बस कंडक्टर शर्मिला
हम बात कर रहे हैं हरियाणा रोडवेज की पहली महिला कंडक्टर रेवाड़ी की 32 वर्षीय शर्मिला की, जिन्हें 8 साल के लंबे संघर्ष के बाद नौकरी मिली। गांव घुड़कावास की रहने वाली शर्मिला एक पैर से 40 प्रतिशत दिव्यांग हैं, उसके बावजूद उन्होंने नौकरी स्वीकारी और ज्वॉइन भी कर ली।
Two daughters Mother Sharmila Becomes Haryana Roadways Bus First Lady Conductor
पहली महिला बस कंडक्टर शर्मिला
शर्मिला बताती हैं कि उनकी दो बेटियां हैं। पति भी बेरोजगार है, इसलिए घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। यह सब देखते हुए उन्होंने नौकरी करने का फैसला है। शर्मिला कहती हैं कि 2007 में उनकी शादी हो गई थी और इस वजह से वे 12वीं भी नहीं कर पाई थी। इस बात का मलाल उन्हें हमेशा रहेगा, लेकिन वे बेटियों को पढ़ाएंगी।
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Two daughters Mother Sharmila Becomes Haryana Roadways Bus First Lady Conductor
पहली महिला बस कंडक्टर शर्मिला
शर्मिला कहती हैं कि एक सफर के दौरान उन्होंने महिला बस कंडक्टर को देखा। उससे बातचीत करते हुए पता चला कि वह 10वीं पास है और पक्की नौकरी पर है। यह सुनकर शर्मिला ने फैसला किया कि वह भी नौकरी करेगी, चाहे बस कंडक्टर की ही सही। फिर उन्होंने रेडक्रॉस से फर्स्ट एड लाइसेंस लिया। वैकेंसी निकली तो अप्लाई कर दिया, किस्मत से सूची में नाम भी आ गया।
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Two daughters Mother Sharmila Becomes Haryana Roadways Bus First Lady Conductor
पहली महिला बस कंडक्टर शर्मिला
शर्मिला ने फिलहाल रेवाड़ी डिपो में ही ज्वॉइन किया है और वे बहुत खुश हैं। शर्मिला बताती हैं कि पहले दिन ही उन्हें कार्यक्षेत्र में काफी सहयोग और प्रशंसा मिली। लोग भी उनका समर्थन कर रहे हैं, उन्हें प्रोत्साहित कर रहे हैं। मैं हरियाणा की पहली महिला बस कंडक्टर हूं और यह सम्मान पाकर मेरा सिर गर्व से ऊंचा हो गया है।
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