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क्या DRS कैप्टन कोहली का साथ नहीं दे रहा? 

Tue, 28 Feb 2017 04:17 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 28 Feb 2017 04:17 PM IST
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Is DRS is not working in favour of captain Virat Kohli?
विराट कोहली
भारत ने पिछले साल इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की सीरीज से डीआरएस यानी डिसीजन रिव्यू सिस्टम का उपयोग करना शुरू किया। उसके बाद से अब तक सात टेस्ट मैचों में डीआरएस भारत के पक्ष में नहीं गया है। जबकि विराट कोहली ने इसके उपयोग करने को रॉकेट साइंस जैसा जटिल नहीं माना था। मौखिक तौर पर डीआरएस के उपयोग का विराट समर्थन करते रहे हैं। लेकिन यह टीम इंडिया या कहें कप्तान कोहली के फेवर में नहीं गया है।पिछले 7 टेस्ट मैच में डीआरएस के लगभग 70  प्रतिशत फैसले टीम इंडिया के विरोध में गए हैं। 

क्या DRS कैप्टन कोहली का साथ नहीं दे रहा? 

Is DRS is not working in favour of captain Virat Kohli?
विराट कोहली
इंग्लैंड के खिलाफ राजकोट में खेले गए पहले टेस्ट से पुणे में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए टेस्ट मैच तक भारत ने 7 मैचों में 55 बार डीआरएस का उपयोग किया लेकिन उनमें से केवल 17 बार फैसला भारतीय टीम के पक्ष में गया। भारतीय टीम ने डीआरएस का उपयोग ज्यादातर फील्डिंग करते हुए किया। फील्डिंग करते हुए भारत 42 रैफरल में से केवल 10 उनके पक्ष में गए। बल्लेबाजी के दौरान भारतीय बल्लेबाजों ने 7 मैचों में 13 बार अंपायर के फैसले को चुनौती दी, जिसमें से 7 बार वह उनके पक्ष में गया। बल्लेबाजी करते वक्त डीआरएस 53.84 प्रतिशत टीम इंडिया के लिए सफल साबित हुआ है। 

क्या DRS कैप्टन कोहली का साथ नहीं दे रहा? 

Is DRS is not working in favour of captain Virat Kohli?
विराट कोहली
टीम इंडिया की कप्तानी करते हुए महेंद्र सिंह धोनी ने डीआरएस का विरोध किया था। इसमें उनके साथ बीसीसीआई के अध्यक्ष एन श्रीनिवासन भी थे। अनुराग ठाकुर के बीसीसीआई की कमान संभालने के बाद भारत डीआरएस के इस्तेमाल पर राजी हुआ। 
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क्या DRS कैप्टन कोहली का साथ नहीं दे रहा? 

Is DRS is not working in favour of captain Virat Kohli?
डिसीजन रिव्यू - फोटो : Bcci
भारतीय खिलाड़ी  बल्लेबाज डीआरएस के इस्तेमाल के दौरान भावनात्मक रुख अपनाते हैं। यह सही नहीं है। जैसा पुणे टेस्ट में देखने को मिला। पुणे टेस्ट की पहली पारी में भारत के सलामी बल्लेबाज केएल राहुल और मुरली विजय ने शुरुआती 6 ओवर में ही मिलने वाले 2 रिव्यू खराब कर दिए।बल्लेबाजी के दौरान डीआरएस का उपयोग बल्लेबाजों पर निर्भर करता है। दूसरे छोर पर खड़ा बल्लेबाज लगातार गेंद पर नजर बनाए रखता है इस वजह से बल्लेबाजी के दौरान डीआरएस के फैसले भारत के पक्ष में ज्यादा गए।
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क्या DRS कैप्टन कोहली का साथ नहीं दे रहा? 

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भारतीय क्रिकेट टीम
फील्डिंग के दौरान डीआरएस का अंतिम निर्णय कप्तान पर निर्भर करता है। लेकिन इसके लिए कप्तान को विकेट कीपर के साथ-साथ पिच के करीब खड़े फील्डरों के साथ-साथ गेंदबाज से भी सलाह लेनी होती है। यहीं सारी समस्या खड़ी हो जाती है। वास्तविक स्थिति क्या है, गेंद की लाइन क्या है, गेंद बल्ले पर लगी या नहीं। इन बातों पर गौर किए बगैर निर्णय ले लिए जाते हैं। खासकर एलबीडब्ल्यू के निर्णय में गेंद की लाइन का बहुत महत्व होता है। गेंद ने कहां टिप्पा लिया। गेंद किस दिशा में स्पिन होकर जा रही है। इसका निर्णय गेंदबाज और विकेटकीपर पर सबसे ज्यादा निर्भर करता है। लेकिन साहा कप्तान के सामने अपनी बात मजबूती से रखने में असफल रहे हैं। इसी वजह से भी अधिकांश रैफरल टीम इंडिया के खिलाफ गए हैं।
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