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सचिन तेंदुलकर का विदाई भाषण: जब मास्टर-ब्लास्टर के साथ रोया था पूरा देश
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Updated Fri, 16 Nov 2018 06:07 PM IST
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5 साल पहले आज ही के दिन सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट से संन्यास लिया था। जहां से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी उसी ग्राउंड पर अपने परिवार और घरेलू दर्शकों के बीच क्रिकेट छोड़ा।
सचिन के खेल और उनके करियर की बातें हमेशा होती रहती हैं, इसलिए आज हम उनकी फेयरवेल स्पीच की बात करेंगे, जिसने पूरी दुनिया की आंखें नम कर दी थी।
मास्टर ब्लास्टर जब आखिरी बार मैदान पर उतरे तो उन्होंने 22 यार्ड की उस पिच को झुककर सलाम किया। सचिन की विदाई स्पीच में कहे गए एक-एक शब्द ने लोगों के दिल को छुआ था।
वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरा और आखिरी मैच खत्म होने के बाद रवि शास्त्री ने उनसे सवाल पूछने के बजाय, उन्हें ही माइक सौंप दिया। आगे सचिन का विदाई भाषण...
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दोस्तों प्लीज बैठ जाइए, मैं और भावुक हो जाऊंगा। पूरी जिंदगी मैंने यहीं बिताई है, यह सोचना मुश्किल है कि मेरे इस शानदार सफर का अंत हो रहा है। यूं तो मैं पढ़कर बोलना पसंद नहीं करता, लेकिन आज मैंने एक लिस्ट तैयार की है कि मुझे किन लोगों का धन्यवाद करना है।
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सबसे पहले मेरे पिता का नाम आता है, जिनकी मृत्यु 1999 में हो गई थी। उनकी सीख के बिना मैं आपके सामने खड़ा ना हो पाता। उन्होंने कहा था - अपने सपनों के पीछे भागो, राह मुश्किल होगी, लेकिन कभी हार मत मानना। आज मैं उनको बहुत मिस कर रहा हूं। मेरी मां, मुझे नहीं पता कि मेरे जैसे शैतान बच्चे को उन्होंने कैसे संभाला। मैंने जब से क्रिकेट शुरू किया है, तब से उन्होंने सिर्फ और सिर्फ प्रार्थना की है मेरे लिए।
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स्कूल घर से दूर होने की वजह से मैं चार साल तक अपने अंकल-आंटी के यहां रहा। उन्होंने मुझे अपने बेटे की तरह संभाला। मेरे बड़े भाई नितिन ज्यादा बोलना पसंद नहीं करते, लेकिन उन्होंने मुझे इतना जरूर कहा- 'मुझे पता है कि तुम जो भी करोगे, उसमें 100 प्रतिशत ही दोगे।' मेरा पहला बल्ला मेरे बहन सविता ने मुझे गिफ्ट किया था। जब मैं बल्लेबाजी कर रहा होता हूं तो वो आज भी मेरे लिए व्रत रखती हैं।
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मेरा भाई अजीत, उनके बारे में मैं क्या कहूं। हमने इस सपने को साथ जिया था। उन्होंने मेरे लिए अपना करियर दांव पर लगा दिया। वो ही पहली बार मुझे मेरे पहले कोच रमाकांत आचरेकर के पास ले गए। पिछली रात भी मेरे विकेट को लेकर उन्होंने फोन पर मुझसे बात की। जब मैं नहीं खेल रहा होता हूं तब भी हम खेलने की तकनीक पर बात कर रहे होते हैं। अगर वो नहीं होते तो आज मैं क्रिकेटर ना होता।
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