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Valentine Day Special: करियर दांव पर लगाकर पत्नी के सपनों को दी उड़ान, अब प्यार की ताकत से फिर मैदान पर वापसी

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Mayank Tripathi Updated Sat, 14 Feb 2026 12:00 AM IST
सार

Valentine Day 2026 Special: जिम्बाब्वे के पूर्व कप्तान ग्रीम क्रीमर ने पत्नी के पायलट बनने के सपने को पूरा करने के लिए अपने अंतरराष्ट्रीय करियर पर ब्रेक लगा दिया और दुबई में परिवार संभाला। अब उन्होंने मोहब्बत और जिम्मेदारी की ताकत के साथ मैदान में वापसी कर ली है। आइये उनकी कहानी जानते हैं...

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Valentine Day Special: Graeme Cremer wife Merna love story returning back in world cup
ग्रीम क्रीमर और उनका परिवार - फोटो : graemecremer30 (instagram)
वैलेंटाइन डे पर अक्सर प्यार के वादों और तोहफों की बातें होती हैं, लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो साबित करती हैं कि सच्चा प्यार सिर्फ शब्दों में नहीं, फैसलों में दिखता है। यह कहानी है जिम्बाब्वे के पूर्व कप्तान ग्रीम क्रीमर की जिन्होंने अपनी पत्नी के सपनों को पंख देने के लिए अपने करियर को खुद रोक दिया। यह कहानी उस खिलाड़ी की है जिसने अपने देश की कप्तानी संभाली, 200 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय विकेट लिए, लेकिन जब पत्नी के सपनों और अपने करियर के बीच चुनाव का वक्त आया, तो उसने बिना हिचक पत्नी का साथ चुना।
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Valentine Day Special: Graeme Cremer wife Merna love story returning back in world cup
ग्रीम क्रीमर - फोटो : graemecremer30 (instagram)

जब कप्तान ने खुद को 'रिटायर' नहीं, 'रोक' लिया

क्रीमर जिम्बाब्वे क्रिकेट के अहम दौर में टीम की कमान संभाल रहे थे। लेकिन इसी बीच उनकी पत्नी मेरना को दुबई की बड़ी एयरलाइन एमिरेट्स में बोइंग 777 पायलट की नौकरी का ऑफर मिला। यह वही कंपनी थी जहां मेरना ने करीब 10 साल पहले आवेदन किया था। यह उनके लिए सिर्फ नौकरी नहीं, बचपन का सपना था। छह साल की उम्र में वह हरारे एयरपोर्ट पर खड़े होकर जहाजों को देखा करती थीं। अब वही लड़की अंतरराष्ट्रीय उड़ान भरने जा रही थी। क्रीमर बताते हैं कि शुरुआत में उन्होंने सोचा था कि दुबई से आना-जाना करके देश के लिए खेलते रहेंगे। लेकिन जल्द ही हकीकत सामने आ गई।

उन्होंने कहा, 'मैंने सोचा था कि दुबई से आना-जाना कर लूंगा, लेकिन जब दो छोटे बच्चों जिनकी उम्र छह और तीन साल थी। उनको देखा तो समझ आ गया कि यह मुमकिन नहीं है। दुबई पहुंचने के बाद ही मुझे फैसला लेना पड़ा। क्रिकेट याद आता था, लेकिन उस वक्त परिवार ज्यादा जरूरी था।' यह कोई मजबूरी नहीं थी, यह मोहब्बत का फैसला था।
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ग्रीम क्रीमर और उनके बच्चे - फोटो : graemecremer30 (instagram)

जब पति बना 'फुल-टाइम पिता'

दुबई में मेरना उड़ान भर रही थीं और क्रीमर घर संभाल रहे थे। बच्चों की पढ़ाई, दिनचर्या, परिवार सबकी जिम्मेदारी उन्होंने अपने कंधों पर ली। मेरना ने उस फैसले पर कहा था, 'लोग हैरान थे कि उन्होंने अपने करियर के चरम पर क्रिकेट छोड़ दिया, लेकिन मुझे बिल्कुल हैरानी नहीं हुई। वो पहले एक शानदार पति और पिता हैं, फिर क्रिकेटर।'

क्रिकेट से दूरी के दौरान क्रीमर ने राजस्थान रॉयल्स अकादमी में कोचिंग शुरू की। वहां बच्चों से लेकर बड़ों तक को ट्रेनिंग देते हुए उन्हें खेल को नए नजरिए से समझने का मौका मिला। उन्होंने कहा, 'कोचिंग ने मुझे सिखाया कि अलग-अलग स्वभाव के खिलाड़ियों को संभालना कितना मुश्किल होता है। इससे मुझे अपने खेल को बुनियादी स्तर पर समझने में मदद मिली।'
Valentine Day Special: Graeme Cremer wife Merna love story returning back in world cup
ग्रीम क्रीमर और उनके बच्चे - फोटो : graemecremer30 (instagram)

दोस्त का फोन और दिल की हलचल

समय बीता। बच्चे बड़े हुए। और फिर एक दिन पुराने साथी ब्रैंडन टेलर का फोन आया। टेलर खुद वापसी की तैयारी कर रहे थे और उन्होंने क्रीमर से कहा कि अगर दिल में अभी भी आग है, तो लौटने का वक्त है। क्रीमर कहते हैं, 'ब्रैंडन ने कहा कि उसके पास एक या दो साल बचे हैं खेलने के लिए। हम लगभग एक ही उम्र के हैं। उसकी बात ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया।' उन्होंने जिम्बाब्वे क्रिकेट के मैनेजिंग डायरेक्टर गिवमोर मैकोनी से मुलाकात की। उन्हें साफ कहा गया सीधे राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं मिलेगी, पहले घरेलू क्रिकेट में खुद को साबित करना होगा।
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ग्रीम क्रीमर - फोटो : graemecremer30 (instagram)

12 मैच, 40 विकेट और वापसी की दस्तक

नेशनल प्रीमियर लीग में क्रीमर ने 12 मैचों में 40 विकेट लेकर दिखा दिया कि जुनून अभी जिंदा है। क्रीमर कहते हैं, 'इस टूर्नामेंट ने मुझे भरोसा दिलाया कि मैं अब भी खेल सकता हूं। अभी लंबा रास्ता तय करना है, लेकिन वो आग अब भी अंदर है।' वापसी के बाद उन्होंने माना कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की तीव्रता अलग होती है। उन्होंने कहा, 'मैं बदल गया हूं, लेकिन खेल की तीव्रता वैसी ही है। स्किल भी है, भूख भी है बस फिर से उस स्तर की आदत डालनी है।'
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