भारत को विश्व कप में रोस बॉउल में पांच जून को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपने अभियान की शुरूआत करनी है और ट्रेंट ब्रिज में उसे न्यूजीलैंड के खिलाफ खेलना है। ये दोनों वह स्टेडियम हैं जहां की फ्लैट पिचों पर हालिया इंग्लैंड-पाकिस्तान श्रृंखला में रनों की जबरदस्त बरसात हुई है। दोनों पिचों पर 24 विकेटों के नुकसान पर 1415 रनों का अंबार लगा। इस श्रृंखला में उम्मीदों से बढ़कर बन रहे रनों ने विशेषज्ञों और दिग्गजों को भी दो बार सोचने पर मजबूर कर दिया है। यही कारण है कि टीम इंडिया में शामिल कलाई के स्पिनर कुलदीप यादव और युजवेंदर चहल चर्चाओं के मुख्य केंद्र में आ खड़े हुए हैं। 2011 का विश्व कप जीतने वाली महेंद्र सिंह धोनी की टीम के सदस्य कलाई के लेग स्पिनर पीयूष चावला छूटते ही बोलते हैं इस विश्व कप में कुलदीप और चहल (कुलचा) की जोड़ी अहम किरदार निभाने वाली है।
आखिर क्यों खतरनाक है 'कुलचा', विश्व कप में कैसे बिगाड़ेगा विरोधियों का हाजमा?
फ्लैट विकेट पर आक्रामक स्पिनर अहम
फ्लैट विकेट पर गेंदबाजी किसी भी गेंदबाज के लिए बुरा सपना होता है, लेकिन हालिया समय में कुलदीप और चहल इसका अपवाद रहे हैं। दोनों ने पाटा भारतीय पिचों पर बीच के ओवरों में विराट कोहली को अहम मौकों पर विकेट दिए हैं। प्रवीण कुमार की तरह पीयूष को भी लगता है कि इस विश्व कप में फ्लैट विकेट देखने को मिलेंगे। ऐसी पिचों पर वही गेंदबाज सफल होता है जिसे पिटाई से डर नहीं लगे और आक्रामक सोच के साथ उसकी निगाह विकेट लेने पर लगी रहे। कुलदीप और चहल दोनों ही ऐसे गेंदबाज हैं। चौके-छक्के खाने से उनके कंधे कभी नहीं झुकते हैं। दोनों विविधिताओं से भरे हुए हैं और उनकी हमेशा निगाह विकेट लेने पर रहती है। फिर फ्लैट विकेटों पर विकेट लेने वाला गेंदबाज कप्तान के लिए अहम होता है। यही कारण है दोनों विश्व कप में अहम भूमिका निभाएंगे।
कप्तान की सोच और धोनी का निर्देश बढ़ाएगी धार
किसी भी गेंदबाज को अगर यह पता हो कि उसका कप्तान उस पर बेहद विश्वास करता है तो उसकी रंगत बदल जाती है। कुलदीप और चहल की प्रतिभा पर विराट को पूरा भरोसा है और दोनों ये बात जानते हैं तभी उनका सर्वश्रेष्ठ भी आ रहा है। पीयूष साफ करते हैं कि दोनों की सफलता में विराट की आक्रामक सोच और धोनी के दिशा निर्देशों का बड़ा हाथ है। गेंदबाज को अगर यह पता लगा जाए कि कप्तान विकेट के लिए जुआ खेल सकता है और आक्रामक फील्डिंग सजा सकता है तो इसमें उसे बहुत मजा आता है। वह खुद इस तरह की पहल पसंद करते थे। बड़ी बात यह है कि दोनों ही गेंदबाज निडर हैं। उनमें किसी तरह का डर नहीं है और यही उन्हें खास बनाती है।
मानसिक रूप से बेहद मजबूत हुए हैं दोनों
पीयूष चावला मानते हैं दोनों मानसिक रुप से कुछ सालों में बेहद मजबूत हुए हैं। उनका विश्वास भी काफी बढ़ गया है और यह सब कप्तान के भरोसे पर होता है। दोनों की सफलता में विराट और धोनी की अहम भूमिका है। यही कारण है कि उन्हें लगता है कि विश्व कप में तीन पेसरों के साथ यही दोनों स्पिनर खेलेंगे। रवींद्र जडेजा को कम मौका मिलेगा।
कुलदीप और चहल साथ-साथ
कुलदीप- मैच 28, विकेट 60, औसत 19.98, सर्वश्रेष्ठ 6-25, स्ट्राइक रेट 24.2, इकोनॉमी 4.95
चहल- मैच 28, विकेट 43, औसत 28.41, सर्वश्रेष्ठ 5-22, स्ट्राइक रेट 33.7, इकोनॉमी 5.04
कुलदीप यादव का वन डे रिकार्ड
मैच 44 विकेट 87 औसत 21.74 सर्वश्रेष्ठ 6-25 स्ट्राइक रेट 26.4 इकोनॉमी 4.93
कुलदीप इंग्लैंड में
मैच तीन विकेट नौ औसत 16.44 सर्वश्रेष्ठ 6-25 स्ट्राइक रेट 20 इकोनॉमी 4.93
युजवेंद्र चहल का वन डे रिकार्ड
मैच 41 विकेट 72 औसत 24.61 सर्वश्रेष्ठ 6-42 स्ट्राइक रेट 30.1 स्ट्राइक रेट 4.89
चहल इंग्लैंड में
मैच तीन विकेट दो सर्वश्रेष्ठ 1-43 औसत 67.5 स्ट्राइक रेट 90 इकोनॉमी 4.5