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शिवरामकृष्णन: भारत से ज्यादा वेस्टइंडीज के ड्रेसिंग रूम में क्यों दिखते थे? नस्लीय भेदभाव से जुड़े तार, जानें

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: Swapnil Shashank Updated Wed, 25 Mar 2026 03:33 PM IST
सार

लक्ष्मण शिवरामकृष्णन का यह अनुभव दर्शाता है कि कैसे रंगभेद एक व्यक्ति के आत्म-सम्मान और अपनेपन की भावना को प्रभावित कर सकते हैं। उन्हें वेस्टइंडीज के खिलाड़ियों ने सम्मान और दोस्ती दी, जिसने उन्हें सुकून का एहसास कराया।

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Laxman Sivaramakrishnan spent more time in West Indies dressing room than India in 1983 tour; Know Why?
लक्ष्मण शिवरामकृष्णन - फोटो : Twitter
भारतीय क्रिकेट के पूर्व लेग-स्पिनर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने हाल ही में अपने करियर के उन पहलुओं को उजागर किया है, जिन्होंने उन्हें भारत के बजाय वेस्टइंडीज के ड्रेसिंग रूम में अधिक सहज महसूस कराया। 1983 में एंटीगुआ में शिवरामकृष्णन ने टेस्ट डेब्यू किया था। उन्होंने बताया कि डेब्यू से पहले वह पाकिस्तान दौरे पर टीम का हिस्सा रहे थे, लेकिन खेलने को नहीं मिला था। हालांकि, पाकिस्तान में उन्हें त्वचा के रंग के कारण कुछ खराब अनुभवों का सामना किया था। इन कड़वी यादों के विपरीत, वेस्टइंडीज के खिलाड़ियों ने उनके साथ जिस तरह का व्यवहार किया, वह उनके लिए सुकूनदायक साबित हुआ। शिवरामकृष्णन ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में नस्लीय भेदभाव को लेकर अपने बयान से तहलका मचा दिया है। उन्होंने कई गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा कि इसकी वजह से उन्हें मानसिक तनाव झेलनी पड़ी।

 

Racism in Cricket: भारत के पूर्व क्रिकेटर का बड़ा आरोप, बोले- भारतीय खिलाड़ी ही मुझ पर करते थे नस्लीय टिप्पणी

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लक्ष्मण शिवरामाकृष्णन - फोटो : Twitter
वेस्टइंडीज में अपनेपन का एहसास
शिवरामकृष्णन ने बताया कि वेस्टइंडीज दौरे पर, जहां हर किसी की त्वचा का रंग कुछ गहरा था, वह खुद को अधिक सहज महसूस करते थे। उन्होंने कहा, 'हर किसी की त्वचा का रंग गहरा था। वे बहुत खुशमिजाज लोग थे।' पूर्व लेग-स्पिनर ने याद किया कि कैसे मैल्कम मार्शल और डेसमंड हेन्स जैसे दिग्गज खिलाड़ी टेस्ट सीरीज के दौरान उन्हें बाहर ले जाया करते थे।
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Laxman Sivaramakrishnan spent more time in West Indies dressing room than India in 1983 tour; Know Why?
व्हाइट जर्सी में लक्ष्मण शिवरामकृष्णन और कमेंट्री करते हुए भी; साथ में गावस्कर और मुरली - फोटो : Twitter
उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, 'वेस्टइंडीज में मेरे साथ विपक्षी खिलाड़ियों द्वारा भी बहुत अच्छा व्यवहार किया गया, वास्तव में मेरे सबसे अच्छे दोस्त डेसमंड हेन्स और दिवंगत मैल्कम मार्शल थे, वे लगभग हर शाम मुझे बाहर ले जाते थे। जब टेस्ट मैच चल रहे होते थे, तो मैं शायद कपड़ों का एक सेट बदल लेता था और मैदान पर ही नहा लेता था और अनुमति लेकर चला जाता था।' मार्शल और हेन्स ने टेस्ट सीरीज के दौरान लगभग हर शाम उन्हें बाहर घुमाया। उन्होंने उन्हें जमैका, त्रिनिदाद, बारबाडोस जैसी जगहों की सैर कराई। वह मार्शल के घर भी गए और पुराने वेस्टइंडीज मैचों के फुटेज देखे, जिसमें कॉलिन क्रॉफ्ट की गेंदबाजी का आनंद लिया।
 

एल. शिवरामकृष्णन का दर्दनाक अनुभव: कैसे लगी थी शराब की लत, क्यों बोले- नींद खुलती थी तो लगता था कि मर जाऊंगा?

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लक्ष्मण शिवरामाकृष्णन - फोटो : Twitter
समान अनुभवों से बनी दोस्ती
शिवरामकृष्णन ने यह भी बताया कि गॉर्डन ग्रीनिज, जो शायद ही किसी से बात करते थे, यहां तक कि अपने साथियों से भी नहीं, उनसे खुलकर बात करते थे। ग्रीनिज ने व्यक्तिगत रूप से शिवरामकृष्णन को बताया था कि उन्होंने इंग्लैंड में क्या सहा था और इसी कारण वे अपने काम से काम रखते थे, क्रिकेट खेलते थे और चले जाते थे। यह उन दो गहरे रंग के क्रिकेटरों के बीच एक अनूठी बॉन्डिंग थी, जिन्होंने विभिन्न महाद्वीपों से होने के बावजूद, एक ही तरह के दर्द को साझा किया।
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लक्ष्मण शिवरामाकृष्णन - फोटो : Twitter
ड्रेसिंग रूम में बिताया गया समय
शिवरामकृष्णन ने अपना अधिकांश समय वेस्टइंडीज के ड्रेसिंग रूम में बिताया। दोपहर के भोजन के दौरान, वे अंदर जाते, क्लाइव लॉयड को नमस्ते कहते, जो बस सिर हिला देते थे और हेन्स, होल्डिंग या एंडी रॉबर्ट्स के साथ बैठते थे। गावस्कर भी इस बात से चकित थे कि रॉबर्ट्स, जो कभी किसी से बात नहीं करते थे, उस युवा खिलाड़ी से बातचीत करते थे। पाकिस्तान दौरे पर भारतीय टीम का हिस्सा रहने के बाद, शिवरामकृष्णन ने 17 साल की उम्र में एंटीगुआ में अपना टेस्ट डेब्यू किया था। वह तब भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने थे।
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