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...और अधूरी रह गई थी मिसाइलमैन कलाम की ये 'अनोखी' तमन्ना

Sun, 15 Oct 2017 06:25 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 15 Oct 2017 06:25 PM IST
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abdul kalam last wish before his death for Mountainous land
apj abdul kalam

मिसाइलमैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम पहाड़ में इस एक बदलाव को देखना चाहते थे। इसलिए उन्होंने एक योजना भी तैयार की थी। लेकिन उनकी ये योजना अधूरी ही रह गई।

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16 अक्तूबर 1993 को डॉ. कलाम तत्कालीन थल सेनाध्यक्ष जनरल बीसी जोशी के साथ पिथौरागढ़ आए थे। तब डॉ. कलाम डीआरडीओ में वैज्ञानिक थे। उसके बाद वह 7 मई 1997 को पिथौरागढ़ स्थित रक्षा कृषि अनुसंधान प्रयोगशाला के निरीक्षण के लिए आए थे।

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mountains

तब उनकी वरिष्ठ पत्रकार बीडी कसनियाल के साथ विस्तार से बातचीत हुई। डॉ. कलाम पहाड़ में कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बड़ी सोच रखते थे। उन्होंने तब रक्षा कृषि अनुसंधानशाला के वैज्ञानिकों को लैब टू लैंड का विचार दिया था।

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- फोटो : अमर उजाला

श्री कसनियाल ने बताया कि डॉ. कलाम उबड़-खाबड़ पहाड़ों में भी फसल उगाने का विचार रखते थे। वह चाहते थे कि पहाड़ों के ढलानों को भी खेती के लायक बनाया जा सकता है और इनका उपयोग हो सकता है। डॉ. कलाम को सिकुड़ती जा रही कृषि योग्य जमीन को लेकर गंभीर चिंता थी।

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डॉ. कलाम कहते थे कि कृषि योग्य जमीन पर तो शहर बसने लगे हैं। अब ऐसी जमीन को खेती के उपयोग में लाया जा सकता है, जिसका अब तक किसी भी रूप में कोई इस्तेमाल ही नहीं हुआ है। यह बात अलग है कि पहाड़ की पथरीली और ढलान वाली जमीन में खेती करने की दिशा में अब तक कोई पहल नहीं हो पाई है।

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