उत्तराखंड में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर शिक्षकों की नियुक्तियों के मामले की विजिलेंस से जांच कराने की सिफारिश के बाद शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने दावा किया है कि सीबीआई से इसकी जांच कराई जाएगी।
उत्तराखंड के फर्जी टीचरों पर गिरेगी गाज, सरकार उठाने जा रही है बड़ा कदम
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शिक्षा मंत्री ने कहा कि फर्जीवाड़े में कहीं न कहीं शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों की भी मिलीभगत है। यह अधिकारी भी जांच के दायरे में आएंगे। उन्होंने अपने अनुमोदन के बाद फाइल मुख्यमंत्री को भेज दी।
फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर टीचरों की नियुक्तियों के कई मामले सामने आ चुके हैं। अमर उजाला इस मामले को लगातार प्रमुखता से उठा रहा है। शासन ने मामले की जांच विजिलेंस, विशेष अंवेषण टीम या सीबीआई से कराने की सिफारिश की थी। अपर मुख्य सचिव की ओर से शिक्षा मंत्री को भेजी शासन की पत्रावली में कहा गया है कि शासन के पास लगातार ऐसी शिकायतें पहुंच रही हैं कि कुछ शिक्षकों की पहचान फर्जी है या वे किसी दूसरे के प्रमाणपत्रों पर नौकरी पा गए हैं। इनमें से 34 मामले ऐसे हैं जिनमें जांच में शिकायत सही पाए जाने पर शिक्षकों को बर्खास्त किया जा चुका है।
क्योंकि इस तरह की शिकायतें बड़ी संख्या में हैं, इसलिए शिक्षा विभाग के स्तर से इनकी जांच में बहुत अधिक समय लग रहा है। कई पहलू अनदेखे भी रह जा रहे हैं। जिन मामलों में बर्खास्तगी की कार्यवाही की गई है, उनमें आपराधिक उत्तरदायित्व के लिए आईपीसी, सीआरपीसी के अंतर्गत दोषी शिक्षकों के अलावा उनको नियुक्त करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्यवाही की जानी चाहिए।
इन समस्त शिक्षकों की शिकायतों की जांच सतर्कता विभाग, विशेष अंवेषण टीम या सीबीआई के माध्यम से कराए जाने पर विचार किया जाए। पत्रावली में कहा गया है कि एक बार सभी शिक्षकों के मूल प्रमाण पत्रों की जांच जरूरी है। शिक्षामंत्री ने शासन की सिफारिश को अनुमोदित कर फाइल मुख्यमंत्री को भेज दी है।