भूकंप को लेकर अब वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ती जा रही है। लगातार सामने आ रहे आंकड़ों को देखते हुए वैज्ञानिक ही नहीं सरकार भी परेशान हो रही है।
यहां तीन साल में आ चुके इतने भूकंप कि अब बढ़ रही वैज्ञानिकों की चिंता, मिल रहे बड़े खतरे के संकेत
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राज्यपाल डॉ.कृष्णकांत पाल ने कहा कि राज्य में कम तीव्रता के लगातार आने वाले भूकंप चिंता का विषय हैं। प्रदेश में तीन साल में 52 बार हल्के भूकंप आए हैं, यह भूकंप खासतौर पर चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जिले में आएहैं। इन भूकंप से कोई नुकसान नहीं हुआ है, जिससे संतुष्ट होने की जरूरत नहीं है बल्कि हिमालय के अंदर क्या चल रहा है, उसे गहनता से जानने की जरूरत है। इसके लेकर वैज्ञानिक भी चिंतित हैं।
राज्यपाल डॉ.पाल ने यह चिंता वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान में हिमालयी संदर्भ में ‘पृथ्वी प्रणाली विज्ञान में प्रगति और चुनौतियां’ विषय पर शुरू हुए राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के दौरान व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जलसंरक्षण को लेकर और प्रयास करने की जरूरत है। खेती में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल करना होगा, जिसमें कम पानी का इस्तेमाल कर ज्यादा उत्पादन प्राप्त किया जा सके। डॉ.पाल ने कहा कि ग्लेशियरों का पिघलना और नदियों का प्रदूषण भी चिंता का विषय है।
विशिष्ट अतिथि जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि शोध संस्थान केवल रिसर्च कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेते हैं, लेकिन उनको देखना होगा कि शोध कार्यों से जनता को कितना लाभ हुआ है। तमाम शोध संस्थानों के कार्यों के बाद भी देश में 10 गुना सूखा और आठ गुना बाढ़ की घटनाओं का बढ़ जाना चिंताजनक है। शोध को लाभ के लिए नहीं बल्कि ‘शुभ’ के भाव से करने की जरूरत है।
कार्यक्रम में कार्यवाहक निदेशक डॉ.मीरा तिवारी ने मुख्य और विशिष्ट अतिथि को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। इससे पूर्व मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि ने कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन कर किया। डॉ.प्रदीप श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। द्वितीय सत्र में तकनीकी सत्र प्रारंभ हुआ। इस दौरान विभिन्न रिसर्च पेपरों को प्रदर्शनी के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में डॉ.पीएस नेगी, डॉ.राजेश शर्मा समेत कई अन्य अधिकारी मौजूद रहे।