चमोली कर्णप्रयाग के नंदानगर स्थित लाखी गांव के जंगल में लगी आग पर वनकर्मियों ने करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद काबू पाया। जंगल में लगी आग से पत्थर छिटककर निचले क्षेत्रों में आ गए। वनकर्मी मुश्किल से जान बचाकर भाग निकले। असामाजिक तत्वों ने लाखी वन पंचायत के लखणू तोक के रास्ते में आग छोड़ दी जो जंगल तक जा पहुंची।
जान बचाकर भागे वन कर्मी: तस्वीरों में देखिए उत्तराखंड के जंगलों की आग धीरे-धीरे लील रही वन संपदा
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वनाग्नि का सबसे अधिक कहर गढ़वाल के जंगलों पर टूट रहा है। यहां आठ घटनाएं रिपोर्ट की गईं हैं। जबकि कुमाऊं में पांच स्थानों पर आग लगी। वनाग्नि की इन घटनाओं में साढ़े आठ हेक्टेयर वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। बीते 24 घंटे में गढ़वाल में जिन आठ स्थानों पर आग लगी, सभी आरक्षित वन क्षेत्र का हिस्सा हैं।
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इस फायर सीजन में गढ़वाल में आरक्षित वन क्षेत्रों में आग की 125 घटनाएं, जबकि कुल 141 घटित हो चुकी हैं। इसी तरह से कुमाऊं में आरक्षित वन क्षेत्र में 82 और सिविल वन पंचायत में 42, कुल 124 घटनाएं सामने आ चुकी हैं।जबकि वन्य जीव विहारों में कुल 20 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। तीनों वन क्षेत्रों को मिलाकर प्रदेशभर में वनाग्नि की 285 घटनाएं रिपोर्ट की जा चुकी हैं। जिसमें करीब साढ़े तीन सौ हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है।
मोबाइल नंबर - 9557444476
इन घटनाओं में 12 लाख रुपये से अधिक के नुकसान का आकलन किया गया है। मुख्य वन संरक्षक, वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन निशांत वर्मा ने बताया कि बढ़ते तापमान के साथ रोज वनाग्नि की घटनाएं बढ़ रही हैं। वनाग्नि पर काबू पाने के लिए विभाग के स्तर से सभी जरूरी कार्रवाई की जा रही हैं। उन्होंने वनों को आग से बचाने के लिए विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ आम लोगों से भी अलर्ट पर रहने की अपील की है।
इन नंबरों पर दें वनाग्नि की घटनाओं की जानकारी
टोल फ्री नंबर - 18001804141
फोन नंबर - 0135- 2744559
वाट्स ऐप नंबर- 9379337488, 7668304788