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अस्पताल में नहीं मिली सुविधा तो जमीन पर करना पड़ा इलाज, रस्सी पर टांगी ग्लूकोज की बोतलें

Sat, 01 Dec 2018 09:53 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, बागेश्वर
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, बागेश्वर Updated Sat, 01 Dec 2018 09:53 PM IST
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Food Poisoning Affect patient Treatment on floor in village bageshwar
फूड प्वाइजनिंग

उत्तराखंड में बागेश्वर जिले के कपकोट के बास्ती गांव में फूड प्वाइजनिंग की घटना ने पहाड़ में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति की तरफ इशारा किया है। टीम जांच के लिए गई तो वहां अस्पताल में सुविधा ही नहीं मिली। इसके बाद डॉक्टरों को वहीं जमीन पर मरीजों का इलाज करना पड़ा। इतना ही नहीं वहां ग्लूकोज की बोतलें भी रस्सी पर टांगनी पड़ी। 

Food Poisoning Affect patient Treatment on floor in village bageshwar
फूड प्वाइजनिंग

उधर शनिवार को उल्टी-दस्त के मरीजों तक का इलाज बागेश्वर, अल्मोड़ा जैसे निकट के जिला और बेस अस्पताल में तक में नहीं हो सका है, उन्हें हल्द्वानी एसटीएच में इलाज के लिए लाना पड़ा है। उन्हें एसटीएच पहुंचाने में भी लापरवाह बरती गई। जब रोगी उल्टी-दस्त का शिकार हो और शरीर में सोडियम, पोटेशियम, ग्लूकोज जैसे जीवन रक्षक तत्व की कई बार कमी होने से कार्डियक अरेस्ट (हृदयाघात) तक हो जाता है, ऐसे में बिना जीवन रक्षक आरएल फ्लूइड(रिंगर लेक्टेट) की ड्रिप लगाए रोगियों को एसटीएच रेफर कर किया गया। बागेश्वर में इलाज के लिए हल्द्वानी से एक डॉक्टर को भेजा गया है।

Food Poisoning Affect patient Treatment on floor in village bageshwar
फूड प्वाइजनिंग

बीमार पड़े ढाई सौ से अधिक ग्रामीणों में से 17 बीमारों को सुशीला तिवारी अस्पताल लाया गया। इनमें 12 महिलाएं, दो पुरुष और तीन बच्चे शामिल थे। जिसमें से एक महिला और एक बच्ची की मौत हो गई। इनमें से सात मरीजों को तो तड़के चार बजे अस्पताल पहुंचा दिया गया जबकि शेष अन्य मरीजों को गौलापार स्थिति हेलीपेड में उतारने के बाद वहां से एंबुलेंस से अस्पताल लाया गया। इनमें से किसी भी मरीज को बिना फ्लूयड लगाए ही एसटीएच के लिए रेफर कर दिय गया। इसे देख चिकित्सक भी खुद दंग रह गए। डॉक्टरों का कहना था कि उल्टी दस्त की शिकायत होने पर मरीज को सबसे पहले फ्लूयड चढ़ाया जाता है ताकि उसके शरीर में पानी की कमी न होने पाए लेकिन यहां इन मरीजों को फ्लूड तक नहीं चढ़ा था। 

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फूड प्वाइजनिंग

बेड़ीनाग में सरकारी अस्पताल के हाल यह हैं कि यहां न तो फिजिशियन ही है और न ही जरूरी दवाईयां। इस स्थिति में जब अस्पताल में भर्ती मरीजों को जरूरी दवाएं नसीब नहीं हुई तो मुख्यमंत्री के सचिव और आयुक्त राजीव रौतेला के निर्देश पर रामनगर (नैनीताल) से एक फिजिशियन और जीवन रक्षक दवाओं के चार बंडल रविवार को बेड़ीनाग भेजे गए। जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन ने बताया कि मांग होने पर और भी दवाइयां और चिकित्सक यहां से भेजे जा सकते हैं।

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Food Poisoning Affect patient Treatment on floor in village bageshwar
फूड प्वाइजनिंग के बाद जांच के लिए लेटे लोग

बीमार ग्रामीणों को सुशीला तिवारी अस्पताल लाने के लिए सरकार ने केवल एक ही हेलीकाप्टर उपलब्ध कराया। दो चक्कर लगाने के बाद आसमान में धुंध छाई तो इस हेलीकाप्टर ने भी जवाब दे दिया। ऐसी स्थिति में हेलीकॉप्टर के पायलट ने तीसरे राउंड में बीमार लोगों को लाने से इंकार कर दिया। जानकारी होने पर डीएम विनोद कुमार सुमन ने शासन स्तर पर वार्ता करने के बाद पायलट से वाया रामनगर अथवा वाया टनकपुर होते हुए मरीजों को लाने को कहा लेकिन पायलट ने यह कहते हुए मना कर दिया कि विजिबिलिटी साफ न होने के कारण ऐसा संभव नहीं है। डीएम ने बताया कि जरूरत पड़ने पर अब रविवार को गंभीर रूप से बीमार ग्रामीणों को एसटीएच लाया गया जाएगा।

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