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इस गांव में 150 साल से नहीं खेली गई होली, हैरान कर देगी इसके पीछे की वजह

Fri, 02 Mar 2018 02:19 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 02 Mar 2018 02:19 PM IST
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Holika Dahan 2018 this village not celebrate holi since150 years
village

होली पर हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बता रहे हैं जहां पिछले 150 साल से होली नहीं खेली गई। बल्कि लोग इसे अभिशाप मानते हैं।

Holika Dahan 2018 this village not celebrate holi since150 years
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अबीर गुलाल के साथ होली के होल्यार, गांव से बाजारों में पहुंचने लगे हैं। जिले के नगरीय क्षेत्रों में भी बैठकी होली चरम पर है। लेकिन अगस्त्यमुनि विकासखंड के तल्लानागपुर पट्टी के क्वीली, कुरझण और जौंदला गांव, इस उत्साह व हलचल से कोसों दूर हैं। यहां न तो कोई होल्यार आता है और न ग्रामीण एक-दूसरे पर रंग लगाते हैं। लगभग बीते पंद्रह दशक से इन गांवों में होली नहीं मनाई गई है।
 

Holika Dahan 2018 this village not celebrate holi since150 years
village

जिला मुख्यालय से करीब 30 किमी दूर बसे इन तीन गांवों की बसागत 17 वीं सदी के मध्य की मानी जाती है। जम्मू-कश्मीर से कुछ पुरोहित परिवार अपने यजमान व काश्तकारों के साथ लगभग 370 वर्ष पूर्व यहां आकर बस गए थे। ये लोग, तब अपनी ईष्टदेवी मां त्रिपुरा सुंदरी की मूर्ति व पूजन सामग्री भी साथ लेकर आए थे, जिसे गांव में स्थापित किया गया।

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Holika Dahan 2018 this village not celebrate holi since150 years
Holika

अराध्य को वैष्णो देवी की बहन माना जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी कुलदेवी को होली का हुडदंग पसंद नहीं है, इसलिए वे सदियों से होली का त्यौहार नहीं मनाते हैं। बुर्जग ग्रामीण प्राचीन मान्यता का हवाला देते हुए बताते हैं कि डेढ़ सौ वर्ष पूर्व गांव में होली खेली तो, तीन गांवों में हैजा फैल गया था,  जिसमें कई लोग व्यापक रूप से आहत हो गए थे।

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Holika Dahan 2018 this village not celebrate holi since150 years
हैजा

तब, से आज तक गांव में होली नहीं खेली गई है। एचएनबी केंद्रीय विवि श्रीनगर गढ़वाल के लोक संस्कृति व निस्पादन केंद्र के पूर्व निदेशक व क्वीली गांव के निवासी डा. डीआर पुरोहित बताते हैं कि गांव में उनकी १५ पीढ़ी हो गई हैं। जब से होश संभाला है, होली नहीं खेलने की बात सुनी हैं।

 

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